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चीन के वुहान शहर में फंसा है चौरा का वर्णिक

Fri, 21 Feb 2020 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2020 11:33 PM IST
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Chaura's character is trapped in Wuhan city of China
चीन के शहर वुहान में फंसा वर्णिक - फोटो : SAHARANPUR
चीन के वुहान शहर में फंसा है चौरा का वर्णिक
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नानौता(सहारनपुर)। क्षेत्र के ग्राम चौरा निवासी वर्णिक चौधरी चीन के वुहान शहर में रहकर एक वैक्सीन कंपनी में रिसर्च इंजीनियर के पद पर नौकरी कर रहा है। जहां वह कोरोना वायरस के डर के कारण पिछले कुछ दिनों से अपने कमरे में ही कैदी बनकर रह गया है। देश वापसी के इंतजार में जहां वर्णिक परेशान है तो वहीं यहां उसके बूढे़ माता पिता बेटे की राह देख रहे हैं। परिजनों को भारत सरकार से उम्मीद है कि जल्द ही वह वर्णिक को भारत लाने में मदद करेगी।
थाना क्षेत्र के ग्राम चौरा निवासी किसान नरेश चौधरी का पुत्र वर्णिक चौधरी पिछले 5 वर्षों से चीन के वुहान में एक कंपनी में रिसर्च इंजीनियर के तौर पर नियुक्त है। जहां पर वैक्सीन बनाने का काम होता है। शुक्रवार को वर्णिक चौधरी से फोन पर हुई बात में उसने बताया कि चीन के बुहान शहर में कोरोना वायरस से लोग बुरी तरह से डरे हैं। उसकी जिंदगी एक कमरे में सिमटकर रह गई है। कहीं भी आने-जाने की इजाजत नहीं है। कमरों की खिड़कियां तक नहीं खोल सकते हैं। चीन सरकार ने साफ कह रखा है कि जब तक बहुत जरूरी न हो तब तक अपने घरों से न निकले। 10 से 15 दिनों में एक बार पड़ोस के ही सुपर मार्केट में सामान खरीदने के लिए मास्क आदि लगाकर जा सकते हैं। वर्णिक चौधरी ने बताया कि घर में अकेले रहकर केवल मोबाइल ही अपने परिचितों व परिजनों से मिलने का एकमात्र सहारा रह गया है। मोबाइल पर ही उसको वायरस से जुड़ी खबरें मिलने के साथ ही घर पर बात हो जाती है। बाजार में सामान भी महंगा मिलने लगा है।
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वर्णिक के परिजनों को भारत सरकार से मदद की उम्मीद
वर्णिक ने बताया कि अभी भी काफी भारतीय चीन में फंसे हैं। एंबेसी से एप्रूवल नहीं मिल पा रहा है। पहले भारत वापसी के लिए 12 फरवरी की फ्लाइट उनको बताई गई थी। बाद में 20 फरवरी की बताई गई। किसी कारण से दोनों ही फ्लाइट नहीं जा पाई। अब उन्हें एंबेसी से जल्द ही एक- दो दिन में दूसरी फ्लाइट की मिलने की संभावना है। वर्णिक ने भारत सरकार से जल्द भारत बुलाने की मांग की है।
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माता-पिता को हर पल बेटे का इंतजार
वर्णिक के पिता नरेश चौधरी साधारण किसान हैं। जब उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि बेटे से प्रतिदिन रात को मोबाइल पर बात तो हो जाती है, लेकिन वहां फैली बीमारी के बाद उसकी मां व मेरा दिल बार-बार उसे देखने को कर रहा है। वर्णिक भी रोज कह देता है कि दो-चार दिन में आ पहुंच जाऊंगा, लेकिन ऐसा कहते हुए दो महीने से भी अधिक हो गए हैं। इसके चलते हर पल वर्णिक के इंतजार में आंखे घर के दरवाजे की ओर लगी रहती है।

वर्णिक की वापसी का इंतजार करते माता-पिता तथा भाई

वर्णिक की वापसी का इंतजार करते माता-पिता तथा भाई- फोटो : SAHARANPUR

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