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Saharanpur News: नामांतरण पत्रावली गायब होने के मामले में लिपिक पर केस दर्ज
Thu, 01 May 2025 12:01 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 01 May 2025 12:01 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम के गृहकर एवं जलकर अनुभाग से पत्रावली गायब होने के मामले में आरोपी लिपिक के खिलाफ मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने कुतुबशेर थाने में केस दर्ज कराया है। पत्रावली गायब होने का मामला अमर उजाला ने उठाया था, जिसके बाद शासन ने संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त से जवाब मांगा था।
दरअसल, गृहकर एवं जलकर अनुभाग की एक महिला लिपिक ने भवनों के नामांतरण संबंधी पत्रावली पर अनुभाग के उच्चाधिकारियों के फर्जी व कूटरचित हस्ताक्षर कर फाइल आगे बढ़ा दी थी। जैसे ही फाइल अनुभाग के प्रभारी एवं अपर नगर आयुक्त राजेश यादव के पास पहुंची, तब उन्हें मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संगीता गुप्ता और कर निर्धारण अधिकारी के हस्ताक्षर पर शक हुआ। इस पर उन्होंने फाइल लौटा दी। दोनों अधिकारियों ने जवाब दिया कि यह हस्ताक्षर उनके नहीं है। इसके बाद लिपिक को निलंबित कर दिया गया था।
नगर आयुक्त ने मामले में जांच बिठा दी थी। जांच में पत्रावली प्रस्तुत की जानी थी, लेकिन प्रस्तुत नहीं की गई, जिसकी वजह से जांच कई महीने तक लटकी रही। मामले में पूर्व नगर आयुक्त संजय चौहान ने भी पत्रावली उपलब्ध कराने के निर्देश अनुभाग के अधिकारियों को दिए थे। इस पर मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संगीता गुप्ता को भी पत्र लिखा गया था। उसके बाद भी मामले में लापरवाही मिलने पर नगर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य कर निर्धारण अधिकारी की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए थे।
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अमर उजाला ने सात मार्च को किया था प्रकाशित
अमर उजाला ने मामले को सात मार्च 2025 के संस्करण में ''लापरवाही...जिस पत्रावली पर हुआ निलंबन, वही गायब हो गई'' शीर्षक से प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रमुख सचिव ने नगर निगम से जवाब तलब किया था। शासन के संज्ञान लेने के बाद अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ था। अब लिपिक के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
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शासन को लिखी गई है चिट्ठी
पत्रावली गायब करने की आरोपी लिपिक को बचाने के आरोप में पूर्व नगर आयुक्त संजय चौहान द्वारा मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के खिलाफ शासन को पत्र लिखा गया था। उन्होंने शासन से अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की हुई है। हालांकि अभी तक शासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
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दरअसल, गृहकर एवं जलकर अनुभाग की एक महिला लिपिक ने भवनों के नामांतरण संबंधी पत्रावली पर अनुभाग के उच्चाधिकारियों के फर्जी व कूटरचित हस्ताक्षर कर फाइल आगे बढ़ा दी थी। जैसे ही फाइल अनुभाग के प्रभारी एवं अपर नगर आयुक्त राजेश यादव के पास पहुंची, तब उन्हें मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संगीता गुप्ता और कर निर्धारण अधिकारी के हस्ताक्षर पर शक हुआ। इस पर उन्होंने फाइल लौटा दी। दोनों अधिकारियों ने जवाब दिया कि यह हस्ताक्षर उनके नहीं है। इसके बाद लिपिक को निलंबित कर दिया गया था।
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नगर आयुक्त ने मामले में जांच बिठा दी थी। जांच में पत्रावली प्रस्तुत की जानी थी, लेकिन प्रस्तुत नहीं की गई, जिसकी वजह से जांच कई महीने तक लटकी रही। मामले में पूर्व नगर आयुक्त संजय चौहान ने भी पत्रावली उपलब्ध कराने के निर्देश अनुभाग के अधिकारियों को दिए थे। इस पर मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संगीता गुप्ता को भी पत्र लिखा गया था। उसके बाद भी मामले में लापरवाही मिलने पर नगर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य कर निर्धारण अधिकारी की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए थे।
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अमर उजाला ने सात मार्च को किया था प्रकाशित
अमर उजाला ने मामले को सात मार्च 2025 के संस्करण में ''लापरवाही...जिस पत्रावली पर हुआ निलंबन, वही गायब हो गई'' शीर्षक से प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रमुख सचिव ने नगर निगम से जवाब तलब किया था। शासन के संज्ञान लेने के बाद अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ था। अब लिपिक के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
शासन को लिखी गई है चिट्ठी
पत्रावली गायब करने की आरोपी लिपिक को बचाने के आरोप में पूर्व नगर आयुक्त संजय चौहान द्वारा मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के खिलाफ शासन को पत्र लिखा गया था। उन्होंने शासन से अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की हुई है। हालांकि अभी तक शासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।