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विश्व ओजोन दिवस : वायु प्रदूषण रोकने के लिए नहीं उठाए जाते ठोस कदम
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सहारनपुर। कोरोना की पहली लहर में संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान सुधरी हवा की गुणवत्ता फिर से खराब हो गई है। हवा की गुणवत्ता खराब होने के लिए कई विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं, जो बिना अनुमति के संचालित ऐसे उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करने से बचते रहे हैं, जिनकी चिमनियां धुआं उगल रही हैं।
बीते वर्ष संपूर्ण लॉकडाउन में तमाम उद्योग और यातायात बंद होने की वजह से एक्यूआई (हवा की गुणवत्ता) 40 तक आ गई थी, इसके चलते पर्वत श्रंखला यहां तक की गंगोत्री तक के पहाड़ दिखने लगे थे। अब स्थिति सामान्य है। तमाम उद्योग और यातायात चल रहा है। वर्तमान समय में सामान्य दिनों में हवा की गुणवत्ता 100 और उससे ऊपर जा रही है। बरसात के दिनों में जरूर एक्यूआई 60 तक आता है। हवा की गुणवत्ता खराब होने की एक प्रमुख वजह बिना अनुमति चल रहे उन उद्योगों पर कार्रवाई नहीं करना है, इनकी चिमनियां धुआं उगल रही हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग को यह तक नहीं पता है कि शहर में कितने उद्योग संचालित हैं।
जलाया जाता है कचरा
एनजीटी के आदेश हैं कि कचरा न जलाया जाए, मगर शहर में समय-समय पर कचरा जलाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कमेला कॉलोनी क्षेत्र में बने कचरे के पहाड़ से अक्सर धुआं उठता देखा जा सकता है। बीते दिनों शकलापुरी मार्ग पर किसी ने कचरे में आग लगाई थी। कुछ दिन पहले कलेक्ट्रेट परिसर में कर्मचारी कचरा जलाते मिले थे। इसके अलावा जिला अस्पताल में भी कचरे को जलाया जाता है।
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शहर से बाहर नहीं हुए ईंट भट्टे
नगर निकाय में संचालित ईंट भट्ठों को नगरों से बाहर स्थापित करने के आदेश हैं। इसकी जिम्मेदारी संबंधित नगर निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है। चिह्नित करने का जिम्मा नगर निकायों का है, इसके बाद आगे की कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा। अभी तक ईंट भट्ठे चिह्नित नहीं किए जा सके हैं। नगर निगम क्षेत्र में भी दाबकी क्षेत्र, कालागढ़ क्षेत्र में ईंट भट्ठों की छाई आबादी क्षेत्र में बैठती है, इससे लोग बीमार हो रहे हैं।
खटारा वाहनों पर नहीं होती कार्रवाई
शहर में बड़ी संख्या में ऐसे खटारा वाहन चल रहे हैं, जिन्हें काला धुआं उगलते देखा जा सकता है। इनमें थ्री व्हीलर और ट्रक शामिल हैं। इन वाहनों की धुआं एक ओर जहां पर्यावरण को दूषित करता है, वहीं सीधे सांस के जरिए राहगीरों के शरीर में प्रवेश कर उन्हें बीमार बनाता है।
निगम के कदम भी नाकाफी
नगर निगम शहर को हरा भरा बनाने के लिए अभियान चला रहा है। बीते वर्ष 70 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था। इस बार भी पौधरोपण किया है। नारा दिया था कार्बन मुक्त सहारनपुर का, लेकिन अभी उसका असर नहीं है। इसके अलावा जापानी तकनीक मियावाकी वन तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन अभी यह कारगर नहीं हो सके हैं।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कई विभागों पर जिम्मेदारी है। समय-समय पर कार्रवाई की भी जाती रही हैं। यदि कोई उद्योग बिना अनुमति के चल रहा है और प्रदूषण फैला रहा है तो शिकायत मिलने पर उसके विरुद्घ कार्रवाई होगी।
- डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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बीते वर्ष संपूर्ण लॉकडाउन में तमाम उद्योग और यातायात बंद होने की वजह से एक्यूआई (हवा की गुणवत्ता) 40 तक आ गई थी, इसके चलते पर्वत श्रंखला यहां तक की गंगोत्री तक के पहाड़ दिखने लगे थे। अब स्थिति सामान्य है। तमाम उद्योग और यातायात चल रहा है। वर्तमान समय में सामान्य दिनों में हवा की गुणवत्ता 100 और उससे ऊपर जा रही है। बरसात के दिनों में जरूर एक्यूआई 60 तक आता है। हवा की गुणवत्ता खराब होने की एक प्रमुख वजह बिना अनुमति चल रहे उन उद्योगों पर कार्रवाई नहीं करना है, इनकी चिमनियां धुआं उगल रही हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग को यह तक नहीं पता है कि शहर में कितने उद्योग संचालित हैं।
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जलाया जाता है कचरा
एनजीटी के आदेश हैं कि कचरा न जलाया जाए, मगर शहर में समय-समय पर कचरा जलाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कमेला कॉलोनी क्षेत्र में बने कचरे के पहाड़ से अक्सर धुआं उठता देखा जा सकता है। बीते दिनों शकलापुरी मार्ग पर किसी ने कचरे में आग लगाई थी। कुछ दिन पहले कलेक्ट्रेट परिसर में कर्मचारी कचरा जलाते मिले थे। इसके अलावा जिला अस्पताल में भी कचरे को जलाया जाता है।
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शहर से बाहर नहीं हुए ईंट भट्टे
नगर निकाय में संचालित ईंट भट्ठों को नगरों से बाहर स्थापित करने के आदेश हैं। इसकी जिम्मेदारी संबंधित नगर निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है। चिह्नित करने का जिम्मा नगर निकायों का है, इसके बाद आगे की कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा। अभी तक ईंट भट्ठे चिह्नित नहीं किए जा सके हैं। नगर निगम क्षेत्र में भी दाबकी क्षेत्र, कालागढ़ क्षेत्र में ईंट भट्ठों की छाई आबादी क्षेत्र में बैठती है, इससे लोग बीमार हो रहे हैं।
खटारा वाहनों पर नहीं होती कार्रवाई
शहर में बड़ी संख्या में ऐसे खटारा वाहन चल रहे हैं, जिन्हें काला धुआं उगलते देखा जा सकता है। इनमें थ्री व्हीलर और ट्रक शामिल हैं। इन वाहनों की धुआं एक ओर जहां पर्यावरण को दूषित करता है, वहीं सीधे सांस के जरिए राहगीरों के शरीर में प्रवेश कर उन्हें बीमार बनाता है।
निगम के कदम भी नाकाफी
नगर निगम शहर को हरा भरा बनाने के लिए अभियान चला रहा है। बीते वर्ष 70 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था। इस बार भी पौधरोपण किया है। नारा दिया था कार्बन मुक्त सहारनपुर का, लेकिन अभी उसका असर नहीं है। इसके अलावा जापानी तकनीक मियावाकी वन तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन अभी यह कारगर नहीं हो सके हैं।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कई विभागों पर जिम्मेदारी है। समय-समय पर कार्रवाई की भी जाती रही हैं। यदि कोई उद्योग बिना अनुमति के चल रहा है और प्रदूषण फैला रहा है तो शिकायत मिलने पर उसके विरुद्घ कार्रवाई होगी।
- डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।