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हजीरा सराय मामले में सीबीआई करेगी सुनवाई
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सहारनपुर। महानगर के हजीरा सराय स्थित करोड़ों रुपये की संपत्ति के मामले में सीबीआई सुनवाई करेगी। सीबीआई ने मामले की शिकायत करने वाले दाउद सराय निवासी अधिवक्ता मोहम्मद ताबिश को नोटिस भेजकर 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में उपस्थित होने को कहा है।
हजीरा सराय स्थित भूमि पर लंबे समय से उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड का कब्जा रहा है। मोहम्मद ताबिश का आरोप था कि उक्त भूमि नगर निगम की है, जिस पर वक्फ बोर्ड ने अवैध कब्जा किया हुआ है और वह गलत तरीके से भूमि का किराया वसूल रहा है। उन्होंने वर्ष 2020 में लोकायुक्त के साथ ही सीबीआई में भी शिकायत की थी। ताबिश ने बताया कि अब सीबीआई ने उनको नोटिस जारी किया है, जिसमें 16 मार्च को सुनवाई की तिथि दी गई है। सीबीआई की ओर से मामले की सुनवाई सूचना आयुक्त सरोज पुनहानी करेंगी। सुनवाई ऑनलाइन होगी, जिसमें एनआईसी कलक्ट्रेट से वह अपनी बात रखेंगे। जिला प्रशासन को भी लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है।
प्रशासन करा चुका है जांच
जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने एसडीएम सदर, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी की समिति बनाकर जांच कराई थी। समिति ने रिपोर्ट में लिखा था कि उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा उक्त संपत्ति को वर्ष 1995 के बाद वक्फ संख्या 407 के रूप में अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है, जबकि नगर निगम सहारनपुर के अभिलेखों के अनुसार उक्त भूमि के मूल मालिकान द्वारा इस भूमि का बैनामा पूर्व में ही म्यूनिसिपल बोर्ड सहारनपुर के पक्ष में हस्तांतरित की जा चुकी थी। वक्फ अधिनियम के अनुसार किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की संपत्ति पर वक्फ कायम नहीं किया जा सकता। इसके बाद जिलाधिकारी ने 18 अक्तूबर 2021 को नगरायुक्त को पत्र लिखते हुए एक सप्ताह के भीतर भूमि को कब्जामुक्त कराते हुए उनके कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन आ तक कब्जा नहीं लिया गया है।
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जिस संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का कब्जा है वह वक्फ बोर्ड की ही है, जबकि नगर निगम की भूमि इससे अलग है। बीते वर्ष जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में समिति ने वक्फ बोर्ड का पक्ष नहीं लिया। इस पर बोर्ड ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति जताई है, जिसके बाद प्रशासन दोबारा जांच करा रहा है। संपत्ति वक्फ बोर्ड की ही है, जिसके तमाम प्रमाण बोर्ड के पास हैं।
शाहिद मंसूरी, सचिव, वक्फ बोर्ड।
हजीरा सराय में एक संपत्ति की जांच तीन सदस्यों की समिति द्वारा कराई गई थी। वक्फ बोर्ड का कहना है कि नगर निगम की जमीन अलग है और जिस जमीन को निगम की बताया जा रहा है वह वक्फ बोर्ड की ही है। ऐसे में निगम की भूमि की लोकेशन की जांच करा रहे हैं।
अखिलेश सिंह, जिला अधिकारी।
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हजीरा सराय स्थित भूमि पर लंबे समय से उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड का कब्जा रहा है। मोहम्मद ताबिश का आरोप था कि उक्त भूमि नगर निगम की है, जिस पर वक्फ बोर्ड ने अवैध कब्जा किया हुआ है और वह गलत तरीके से भूमि का किराया वसूल रहा है। उन्होंने वर्ष 2020 में लोकायुक्त के साथ ही सीबीआई में भी शिकायत की थी। ताबिश ने बताया कि अब सीबीआई ने उनको नोटिस जारी किया है, जिसमें 16 मार्च को सुनवाई की तिथि दी गई है। सीबीआई की ओर से मामले की सुनवाई सूचना आयुक्त सरोज पुनहानी करेंगी। सुनवाई ऑनलाइन होगी, जिसमें एनआईसी कलक्ट्रेट से वह अपनी बात रखेंगे। जिला प्रशासन को भी लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है।
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प्रशासन करा चुका है जांच
जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने एसडीएम सदर, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी की समिति बनाकर जांच कराई थी। समिति ने रिपोर्ट में लिखा था कि उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा उक्त संपत्ति को वर्ष 1995 के बाद वक्फ संख्या 407 के रूप में अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है, जबकि नगर निगम सहारनपुर के अभिलेखों के अनुसार उक्त भूमि के मूल मालिकान द्वारा इस भूमि का बैनामा पूर्व में ही म्यूनिसिपल बोर्ड सहारनपुर के पक्ष में हस्तांतरित की जा चुकी थी। वक्फ अधिनियम के अनुसार किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की संपत्ति पर वक्फ कायम नहीं किया जा सकता। इसके बाद जिलाधिकारी ने 18 अक्तूबर 2021 को नगरायुक्त को पत्र लिखते हुए एक सप्ताह के भीतर भूमि को कब्जामुक्त कराते हुए उनके कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन आ तक कब्जा नहीं लिया गया है।
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जिस संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का कब्जा है वह वक्फ बोर्ड की ही है, जबकि नगर निगम की भूमि इससे अलग है। बीते वर्ष जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में समिति ने वक्फ बोर्ड का पक्ष नहीं लिया। इस पर बोर्ड ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति जताई है, जिसके बाद प्रशासन दोबारा जांच करा रहा है। संपत्ति वक्फ बोर्ड की ही है, जिसके तमाम प्रमाण बोर्ड के पास हैं।
शाहिद मंसूरी, सचिव, वक्फ बोर्ड।
हजीरा सराय में एक संपत्ति की जांच तीन सदस्यों की समिति द्वारा कराई गई थी। वक्फ बोर्ड का कहना है कि नगर निगम की जमीन अलग है और जिस जमीन को निगम की बताया जा रहा है वह वक्फ बोर्ड की ही है। ऐसे में निगम की भूमि की लोकेशन की जांच करा रहे हैं।
अखिलेश सिंह, जिला अधिकारी।