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Saharanpur News: ठेकेदार पर 54 लाख जुर्माना, अधिकारी ने लगाया 50 हजार, डीएम ने बैठाई जांच
Sat, 21 Jun 2025 12:32 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 21 Jun 2025 12:32 AM IST
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सहारनपुर। स्मार्ट सिटी के हैबिटेट सेंटर को लेकर बड़ा मामला सामने आया है, जिस ठेकेदार पर 54 लाख रुपये जुर्माना लगना था, तत्कालीन परियोजना प्रबंधक ने अपने कार्यकाल के दौरान उस पर मात्र 50 हजार का जुर्माना लगाया। जिलाधिकारी ने जुर्माना राशि 54 लाख कराते हुए पूरे मामले में जांच बिठा दी है।
स्मार्ट सिटी के तहत अंबाला रोड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्टेडियम के पास हैबिटेट सेंटर बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 25 करोड़ है। यह कार्य दिसंबर 2024 में पूरा होना था, लेकिन अभी तक करीब 70 फीसदी कार्य ही पूरा हुआ है।
कार्य में देरी के चलते अधिकारियों के निर्देश पर परियोजना प्रबंधक की तरफ से ठेकेदार पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया, जबकि नियमानुसार 54 लाख रुपये जुर्माना लगना था, यह मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा। तब उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए 54 लाख जुर्माना लगाने के आदेश दिए।
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ठेकेदार पर 54 लाख रुपये जुर्माना भी लग गया, लेकिन इसी बीच परियोजना प्रबंधक का यहां से तबादला हो गया। ठेकेदार को फायदा क्यों पहुंचाया गया, इसके पीछे क्या मंशा थी, जिलाधिकारी ने इसकी जांच बिठा दी है।
वर्तमान परियोजना प्रबंधक से पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी गई है। कमी पाए जाने पर मामले को विजिलेंस को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
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स्मार्ट सिटी के तहत अंबाला रोड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्टेडियम के पास हैबिटेट सेंटर बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 25 करोड़ है। यह कार्य दिसंबर 2024 में पूरा होना था, लेकिन अभी तक करीब 70 फीसदी कार्य ही पूरा हुआ है।
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कार्य में देरी के चलते अधिकारियों के निर्देश पर परियोजना प्रबंधक की तरफ से ठेकेदार पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया, जबकि नियमानुसार 54 लाख रुपये जुर्माना लगना था, यह मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा। तब उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए 54 लाख जुर्माना लगाने के आदेश दिए।
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ठेकेदार पर 54 लाख रुपये जुर्माना भी लग गया, लेकिन इसी बीच परियोजना प्रबंधक का यहां से तबादला हो गया। ठेकेदार को फायदा क्यों पहुंचाया गया, इसके पीछे क्या मंशा थी, जिलाधिकारी ने इसकी जांच बिठा दी है।
वर्तमान परियोजना प्रबंधक से पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी गई है। कमी पाए जाने पर मामले को विजिलेंस को सौंपने के निर्देश दिए हैं।