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चीनी सामान का हो बहिष्कार, तो चीन को लगेगा 800 करोड़ का फटका
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सहारनपुर में बिकता चाईनीज सामान
- फोटो : SAHARANPUR
चीनी सामान का हो बहिष्कार, तो चीन को लगेगा 800 करोड़ का फटका
सहारनपुर। भारतीय जवानों की शहादत पर सहारनपुर के व्यापारियों में रोष है। उन्होंने चीन के सामान का बहिष्कार करने का प्रण ले लिया है। अगर पूरी तरह जनता ने भी चीन के सामान से दूरी बना ली, तो चीन को जिले से करीब 800 करोड़ का सालाना फटका लगना तय है। इसके लिए व्यापारियों ने चीनी उत्पादों पर निर्भरता खत्म करने के लिए सरकार से भी सहयोग मांगा है। व्यापारियों ने साफ कहा कि कारोबार से पहले देश है।
सालाना 800 करोड़ का कारोबार
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष शीतल टंडन का दावा है कि जिले में सामान्य दिनों में इलेक्ट्रानिक्स सामान, फर्नीचर, घड़ी, चप्पल जूते, खिलौने, मोबाइल, आटोमोबाइल, फार्मा से लेकर अन्य क्षेत्र से जुड़ा करीब 800 करोड़ का कारोबार चीनी सामान पर निर्भर है। इसलिए यदि चीन से सभी तरह के कच्चे और निर्मित सामान का आयात बंद होता है तो निश्चित रूप से 60 से 80 फीसदी तक कारोबार प्रभावित होगा। मगर यह भी तय है कि काफी समय बाद ही सही स्वदेशी या दूसरे देशों के विकल्पों के रास्ते भी खुलेंगे। उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि जिस सीमा तक चीनी सामान का बहिष्कार संभव हो, वह तो किया ही जाए।
चीन को टक्कर देने के लिए विकल्प तो खोजने ही होंगे
सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के महानगर अध्यक्ष विवेक मनोचा ने कहा कि चीन के सामान के बहिष्कार से पहले इसका विकल्प भी होना चाहिए, क्योंकि देश का हर नागरिक स्वदेशी सामान को तुलनात्मक रूप से मंहगा खरीदकर भी खुश होता है। हर क्षेत्र में चीनी वस्तुओं का दखल है। वहां का सामान सस्ता होने के कारण अधिक बिकता है। सरकार को कस्टम पर सख्ती करनी चाहिए और स्वदेशी सामान के लिए सिस्टम को तैयार करना चाहिए। चीन को टक्कर देने के लिए नए विकल्प खोजने ही होंगे। स्वदेशी को बढ़ावा दोेना होगा।
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ग्राहकों को अच्छा विकल्प देने पर ही बहिष्कार सफल
खिलौना व्यापारी शिव गुंबर ने कहा कि खिलौना कारोबार में चीन के सामान का बोलबाला है। रिमोट की गाड़ियां, कारें, जेसीबी, वीडियो गेम्स, फुटबाल, रैकेट, साइकिल, बार्बी डॉल्स आदि सामान भरपूर मात्रा में बिकता है। इनकी बिक्री मेलों आदि में भी होती है। कोरोना संकट के चलते मेले बंद हो गए हैं। ऐसे आयोजनों के समय ये सामान ज्यादा बिकते हैं। इसलिए फिलहाल इसमें कमी आई है। जिले में आमतौर पर इसका कारोबार करीब 15 करोड़ रुपये प्रति माह का है। ग्राहकों को इसका बेहतर विकल्प देना होगा, तभी बहिष्कार सफल होगा।
जब तक स्वदेशी न हो, तब तक दूसरे देशों से संपर्क बढ़ाएं
मोबाइल संबंधित सामान के कारोबारी हरप्रीत सिंह ने कहा कि मोबाइल संबंधित सामान, स्पीकर, हैंडफोन, चिप आदि में चीन के माल की काफी खपत है। खूबसूरत और सस्ता होने के कारण लोग इन आइटम को पसंद करते हैं। जनपद में 200 से अधिक दुकानों पर मोबाइल के सामान की बिक्री होती है। इसका मासिक कारोबार पांच से सात करोड़ रुपये के आसपास होगा। हालांकि पिछले कुछ समय से कई देशी कंपनियों ने इस क्षेत्र में खासी दखल दी है, लेकिन एकदम बहिष्कार के स्थान पर धीरे-धीरे चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम करनी होगी। स्वदेशी उत्पाद मिलने तक अन्य देशों के विकल्पों पर सरकार ध्यान दे।
बहिष्कार से पहले आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा
व्यापारी अभिषेक सोढ़ी ने कहा कि उनका चीन के पीवीसी पैनल का व्यवसाय है। इसमें वॉल डेेकोरेटिव पैनल काफी लोकप्रिय है। चीन की वस्तुओं का बहिष्कार करने से पहले हमें आत्मनिर्भर होना होगा। इसके बाद हमें चीन से किसी भी वस्तु के आयात की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए हमें अपना सिस्टम सुधारना होगा। जिले में चीन के पैनल का कारोबार 50 से 70 लाख रुपये प्रति महीने के आसपास होगा।
