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लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ाने पर हुआ मंथन

Fri, 28 Jul 2017 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Fri, 28 Jul 2017 01:37 AM IST
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Churning on the increase of wooden handicrafts exports
सेमिनार में विचार रखते ईपीसीएच निदेशक राकेश कुमार। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
हस्तशिल्प निर्यात संवर्द्धन परिषद (ईपीसीएच) की गोष्ठी में लकड़ी के हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर मंथन किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सहारनपुर के हस्तशिल्प उत्पादों की गुणवत्ता को बरकरार रखने एवं कीमतों की प्रतिस्पर्धा में खुद को मजबूत बनाए रखने और जीएसटी के इस उद्योग पर असर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
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गोष्ठी में ईपीसीएच के अधिशासी निदेशक राकेश कुमार ने सहारनपुर में नवीनतम सुविधाओं से युक्त हस्तशिल्प पार्क की स्थापना और सीजनिंग एवं केमिकल ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता को दोगुना किए जाने की घोषणा की है। 
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बृहस्पतिवार को अंबाला रोड स्थित सभागार में आयोजित गोष्ठी में ईपीसीएच के अधिशासी निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि भारतीय निर्यातकों को चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। परिषद बाजार के अनुरूप गुणवत्ता, डिजाइन निर्माण तकनीक, प्रस्तुतिकरण, हस्तशिल्प वस्तुओं की पैकेजिंग में सुधार के लिए पथ प्रदर्शक का काम कर रही है।
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उन्होंने बताया कि लकड़ी की नक्काशी में श्रम-शक्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग को ध्यान में रखते हुए कॉमन फेसिलिटी सेंटर में मशीनों को जोइनेरी और लेजर नक्काशी के लिए विकसित किया जा रहा है। 

उन्होंने बताया कि ईपीसीएच कारीगरों के कल्याण के लिए सहारनपुर में कारीगर कल्याण ट्रस्ट की स्थापना की जाएगी, जो उनके और उनके परिवारों की स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं का ध्यान रखेगी। उन्होंने घोषणा की कि विकास प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले स्थान पर सहारनपुर में हस्तशिल्प पार्क की स्थापना की जाएगी। इसमें हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए नवीनतम मूलभूत सुविधाएं मौजूद होंगी। सहारनपुर में नए उद्यमियों के लिए इनक्यूबेशन सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। 

मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने गोष्ठी अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रशासन की ओर से निर्यातकों को सभी तरह की सहायता प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे सहारनपुर की पहचान पूरे विश्व में बढ़ती रहे। कुछ निर्यातकों ने कहा कि सहारनपुर के कंटेनर डिपो का शुल्क अत्यधिक है और इस मुद्दे को सीबीईसी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि कंटेनर डिपो में लगाए गए कस्टम शुल्क को हटाया जा सके।

छोटे निर्यात आदेशों को पूरा करने के लिए एलसीएल की सुविधा भी डिपो पर शुरू की जानी चाहिए। गोष्ठी में जीएसटी से लकड़ी उद्योग और निर्यात पर पड़ने वाले असर को लेकर भी मंथन किया गया।  यूपी एक्सपोर्ट प्रमोशन ब्यूरो के अधिकारी ने सरकार की निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं पर एक प्रस्तुति दी। श्रीराम संस्थान के वैज्ञानिकों ने पर्यावरण के अनुकूल लकड़ी के हस्तशिल्प के लिए यूपी कोटिंग प्रौद्योगिकी के बारे में अवगत कराया।


दुनिया भर में है सहारनपुर की पहचान
राकेश कुमार ने बताया कि सहारनपुर को सार्वजनिक रूप से भारत के लकड़ी नक्काशी के शहर के रूप में जाना जाता है। लकड़ी पर नक्काशी का यह उद्योग 250 वर्ष से भी अधिक पुराना है और लकड़ी पर जटिल नक्काशी का काम, पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। 3.50 लाख से अधिक लोग इससे से जुड़े हैं।  
 
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