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दो कमरे थे एटीएस के निशाने पर, एक में मिले दोनों आतंकी
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देवबंद (सहारनपुर)। नाज मंजिल के जिन कमरों से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को गिरफ्तार किया गया, वह दोनों कमरे एटीएस के निशाने पर पहले से ही थे। एटीएस सटीक सूचना पर नाज बिल्डिंग में पहुंची और सीधे उन्हीं दोनों कमरों के दरवाजे तोड़ते हुए घुस गई। रात में ईदगाह रोड पर नाज मंजिल में एटीएस कार्रवाई इतनी गोपनीय रही कि किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
दरअसल, एटीएस जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को गिरफ्तार करने से पहले पूरा होमवर्क करके ही पहुंची थी। यही वजह रही है कि बिल्डिंग में घुसते ही एटीएस ने प्रथम मंजिल पर गैलरी में घुसकर आखिर में आमने सामने बने कमरा नंबर ए थ्री और ए फोर में छापेमारी की।
दो वाहनों में आए एटीएस के सदस्यों ने पहले दरवाजा खटखटाया, दरवाजा नहीं खोला गया तो उन्होंने बंदूकों की बट मारकर दोनों दरवाजे तोड़ दिए। हालांकि टीम को कमरा नंबर ए थ्री में कुछ नहीं मिला, लेकिन ए फोर से उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के दोनों आतंकियों को दबोच लिया।
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छात्रों ने लगाया मारपीट का आरोप
देवबंद। नाज बिल्डिंग में जब एटीएस छापेमारी करने पहुंची तो कदमों की आहट सुनकर बगल वाले कमरों से छात्र बाहर निकल आए थे। आरोप है कि एटीएस के सदस्यों ने उन्हें गनप्वाइंट पर ले लिया और पीछे की तरफ हाथ बांधकर कमरों में कैद कर दिया। करीब आधा घंटे तक वह कमरे में ही बंद रहे। टीम कमरों के बाहर की कुंडी लगाकर वहां से चली गई। बाद में कमरे में लगे टूटे जंगले से बाहर निकले एक छात्र ने कमरे खोले और उन्हें बाहर निकाला। बिजनौर, बिहार, झारखंड के छात्रों ने एटीएस पर अभद्रता और मारपीट करने का आरोप भी लगाया। बिहार निवासी एक छात्र ने आंख के पास और हाथ पर लगे मारपीट के निशान भी दिखाए। हालांकि डर की वजह से उसने अपना नाम नहीं बताया और न ही मारपीट के निशान के फोटो करने की इजाजत दी।
- बम कैसे बनाते हो बताओ
देवबंद। नाज मंजिल में रहने वाले छात्रों ने बताया कि एटीएस ने जब उनको बंधक बनाया तो वह अभद्रता करते हुए चीख कर पूछ रहे थे कि बम कैसे बनाते हो, बताओ। वह इतना डरे हुए थे कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वह उनकी बातों का क्या जवाब दें। उनके आधुनिक हथियार देखकर सांसें अटकी हुई थीं। लग रहा था आज उनका आखिरी दिन है, उन्हें गोली मार दी जाएगी।
देवबंद ही जगह मिली पढ़ने के लिए
देवबंद। एटीएस ने कार्रवाई के दौरान छात्रों से यह भी कहा कि उन्हें देवबंद ही जगह मिली थी पढ़ाई करने के लिए। ओडिशा, बिजनौर और झारखंड के छात्रों का कहना था कि एटीएस ने जिस तरीके से कार्रवाई की उसे किसी भी दशा में उचित नहीं ठहराया जा सकता। टीम चाहती तो उन्हें विश्वास में लेकर कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन बिल्डिंग में रहने वाले छात्रों के साथ अभद्रता की गई।
- ईदगाह मैदान में खेल रहे छात्रों को एटीएस ने भगाया
देवबंद। नाज मंजिल में छापेमारी करने से पहले एटीएस ने बिल्डिंग के आसपास कई चक्कर लगाए। शुक्रवार को मदरसा छात्रों की छुट्टी होती है जिस कारण वह बृहस्पतिवार में देर रात तक जागते हैं। छुट्टी होने की वजह से कुछ मदरसा छात्र नाज मंजिल के सामने ईदगाह के मैदान में खेल रहे थे। रात्रि करीब 12 बजे एटीएस और पुलिस वहां पहुंची और वहां खेल रहे बच्चों को भगा दिया। चहल पहल होने के चलते एटीएस वहां चक्कर काटती रही। देर रात्रि करीब ढाई बजे टीम नाज मंजिल में छापेमारी के लिए घुसी।
