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सहारनपुर में है आंतकियों का स्लीपर सेल!
Updated Mon, 07 Aug 2017 12:24 AM IST
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सहारनपुर में है आतंकियों का स्लीपर सेल!
सहारनपुर। बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्लाह की गिरफ्तारी और संदिग्ध फैजान के फरार होने के बाद बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर बार-बार सहारनपुर ही क्यों? पहले जैश ए मोहम्म्द, लश्कर ए तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन के बाद बांग्लादेश का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के सक्रिय सदस्यों के सहारनपुर कनेक्शन से एक बार आतंकी संगठनों की सक्रियता सामने आई है। इससे वेस्ट यूपी में स्लीपर सेल के सक्रिय होने की संभावनाओं को भी बल मिलने लगा है। पुलिस अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं। यह बात इसलिए भी पुष्ट हो रही है कि एटीएस की टीम में देवबंद से तीन संदिग्धों की गिरफ्तारी और मुख्य संदिग्ध फैजान के ठिकाने पर की गई छापेमारी में मिली संदिग्ध वस्तुएं इनके मंसूबों का खुलासा कर रहे हैं।
करीब 20 वर्ष पहले जैश ए मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए यहां पांच विदेशी नागरिकों को बंधक बनाने की घटना हुई है या फिर पाक के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ा गया शाहिद इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल। जनवरी, 2010 में भी रुड़की के गंगनहर थाना पुलिस के साथ एटीएस, एसटीएफ द्वारा पकड़े गए आईएसआई एजेंट आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अबू बकर उर्फ अजीत सिंह निवासी हंजरवाल, थाना ठोकर न्याजबेग, लाहौर से भी गोपनीय दस्तावेज और रुड़की छावनी का नक्शा बरामद हुआ था। उसने सहारनपुर के छुटमलपुर में रहकर यह जानकारियां एकत्रित की थीं। मार्च, 2010 को मुंबई में आतंकी संगठन लश्कर के रियाज, अब्दुल लतीफ को मुंबई एटीएस ने पकड़ा था। उसके पास से सहारनपुर और मऊ के फोन नंबर मिले थे। हाल ही में देवबंद निवासी जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी को आतंकी यासीन भटकल ने धमकी दी थी। करीब तीन साल पहले पकड़े गए लश्कर आतंकी अब्दुल सुभान के पुत्र आलम को भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देवबंद से हिरासत में लिया था। वह यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था। अब्दुल सुभान पर आरोप है कि उसने मुजफ्फरनगर दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा कर यहां के युवकों का ब्रेन वॉश कर संगठन से जोड़ा था। वह पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडर जावेद बलूची से सीधे संपर्क में था। इसके बाद वर्ष 2014 में सहारनपुर रेलवे स्टेशन से पकड़ गये इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी एजाज सईद शेख ने बड़ा खुलासा किया था। उस वक्त पकड़े गए एजाज शेख ने दिल्ली स्पेशल सेल के सामने खुलासा किया था कि देवबंद क्षेत्र में तीन आतंकी छिपे हुए हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारी इसी में हर बार सहारनपुर कनेक्शन का जवाब तलाश रहे हैं। पुलिस सूत्र बताते हैं कि सहारनपुर में कई स्लीपर सेल्स सक्रिय हैं, जिसमें विशेष प्रशिक्षण प्राप्त गुप्ट एजेंट कार्य कर रहे हैं। इन्होंने ऐसा कौशल और तकनीक विकसित कर ली, जिससे पुलिस को भनक तक न लग सके। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान शिविरों में आतंकियों द्वारा प्रयोग किए गए सेटेलाइट फोन की लोकेशन भी सहारनपुर में मिली थी। हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश की सीमाओं पर बसे सहारनपुर की मिश्रित संस्कृति भी इसकी वजह मानी जा सकती है। उधर, एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि आतंकी सक्रियता को लेकर पुलिस बेहद अलर्ट है। हम स्लीपर सेल की तलाश में जुटे हैं। खुफिया इकाइयों को भी सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं।
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क्या है स्लीपर सेल
सहारनपुर। स्लीपर सेल अपने मूल प्रदेश या प्रांत में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त गुप्त एजेंटों से लैस होता है। हथियार, आधुनिक संचार उपकरण और अन्य साजों सामान से लैस रहने वाले एजेंटों को निशाना बनाने वाले देश या प्रदेश की संस्कृति या समुदाय में खुद को खपाने की जिम्मेदारी देकर भेज दिया जाता है। दहशत फैलाने के साथ साथ आतंकी संगठन ऐसे ही स्लीपर सेल से खुफिया जानकारी भी प्राप्त करते हैं।
