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फिर विवादों में घिरा जिला कारागार
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:27 AM IST
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सहारनपुर। जिला कारागार एक बार फिर से भीम आर्मी के चलते विवादों से घिर गया है। पहले तो भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष का जेल के अंदर केक कटवाए जाने को लेकर जिला कारागार चर्चा में रहा, उसके बाद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर पर जेल में कुछ बंदियों द्वारा हमला किए जाने का आरोप लगा है।
भीम आर्मी के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद से ही वहां मौजूद अधिकारियों पर आरोप लगते आ रहे हैं। पहले तो निर्धारित सीमा से अधिक बार कुछ नेताओं को कई-कई घंटों तक जेल के अंदर बंदी भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर के साथ बैठक कराई गई। जब नेताओं पर रोक लगा दी गई तो दूसरे नामों से कुछ नेताओं को जेल में भेज दिया गया। जब इसका खुलासा हुआ तो जेल के कई अफसरों के तबादले कर दिए गए। लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो सका।
20 जुलाई को ही भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के जन्मदिन का केक जेल के अंदर बिना किसी जांच के पहुंच गया। जिसने जेल की सुरक्षा व्यवस्था और चेकिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। जेल में केक कट गया और जेल प्रशासन के अधिकारी अपने उच्चाधिकारियों को गुमराह ही करते रहे। मामला सार्वजनिक हो गया तो जेल प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक मामले की लीपा पोती में लगा रहा। मामले में लापरवाही पर जमकर जेल प्रशासन की किरकिरी हुई।
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अभी यह प्रकरण ठंडा भी नहीं हुआ कि भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने ही जिला कारागार में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण पर जेल में जानलेवा हमला होने का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट का घेराव कर ईंट से ईंट बजाने की चेतावनी दे डाली। यहां तक कि हिंसक आंदोलन की भी धमकी दी।
जेल प्रशासन की लगातार लापरवाही तो सामने आ ही रही है, मिलीभगत होने एवं जातिवादी मानसिकता के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। जिससे सहारनपुर जिला कारागार विवादों में घिर चुका है।
--। एक साल पहले हुई थी जेल में हत्या
पिछले वर्ष जिला कारागार में एक बंदी ने चम्मच से चाकू बनाकर दूसरे बंदी की गला रेत कर हत्या कर दी थी। उस समय भी जिला कारागार की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए थे। जबकि सहारनपुर के जिला कारागार में बंदियों के साथ मारपीट की घटनाएं लगातार होती रहीं हैं।
--। चंद्रशेखर के साथ नहीं हुई कोई मारपीट
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश शर्मा का कहना है कि न तो जेल में केक काटा गया और न ही चंद्रशेखर पर जेल में कोई हमला हुआ है। भीम आर्मी के कार्यकर्ता चर्चाओं में रहने के लिए जानबूझकर अफवाह फैला रहे हैं। उन्होंने चंद्रशेखर से हमला न होने के बारे में लिखित रूप में लिया है।
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भीम आर्मी के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद से ही वहां मौजूद अधिकारियों पर आरोप लगते आ रहे हैं। पहले तो निर्धारित सीमा से अधिक बार कुछ नेताओं को कई-कई घंटों तक जेल के अंदर बंदी भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर के साथ बैठक कराई गई। जब नेताओं पर रोक लगा दी गई तो दूसरे नामों से कुछ नेताओं को जेल में भेज दिया गया। जब इसका खुलासा हुआ तो जेल के कई अफसरों के तबादले कर दिए गए। लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो सका।
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20 जुलाई को ही भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के जन्मदिन का केक जेल के अंदर बिना किसी जांच के पहुंच गया। जिसने जेल की सुरक्षा व्यवस्था और चेकिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। जेल में केक कट गया और जेल प्रशासन के अधिकारी अपने उच्चाधिकारियों को गुमराह ही करते रहे। मामला सार्वजनिक हो गया तो जेल प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक मामले की लीपा पोती में लगा रहा। मामले में लापरवाही पर जमकर जेल प्रशासन की किरकिरी हुई।
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अभी यह प्रकरण ठंडा भी नहीं हुआ कि भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने ही जिला कारागार में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण पर जेल में जानलेवा हमला होने का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट का घेराव कर ईंट से ईंट बजाने की चेतावनी दे डाली। यहां तक कि हिंसक आंदोलन की भी धमकी दी।
जेल प्रशासन की लगातार लापरवाही तो सामने आ ही रही है, मिलीभगत होने एवं जातिवादी मानसिकता के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। जिससे सहारनपुर जिला कारागार विवादों में घिर चुका है।
--। एक साल पहले हुई थी जेल में हत्या
पिछले वर्ष जिला कारागार में एक बंदी ने चम्मच से चाकू बनाकर दूसरे बंदी की गला रेत कर हत्या कर दी थी। उस समय भी जिला कारागार की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए थे। जबकि सहारनपुर के जिला कारागार में बंदियों के साथ मारपीट की घटनाएं लगातार होती रहीं हैं।
--। चंद्रशेखर के साथ नहीं हुई कोई मारपीट
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश शर्मा का कहना है कि न तो जेल में केक काटा गया और न ही चंद्रशेखर पर जेल में कोई हमला हुआ है। भीम आर्मी के कार्यकर्ता चर्चाओं में रहने के लिए जानबूझकर अफवाह फैला रहे हैं। उन्होंने चंद्रशेखर से हमला न होने के बारे में लिखित रूप में लिया है।