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दरअसल, एटीएस जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को गिरफ्तार करने से पहले पूरा होमवर्क करके ही पहुंची थी। यही वजह रही है कि बिल्डिंग में घुसते ही एटीएस ने प्रथम मंजिल पर गैलरी में घुसकर आखिर में आमने सामने बने कमरा नंबर ए थ्री और ए फोर में छापेमारी की।
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दो वाहनों में आए एटीएस के सदस्यों ने पहले दरवाजा खटखटाया, दरवाजा नहीं खोला गया तो उन्होंने बंदूकों की बट मारकर दोनों दरवाजे तोड़ दिए। हालांकि टीम को कमरा नंबर ए थ्री में कुछ नहीं मिला, लेकिन ए फोर से उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के दोनों आतंकियों को दबोच लिया।
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छात्रों ने लगाया मारपीट का आरोप
देवबंद। नाज बिल्डिंग में जब एटीएस छापेमारी करने पहुंची तो कदमों की आहट सुनकर बगल वाले कमरों से छात्र बाहर निकल आए थे। आरोप है कि एटीएस के सदस्यों ने उन्हें गनप्वाइंट पर ले लिया और पीछे की तरफ हाथ बांधकर कमरों में कैद कर दिया। करीब आधा घंटे तक वह कमरे में ही बंद रहे। टीम कमरों के बाहर की कुंडी लगाकर वहां से चली गई। बाद में कमरे में लगे टूटे जंगले से बाहर निकले एक छात्र ने कमरे खोले और उन्हें बाहर निकाला। बिजनौर, बिहार, झारखंड के छात्रों ने एटीएस पर अभद्रता और मारपीट करने का आरोप भी लगाया। बिहार निवासी एक छात्र ने आंख के पास और हाथ पर लगे मारपीट के निशान भी दिखाए। हालांकि डर की वजह से उसने अपना नाम नहीं बताया और न ही मारपीट के निशान के फोटो करने की इजाजत दी।
- बम कैसे बनाते हो बताओ
देवबंद। नाज मंजिल में रहने वाले छात्रों ने बताया कि एटीएस ने जब उनको बंधक बनाया तो वह अभद्रता करते हुए चीख कर पूछ रहे थे कि बम कैसे बनाते हो, बताओ। वह इतना डरे हुए थे कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वह उनकी बातों का क्या जवाब दें। उनके आधुनिक हथियार देखकर सांसें अटकी हुई थीं। लग रहा था आज उनका आखिरी दिन है, उन्हें गोली मार दी जाएगी।
देवबंद ही जगह मिली पढ़ने के लिए
देवबंद। एटीएस ने कार्रवाई के दौरान छात्रों से यह भी कहा कि उन्हें देवबंद ही जगह मिली थी पढ़ाई करने के लिए। ओडिशा, बिजनौर और झारखंड के छात्रों का कहना था कि एटीएस ने जिस तरीके से कार्रवाई की उसे किसी भी दशा में उचित नहीं ठहराया जा सकता। टीम चाहती तो उन्हें विश्वास में लेकर कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन बिल्डिंग में रहने वाले छात्रों के साथ अभद्रता की गई।
- ईदगाह मैदान में खेल रहे छात्रों को एटीएस ने भगाया
देवबंद। नाज मंजिल में छापेमारी करने से पहले एटीएस ने बिल्डिंग के आसपास कई चक्कर लगाए। शुक्रवार को मदरसा छात्रों की छुट्टी होती है जिस कारण वह बृहस्पतिवार में देर रात तक जागते हैं। छुट्टी होने की वजह से कुछ मदरसा छात्र नाज मंजिल के सामने ईदगाह के मैदान में खेल रहे थे। रात्रि करीब 12 बजे एटीएस और पुलिस वहां पहुंची और वहां खेल रहे बच्चों को भगा दिया। चहल पहल होने के चलते एटीएस वहां चक्कर काटती रही। देर रात्रि करीब ढाई बजे टीम नाज मंजिल में छापेमारी के लिए घुसी।