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Saharanpur News: इमरान के कंधों पर कांग्रेस का पश्चिमी यूपी मिशन, तीन मोर्चों पर होगी परीक्षा
Sun, 04 Oct 2026 01:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 04 Oct 2026 01:09 AM IST
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सहारनपुर। कांग्रेस में सांसद इमरान मसूद का कद बढ़ने के साथ ही उनकी राजनीतिक भूमिका भी बदल गई है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। अब तक पश्चिमी यूपी की राजनीति में प्रभाव रखने वाले इमरान के सामने प्रदेश स्तर पर अपनी भूमिका साबित करने की चुनौती होगी। माना जा रहा है कि उनकी परीक्षा तीन मोर्चों पर होगी। पश्चिमी यूपी में कांग्रेस को मजबूत करना, मुस्लिम मतदाताओं के बीच पकड़ और सपा के साथ गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस की हिस्सेदारी तय कराना।
दरअसल, इमरान की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत पश्चिमी यूपी मानी जाती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर से जीत के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव और बढ़ा। अब कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी देकर पश्चिमी यूपी से बाहर भी भूमिका दी है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने प्रभाव को कितने जिलों और विधानसभा क्षेत्रों तक विस्तार दे पाते हैं। दूसरी चुनौती संगठन की है। कांग्रेस लंबे समय से प्रदेश में कमजोर संगठन और सीमित चुनावी उपस्थिति से जूझती रही है। नई टीम में ब्राह्मण, मुस्लिम, ओबीसी और अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाया गया है। इमरान मसूद की मुस्लिम मतदाताओं में कितनी पकड़ है यह भी साबित करना होगा।
तीसरा और सबसे अहम मोर्चा सपा के साथ तालमेल का है। 2024 में कांग्रेस और सपा ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इमरान सार्वजनिक रूप से गठबंधन में कांग्रेस की हिस्सेदारी और जल्द सीट बंटवारे की पैरवी करते रहे हैं। ऐसे में कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद बातचीत की मेज पर उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। अब सवाल यह है कि सहारनपुर के सांसद से प्रदेश के रणनीतिक चेहरे तक पहुंचे इमरान अपने प्रभाव को संगठन और चुनावी रणनीति में कितना बदल पाते हैं। यही उनकी नई जिम्मेदारी की असली कसौटी होगी।
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इकरा हसन से लेकर आशु मलिक पर कर चुके हैं बयानबाजी
इमरान मसूद की राजनीति में बेबाक बयानबाजी हमेशा चर्चा में रही है। सपा नेतृत्व को लेकर उनके बयानों से लेकर विधायक आशु मलिक के साथ सार्वजनिक नोकझोंक और सांसद इकरा हसन के साथ हालिया बयानबाजी तक, उनके और सपा नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए। अब प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर उन्हें यही तल्ख तेवर कांग्रेस की राजनीतिक बातचीत में इस्तेमाल करने होंगे, लेकिन गठबंधन की जरूरतों के बीच संतुलन भी बनाना होगा।
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सातों विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बेहट तहसील में मुस्लिम आबादी करीब 51.2 प्रतिशत, सहारनपुर तहसील में 46.8 प्रतिशत, नकुड़ तहसील में 38.5 प्रतिशत, देवबंद तहसील में 39.8 प्रतिशत और रामपुर मनिहारान तहसील में मुस्लिम आबादी करीब 20.2 प्रतिशत है। यानी कि सभी सीटों पर मुस्लिम आबादी है, जिनकी चुनाव में अहम भूमिका रहती है। इनके अलावा गुर्जर, सैनी और राजपूत के अलावा अन्य जातियां भी चुनाव में निर्णायक साबित होती है।
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दरअसल, इमरान की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत पश्चिमी यूपी मानी जाती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर से जीत के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव और बढ़ा। अब कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी देकर पश्चिमी यूपी से बाहर भी भूमिका दी है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने प्रभाव को कितने जिलों और विधानसभा क्षेत्रों तक विस्तार दे पाते हैं। दूसरी चुनौती संगठन की है। कांग्रेस लंबे समय से प्रदेश में कमजोर संगठन और सीमित चुनावी उपस्थिति से जूझती रही है। नई टीम में ब्राह्मण, मुस्लिम, ओबीसी और अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाया गया है। इमरान मसूद की मुस्लिम मतदाताओं में कितनी पकड़ है यह भी साबित करना होगा।
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तीसरा और सबसे अहम मोर्चा सपा के साथ तालमेल का है। 2024 में कांग्रेस और सपा ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इमरान सार्वजनिक रूप से गठबंधन में कांग्रेस की हिस्सेदारी और जल्द सीट बंटवारे की पैरवी करते रहे हैं। ऐसे में कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद बातचीत की मेज पर उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। अब सवाल यह है कि सहारनपुर के सांसद से प्रदेश के रणनीतिक चेहरे तक पहुंचे इमरान अपने प्रभाव को संगठन और चुनावी रणनीति में कितना बदल पाते हैं। यही उनकी नई जिम्मेदारी की असली कसौटी होगी।
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इकरा हसन से लेकर आशु मलिक पर कर चुके हैं बयानबाजी
इमरान मसूद की राजनीति में बेबाक बयानबाजी हमेशा चर्चा में रही है। सपा नेतृत्व को लेकर उनके बयानों से लेकर विधायक आशु मलिक के साथ सार्वजनिक नोकझोंक और सांसद इकरा हसन के साथ हालिया बयानबाजी तक, उनके और सपा नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए। अब प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर उन्हें यही तल्ख तेवर कांग्रेस की राजनीतिक बातचीत में इस्तेमाल करने होंगे, लेकिन गठबंधन की जरूरतों के बीच संतुलन भी बनाना होगा।
सातों विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बेहट तहसील में मुस्लिम आबादी करीब 51.2 प्रतिशत, सहारनपुर तहसील में 46.8 प्रतिशत, नकुड़ तहसील में 38.5 प्रतिशत, देवबंद तहसील में 39.8 प्रतिशत और रामपुर मनिहारान तहसील में मुस्लिम आबादी करीब 20.2 प्रतिशत है। यानी कि सभी सीटों पर मुस्लिम आबादी है, जिनकी चुनाव में अहम भूमिका रहती है। इनके अलावा गुर्जर, सैनी और राजपूत के अलावा अन्य जातियां भी चुनाव में निर्णायक साबित होती है।