कप्तान साहब! देख लो अपनी चौकियों का हाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला की टीम पूर्वाह्न 11:45 बजे खलासी लाइन चौकी पर पहुंची, जहां एक भी पुलिसकर्मी नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि अक्सर 12 बजते ही पुलिसकर्मी चौकी से निकल जाते हैं। बताया कि क्षेत्र में कई स्थानों पर दिनभर जुआ खिलता है, जिसके लिए पुलिस की लचर व्यवस्था जिम्मेदार है। दोपहर 1:10 बजे मल्हीपुर रोड स्थित आवास विकासी चौकी पर ताला लटका मिला। इससे चौकी से करीब डेढ़ किलोमीटर आगे देहात कोतवाली की रामनगर चौकी है।
दोपहर 1:20 बजे चौकी के बाहर कई बाइक खड़ी हुई थीं। उम्मीद थी कि पुलिसकर्मी मुस्तैद होंगे, मगर यहां भी दरवाजे बंद मिले। यह वही क्षेत्र है, जहां करीब 20 दिन पहले बाइक सवार बदमाश दिनदहाड़े एक डवलपर्स से स्कूटी और चार लाख रुपये लूटकर फरार हो गए थे, जिसका पुलिस अभी तक खुलासा नहीं ञकर सकी है। हैरत की बात है कि उसके बाद भी पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आया है। शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्र कोर्ट रोड पर पार्श्वनाथ प्लाजा के बाहर स्थित कोतवाली सदर बाजर की चंद्रनगर पुलिस चौकी दोपहर 1:28 मिनट पर खाली मिली। जबकि इस क्षेत्र में चेन स्नेचिंग और लूट की घटनाएं लगातार होती आ रही हैं।
कोतवाली मंडी समिति की शाहबेलोल पुलिस चौकी का मेन गेट दोपहर 1:40 मिनट पर बंद मिला। अंदर झांकने पर भी कोई नजर नहीं आया। पुराना चिलकाना बस स्टैंड के पास स्थित कटहेरा पुलिस चौकी पर दोपहर 1:50 बजे सन्नाटा पसरा हुआ था। धोबीघाट स्थित पिकेट पर दोपहर 1:58 मिनट पर कोई पुलिसकर्मी नहीं मिला। दोपहर 2:05 मिनट पर पुल जोगियान स्थित पिकेट भी खाली थी। यानी दोपहर के समय एकतरफा तमाम चौकियों पर ताले लटका होना इत्तेफाक नहीं हो सकता। इससे साबित होता है कि जनपद की पुलिस इसी ढर्रे पर चल रही है। शायद पुलिस की इस लचर व्यवस्था की वजह से ही बदमाशों के हौसले बुलंद हैं, जो किसी भी समय घटना को अंजाम देकर आसानी से निकल जाते हैं।
अक्सर दिन दहाड़े होती हैं वारदातें
पुलिस की लापरवाही का यह आलम तब है जब इन इलाकों में कई बार दिनदहाड़े वारदातें हो चुकी हैं। खाली पुलिस चौकियों के चलते इन इलाकों में जुआ, सट्टा जैसे अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। शहर का मंडी थाना सबसे संवेदनशील है, मगर यहां की एक भी पुलिस चौकी पर कोई पुलिसकर्मी नहीं मिला। ऐसा ही हाल बाकी पुलिस चौकियों पर भी रहा।
चौकी-थाने एक्टिव हो तो लोगों को राहत
पुलिस चौकियां बना तो दी गई हैं, मगर उनके एक्टिव नहीं होने से जनता में असुरक्षा की भावना बनी रहती है। व्यापारी नेता मुकुंद मनोहर गोयल का कहना है कि कई बार लोग पुलिस चौकियों पर छोटी-मोटी शिकायतों के लिए जाते हैं, वहां किसी के नहीं मिलने से उन्हें थाने तक जाना पड़ता है। अगर, पुलिस चौकियां और थाने एक्टिव हो जाए तो आम जनता को अफसरों के दफ्तर तक जाना ही नहीं पड़ेगा।
जनता को अपराधमुक्त माहौल देने के लिए पुलिस का सतर्क होना जरूरी है। पुलिस व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। खाली पुलिस चौकियों का मामला बेहद गंभीर है। इस मामले की जांच कराइ जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
- प्रदीप कुमार यादव, एसएसपी।