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सहारनपुर। भारतीय जवानों की शहादत पर सहारनपुर के व्यापारियों में रोष है। उन्होंने चीन के सामान का बहिष्कार करने का प्रण ले लिया है। अगर पूरी तरह जनता ने भी चीन के सामान से दूरी बना ली, तो चीन को जिले से करीब 800 करोड़ का सालाना फटका लगना तय है। इसके लिए व्यापारियों ने चीनी उत्पादों पर निर्भरता खत्म करने के लिए सरकार से भी सहयोग मांगा है। व्यापारियों ने साफ कहा कि कारोबार से पहले देश है।
सालाना 800 करोड़ का कारोबार
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष शीतल टंडन का दावा है कि जिले में सामान्य दिनों में इलेक्ट्रानिक्स सामान, फर्नीचर, घड़ी, चप्पल जूते, खिलौने, मोबाइल, आटोमोबाइल, फार्मा से लेकर अन्य क्षेत्र से जुड़ा करीब 800 करोड़ का कारोबार चीनी सामान पर निर्भर है। इसलिए यदि चीन से सभी तरह के कच्चे और निर्मित सामान का आयात बंद होता है तो निश्चित रूप से 60 से 80 फीसदी तक कारोबार प्रभावित होगा। मगर यह भी तय है कि काफी समय बाद ही सही स्वदेशी या दूसरे देशों के विकल्पों के रास्ते भी खुलेंगे। उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि जिस सीमा तक चीनी सामान का बहिष्कार संभव हो, वह तो किया ही जाए।
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चीन को टक्कर देने के लिए विकल्प तो खोजने ही होंगे
सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के महानगर अध्यक्ष विवेक मनोचा ने कहा कि चीन के सामान के बहिष्कार से पहले इसका विकल्प भी होना चाहिए, क्योंकि देश का हर नागरिक स्वदेशी सामान को तुलनात्मक रूप से मंहगा खरीदकर भी खुश होता है। हर क्षेत्र में चीनी वस्तुओं का दखल है। वहां का सामान सस्ता होने के कारण अधिक बिकता है। सरकार को कस्टम पर सख्ती करनी चाहिए और स्वदेशी सामान के लिए सिस्टम को तैयार करना चाहिए। चीन को टक्कर देने के लिए नए विकल्प खोजने ही होंगे। स्वदेशी को बढ़ावा दोेना होगा।
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ग्राहकों को अच्छा विकल्प देने पर ही बहिष्कार सफल
खिलौना व्यापारी शिव गुंबर ने कहा कि खिलौना कारोबार में चीन के सामान का बोलबाला है। रिमोट की गाड़ियां, कारें, जेसीबी, वीडियो गेम्स, फुटबाल, रैकेट, साइकिल, बार्बी डॉल्स आदि सामान भरपूर मात्रा में बिकता है। इनकी बिक्री मेलों आदि में भी होती है। कोरोना संकट के चलते मेले बंद हो गए हैं। ऐसे आयोजनों के समय ये सामान ज्यादा बिकते हैं। इसलिए फिलहाल इसमें कमी आई है। जिले में आमतौर पर इसका कारोबार करीब 15 करोड़ रुपये प्रति माह का है। ग्राहकों को इसका बेहतर विकल्प देना होगा, तभी बहिष्कार सफल होगा।
जब तक स्वदेशी न हो, तब तक दूसरे देशों से संपर्क बढ़ाएं
मोबाइल संबंधित सामान के कारोबारी हरप्रीत सिंह ने कहा कि मोबाइल संबंधित सामान, स्पीकर, हैंडफोन, चिप आदि में चीन के माल की काफी खपत है। खूबसूरत और सस्ता होने के कारण लोग इन आइटम को पसंद करते हैं। जनपद में 200 से अधिक दुकानों पर मोबाइल के सामान की बिक्री होती है। इसका मासिक कारोबार पांच से सात करोड़ रुपये के आसपास होगा। हालांकि पिछले कुछ समय से कई देशी कंपनियों ने इस क्षेत्र में खासी दखल दी है, लेकिन एकदम बहिष्कार के स्थान पर धीरे-धीरे चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम करनी होगी। स्वदेशी उत्पाद मिलने तक अन्य देशों के विकल्पों पर सरकार ध्यान दे।
बहिष्कार से पहले आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा
व्यापारी अभिषेक सोढ़ी ने कहा कि उनका चीन के पीवीसी पैनल का व्यवसाय है। इसमें वॉल डेेकोरेटिव पैनल काफी लोकप्रिय है। चीन की वस्तुओं का बहिष्कार करने से पहले हमें आत्मनिर्भर होना होगा। इसके बाद हमें चीन से किसी भी वस्तु के आयात की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए हमें अपना सिस्टम सुधारना होगा। जिले में चीन के पैनल का कारोबार 50 से 70 लाख रुपये प्रति महीने के आसपास होगा।

विवेक मनोचा- फोटो : SAHARANPUR

हरप्रीत सिंह- फोटो : SAHARANPUR

शिव गुंबर- फोटो : SAHARANPUR

शीतल टंडन- फोटो : SAHARANPUR