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वोटरों के मिजाज से उलझा सियासी गणित
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सहारनपुर। मतदान के बाद एक ओर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रत्याशी और कार्यकर्ता जहां थकान मिटा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण बैठकों में हार-जीत के गणित में उलझे हैं। समर्थक अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में तर्क दे रहे हैं। साथ ही मतदान के आंकड़ों पर भी मंथन कर रहे हैं।
छुटमलपुर क्षेत्र के गांव बेहड़ा खुर्द में पूर्व प्रधान सतपाल सिंह के घेर में ग्रामीण सुबह से ही चुनावी चर्चा में जुटे हैं। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। पूर्व प्रधान सतपाल सिंह का कहना है कि गांव का चुनाव इस बार बेहद उलझा हुआ नजर आ रहा है। आठ प्रत्याशियों में से चार के बीच मुकाबला माना जा रहा है। बाजी कौन मारेगा यह परिणाम वाले दिन ही पता चलेगा। धर्मवीर सिंह का कहना है कि गांव का राजपूत समाज भी किसी एक के पक्ष में लामबंद नहीं हुआ। जसवीर सिंह और प्रदीप सिंह का कहना है कोई भी प्रत्याशी मुस्लिमों का थोक वोट नहीं ले सका है।
विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव चकखिजरपुर चको में बिशंबर सिंह के घेर में ग्रामीण चुनावी चर्चा में मशगूल दिखे। इस ग्राम पंचायत 1945 मतदाता हैं। इसमें अलीपुरा, दामनकोह, मीरपुर ठसका कदीम, मीरपुर ठसका मुस्तकम जदीद एवं चको पांच मजरे आते हैं। ग्रामीण बुद्ध सिंह कहते हैं कि इस बार प्रधान पद के कई प्रत्याशी मैदान में होने से चुनाव पेचीदा है। अपना आंकलन बताते हुए ग्रामीण बिशंबर सिंह कहते हैं कि प्रधानी में मुख्य मुकाबले में तीन प्रत्याशी रहे। धूमसिंह, यशविंदर सिंह एवं बिरमपाल का कहना है कि प्रत्याशियों का भाग्य मत पेटियों में बंद हो गया है। दो मई को ही इसका खुलासा होगा।
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विकास खंड गंगोह के गांव लखनौती में ग्राम प्रधान पद सामान्य श्रेणी में है। यहां पर छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। गांव के गली-मोहल्लों और बैठकों में दिनभर चुनावी चर्चा होती रही। तैयब खान एवं अमित कुमार का कहना है कि इस बार मतदाता किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में लामबंद होकर नहीं पड़ा है। हर जाति एवं परिवार में बिखराव देखने को मिला है। ग्रामीण अमिताभ गर्ग और असगर खान आदि का कहना है कि मुख्य मुकाबले में चार प्रत्याशी दिखे हैं।
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छुटमलपुर क्षेत्र के गांव बेहड़ा खुर्द में पूर्व प्रधान सतपाल सिंह के घेर में ग्रामीण सुबह से ही चुनावी चर्चा में जुटे हैं। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। पूर्व प्रधान सतपाल सिंह का कहना है कि गांव का चुनाव इस बार बेहद उलझा हुआ नजर आ रहा है। आठ प्रत्याशियों में से चार के बीच मुकाबला माना जा रहा है। बाजी कौन मारेगा यह परिणाम वाले दिन ही पता चलेगा। धर्मवीर सिंह का कहना है कि गांव का राजपूत समाज भी किसी एक के पक्ष में लामबंद नहीं हुआ। जसवीर सिंह और प्रदीप सिंह का कहना है कोई भी प्रत्याशी मुस्लिमों का थोक वोट नहीं ले सका है।
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विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव चकखिजरपुर चको में बिशंबर सिंह के घेर में ग्रामीण चुनावी चर्चा में मशगूल दिखे। इस ग्राम पंचायत 1945 मतदाता हैं। इसमें अलीपुरा, दामनकोह, मीरपुर ठसका कदीम, मीरपुर ठसका मुस्तकम जदीद एवं चको पांच मजरे आते हैं। ग्रामीण बुद्ध सिंह कहते हैं कि इस बार प्रधान पद के कई प्रत्याशी मैदान में होने से चुनाव पेचीदा है। अपना आंकलन बताते हुए ग्रामीण बिशंबर सिंह कहते हैं कि प्रधानी में मुख्य मुकाबले में तीन प्रत्याशी रहे। धूमसिंह, यशविंदर सिंह एवं बिरमपाल का कहना है कि प्रत्याशियों का भाग्य मत पेटियों में बंद हो गया है। दो मई को ही इसका खुलासा होगा।
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विकास खंड गंगोह के गांव लखनौती में ग्राम प्रधान पद सामान्य श्रेणी में है। यहां पर छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। गांव के गली-मोहल्लों और बैठकों में दिनभर चुनावी चर्चा होती रही। तैयब खान एवं अमित कुमार का कहना है कि इस बार मतदाता किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में लामबंद होकर नहीं पड़ा है। हर जाति एवं परिवार में बिखराव देखने को मिला है। ग्रामीण अमिताभ गर्ग और असगर खान आदि का कहना है कि मुख्य मुकाबले में चार प्रत्याशी दिखे हैं।