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आज सहारनपुर पहुंचेगी बसपा सुप्रीमो मायावती

ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 23 May 2017 12:44 AM IST
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मायावती
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सहारनपुर में सड़क दूधली बवाल के बाद शब्बीरपुर की जातीय हिंसा के बाद जैसे हालात पैदा हुए हैं उसमें दलितों की दुखती रग पर हाथ धरने को बसपा सुप्रीमो मायावती मंगलवार को सहारनपुर आ रही हैं।
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शब्बीरपुर में दलितों पर हुए उत्पीड़न का मुद्दा उछाल कर बसपा अपने बेस वोट को खिसकने नहीं देना चाहती है। अब तक सोशल इंजीनियरिंग में दलित मतों के साथ जातीय समीकरण फिट करने में जुटी बसपा सहारनपुर के जरिए दलित-मुस्लिम गठजोड़ की संभावनाओं को भी टटोलेगी।


कुल मिलाकर शब्बीरपुर दौरे के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अपने मजबूत गढ़ से विरोधियों का किला भेदने की तैयारी भी करेंगी। बसपा के उत्थान का गवाह रहे सहारनपुर में विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है।

ऐसे में अपने मजबूत किले के दरक रही सियासी जमीन को बसपा सुप्रीमो मायावती मजबूत करना चाहेंगी। शब्बीरपुर कांड की गूंज जब पूरे देश में सुनाई दे रही हैं और दूसरे दल दलितों में सेंधमारी की कोई कोशिश नहीं छोड़ रहे हैं।

ऐसे में बसपा पीड़ित दलित परिवारों की दुखती रग छेड़कर अपने किले की घेराबंदी करना चाहती हैं। सहारनपुर से बसपा और उसकी प्रमुख मायावती का पुराना नाता रहा है। पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने भी चुनावी समर में यहां से ताल ठोकी थी। हालांकि भाजपा के राममंदिर लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 

मगर, बसपा सुप्रीमो मायावती दो बार सहारनपुर जिले से विधायक बनी और दोनों बार वे सूबे की मुख्यमंत्री भी बनी। मगर, इस बार विधानसभा चुनाव में हाथी के महावत नीचे उतर गए और सात में एक भी सीट पर उन्हें जीत नहीं पाई।

ऐसे में माना जा रहा है कि जातीय समीकरण बिगड़ने के साथ ही बेस वोट में भी भाजपा ने सेंधमारी कर ली। शब्बीरपुर बवाल के बाद नौ मई को हुई हिंसा में भीम आर्मी के साथ ही बसपा के पूर्व विधायक रविन्द्र मोल्हू को भी आरोपी बना दिया गया।

उधर, दलितों के बीच सक्रिय हुई भीम आर्मी न सिर्फ अपना आधार मजबूत करने में जुटी है बल्कि बसपा के खिलाफ भी माहौल बनाना चाहती है। प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद भी भीम आर्मी के समर्थन की बात कर कांग्रेस के दलित-मुस्लिम वोट को एक मंच पर लाने की कोशिश में हैं। 

ऐसे में बसपा अपने मजबूत गढ़ में किसी सेंधमारी को बर्दाश्त नहीं करेगी। यही कारण है कि भाजपा की सरकार के खिलाफ ना केवल बसपा के लिए यह बड़ा हथियार साबित हो सकता है बल्कि दलितों की रहनुमाई कर अपने बेस वोट को एकजुट कर भाजपा के खिलाफ लड़ाई में मुस्लिम मतों को जोड़ने की कवायद हो सकती है।

सहारनपुर से भावनात्मक रुप से जुड़ी पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का शब्बीरपुर गांव से भी पुराना नाता है। वर्ष 1984 में माया ने कई बार संगठन को खड़ा करने के अभियान में शब्बीरपुर में प्रवास भी किया था।

इसके अलावा बड़गांव थाने के पीछे 1985 में हुई मायावती की सभा में एक व्यक्ति ने पथराव भी कर दिया था। ऐसे में पुरानी यादों के जरिए मायावती ना सिर्फ दलितों से खुद को जोड़ना चाहेंगी बल्कि उनकी दुखती रग पर भी अपना हाथ रखना चाहेंगी।

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