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कोरोना ने छीना तीन बेटियों से पिता का साया
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सहारनपुर। घर में तीन मासूम बेटियां हैं, जिनके सिर से पिता का साया कोरोना ने छीन लिया। मासूम बेटियां खुद को अकेला महसूस करती हैं तो भाई पर जिम्मेदारी का बोझ आ गया है। यह पीड़ा है देवबंद के सहायक अध्यापक मोहम्मद साबिर के परिवार की। ऐसी ही पीड़ा उन सभी शिक्षकों के परिवारों की हैं, जिनकी मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई है। उनमें किसी का जवान बेटा तो किसी परिवार के बच्चों से उनका पिता कोरोना ने छीन लिया।
देवबंद निवासी मोहम्मद साबिर उच्च प्राथमिक विद्यालय फतेहपुर में सहायक अध्यापक थे। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी इनकी ड्यूटी लगी थी। इसके बाद तबीयत खराब हुई और 29 अप्रैल को उनका निधन हो गया। मोहम्मद साबिर के भाई साजिद भी अध्यापक हैं और इस समय ललितपुर जिले में तैनात हैं। साजिद बताते हैं कि साबिर की तीन बेटियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी 12 साल की है, उनके सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार में उनकी बूढ़ी मां है, जो बीमार रहती हैं। उन्हें हर 15 दिन में उपचार के लिए मेरठ ले जाना पड़ता है। अब परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई है, लेकिन वह अपनी ड्यूटी के लिए ललितपुर जाएंगे तो बहुत मुश्किल हो जाएगी। --- बच्चों की परवरिश कैसे होगी
जनता रोड स्थित अर्पित विहार कॉलोनी में रहने वाले सुनील कुमार सलेमपुर भूकड़ी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। सुनील कुमार का निधन 16 अप्रैल को हो गया। उनके दो बेटे हैं, जिनमें बड़ा 11 साल का है। सुनील के भाई का कहना है कि दोनों बच्चे मासूम हैं, पिता को याद कर सुबक जाते हैं, उनका पढ़ाई में भी मन नहीं लगता है। चिंता यही है कि इनकी परवरिश कैसे होगी।
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--- कोरोना ने छीन लिया जवान बेटा
नकुड़ के मोहल्ला चौधरियान निवासी जीवेश कुमार प्राथमिक विद्यालय टौली में सहायक अध्यापक थे। उनकी उम्र महज 29 साल थी और अविवाहित थे। पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी गांव खेड़ा में लगी थी। इसके बाद घर लौटने पर उनकी तबीयत खराब रहने लगी। कोविड जांच पॉजिटिव आई, जिसके बाद उपचार कराया गया, लेकिन 29 अप्रैल को जीवेश का निधन हो गया। जीवेश के पिता ब्रह्म सिंह कहते हैं कि कोरोना ने उनका जवान बेटा छीन लिया, बेटे को याद कर आंखें भर आती हैं। उसके लिए कई सपने पाल रखे थे, बेटी की शादी धूमधाम से करनी थी, लेकिन सब सपने चकनाचूर हो गए।
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देवबंद निवासी मोहम्मद साबिर उच्च प्राथमिक विद्यालय फतेहपुर में सहायक अध्यापक थे। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी इनकी ड्यूटी लगी थी। इसके बाद तबीयत खराब हुई और 29 अप्रैल को उनका निधन हो गया। मोहम्मद साबिर के भाई साजिद भी अध्यापक हैं और इस समय ललितपुर जिले में तैनात हैं। साजिद बताते हैं कि साबिर की तीन बेटियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी 12 साल की है, उनके सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार में उनकी बूढ़ी मां है, जो बीमार रहती हैं। उन्हें हर 15 दिन में उपचार के लिए मेरठ ले जाना पड़ता है। अब परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई है, लेकिन वह अपनी ड्यूटी के लिए ललितपुर जाएंगे तो बहुत मुश्किल हो जाएगी। --- बच्चों की परवरिश कैसे होगी
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जनता रोड स्थित अर्पित विहार कॉलोनी में रहने वाले सुनील कुमार सलेमपुर भूकड़ी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। सुनील कुमार का निधन 16 अप्रैल को हो गया। उनके दो बेटे हैं, जिनमें बड़ा 11 साल का है। सुनील के भाई का कहना है कि दोनों बच्चे मासूम हैं, पिता को याद कर सुबक जाते हैं, उनका पढ़ाई में भी मन नहीं लगता है। चिंता यही है कि इनकी परवरिश कैसे होगी।
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--- कोरोना ने छीन लिया जवान बेटा
नकुड़ के मोहल्ला चौधरियान निवासी जीवेश कुमार प्राथमिक विद्यालय टौली में सहायक अध्यापक थे। उनकी उम्र महज 29 साल थी और अविवाहित थे। पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी गांव खेड़ा में लगी थी। इसके बाद घर लौटने पर उनकी तबीयत खराब रहने लगी। कोविड जांच पॉजिटिव आई, जिसके बाद उपचार कराया गया, लेकिन 29 अप्रैल को जीवेश का निधन हो गया। जीवेश के पिता ब्रह्म सिंह कहते हैं कि कोरोना ने उनका जवान बेटा छीन लिया, बेटे को याद कर आंखें भर आती हैं। उसके लिए कई सपने पाल रखे थे, बेटी की शादी धूमधाम से करनी थी, लेकिन सब सपने चकनाचूर हो गए।