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सहारनपुर। बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्लाह की गिरफ्तारी और संदिग्ध फैजान के फरार होने के बाद बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर बार-बार सहारनपुर ही क्यों? पहले जैश ए मोहम्म्द, लश्कर ए तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन के बाद बांग्लादेश का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के सक्रिय सदस्यों के सहारनपुर कनेक्शन से एक बार आतंकी संगठनों की सक्रियता सामने आई है। इससे वेस्ट यूपी में स्लीपर सेल के सक्रिय होने की संभावनाओं को भी बल मिलने लगा है। पुलिस अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं। यह बात इसलिए भी पुष्ट हो रही है कि एटीएस की टीम में देवबंद से तीन संदिग्धों की गिरफ्तारी और मुख्य संदिग्ध फैजान के ठिकाने पर की गई छापेमारी में मिली संदिग्ध वस्तुएं इनके मंसूबों का खुलासा कर रहे हैं।
करीब 20 वर्ष पहले जैश ए मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए यहां पांच विदेशी नागरिकों को बंधक बनाने की घटना हुई है या फिर पाक के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ा गया शाहिद इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल। जनवरी, 2010 में भी रुड़की के गंगनहर थाना पुलिस के साथ एटीएस, एसटीएफ द्वारा पकड़े गए आईएसआई एजेंट आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अबू बकर उर्फ अजीत सिंह निवासी हंजरवाल, थाना ठोकर न्याजबेग, लाहौर से भी गोपनीय दस्तावेज और रुड़की छावनी का नक्शा बरामद हुआ था। उसने सहारनपुर के छुटमलपुर में रहकर यह जानकारियां एकत्रित की थीं। मार्च, 2010 को मुंबई में आतंकी संगठन लश्कर के रियाज, अब्दुल लतीफ को मुंबई एटीएस ने पकड़ा था। उसके पास से सहारनपुर और मऊ के फोन नंबर मिले थे। हाल ही में देवबंद निवासी जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी को आतंकी यासीन भटकल ने धमकी दी थी। करीब तीन साल पहले पकड़े गए लश्कर आतंकी अब्दुल सुभान के पुत्र आलम को भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देवबंद से हिरासत में लिया था। वह यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था। अब्दुल सुभान पर आरोप है कि उसने मुजफ्फरनगर दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा कर यहां के युवकों का ब्रेन वॉश कर संगठन से जोड़ा था। वह पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडर जावेद बलूची से सीधे संपर्क में था। इसके बाद वर्ष 2014 में सहारनपुर रेलवे स्टेशन से पकड़ गये इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी एजाज सईद शेख ने बड़ा खुलासा किया था। उस वक्त पकड़े गए एजाज शेख ने दिल्ली स्पेशल सेल के सामने खुलासा किया था कि देवबंद क्षेत्र में तीन आतंकी छिपे हुए हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारी इसी में हर बार सहारनपुर कनेक्शन का जवाब तलाश रहे हैं। पुलिस सूत्र बताते हैं कि सहारनपुर में कई स्लीपर सेल्स सक्रिय हैं, जिसमें विशेष प्रशिक्षण प्राप्त गुप्ट एजेंट कार्य कर रहे हैं। इन्होंने ऐसा कौशल और तकनीक विकसित कर ली, जिससे पुलिस को भनक तक न लग सके। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान शिविरों में आतंकियों द्वारा प्रयोग किए गए सेटेलाइट फोन की लोकेशन भी सहारनपुर में मिली थी। हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश की सीमाओं पर बसे सहारनपुर की मिश्रित संस्कृति भी इसकी वजह मानी जा सकती है। उधर, एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि आतंकी सक्रियता को लेकर पुलिस बेहद अलर्ट है। हम स्लीपर सेल की तलाश में जुटे हैं। खुफिया इकाइयों को भी सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं।
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क्या है स्लीपर सेल
सहारनपुर। स्लीपर सेल अपने मूल प्रदेश या प्रांत में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त गुप्त एजेंटों से लैस होता है। हथियार, आधुनिक संचार उपकरण और अन्य साजों सामान से लैस रहने वाले एजेंटों को निशाना बनाने वाले देश या प्रदेश की संस्कृति या समुदाय में खुद को खपाने की जिम्मेदारी देकर भेज दिया जाता है। दहशत फैलाने के साथ साथ आतंकी संगठन ऐसे ही स्लीपर सेल से खुफिया जानकारी भी प्राप्त करते हैं।
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