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Saharanpur News: फर्जी दस्तावेज से बनवाया जन्म प्रमाणपत्र, निगम ने बिठाई जांच
Tue, 06 May 2025 12:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 06 May 2025 12:34 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जन्म प्रमाणपत्र बनवाने का मामला सामने आया है। यह शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने जांच बिठा दी है। सफाई निरीक्षक को जांच अधिकारी बनाया गया है।
जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्रों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। नया मामला एक किशोर का ग्राम पंचायत के बाद नगर निगम से तीसरा जन्म प्रमाणपत्र बनवाने का है। शिकायतकर्ता बसंत विहार निवासी ब्रह्मपाल सिंह का आरोप है कि प्रमाणपत्र बनवाने वाले व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेज लगाकर जन्म प्रमाणपत्र बनवाया है। ब्रह्मपाल सिंह ने अधिकारियों को बताया है कि किशोर का पहला प्रमाणपत्र, जो ग्राम पंचायत द्वारा बनाया गया था। उसमें जन्म तिथि 12 दिसंबर 2007 दर्शाया गया है। इसके बाद दूसरी ग्राम पंचायत से जन्म प्रमाणपत्र बनवाया गया, जिसमें जन्म 22 अक्तूबर 2007 का दर्शाया गया है। अब नगर निगम से बनवाए गए जन्म प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 13 दिसंबर 2007 लिखवाई गई है।
ब्रह्मपाल सिंह का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का एक ही जन्म प्रमाणपत्र हो सकता है, लेकिन यहां तीन बनवा लिए गए। इसके साथ ही तीनों जन्म प्रमाणपत्र अलग-अलग तिथि के हैं। उधर, शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच बिठा दी है। मुख्य सफाई निरीक्षक इंद्रपाल सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। वह जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लगाए गए दस्तावेज जैसे अस्पताल से जारी प्रमाणपत्र आदि की जांच कर रहे हैं।
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कई स्तर से होती है जांच
जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कुछ नियम हैं। यदि जन्म होने के बाद 21 दिन के भीतर जन्म प्रमाणपत्र बनवाया जाए तो लगभग एक सप्ताह में प्रमाणपत्र तैयार हो जाता है, लेकिन यदि एक वर्ष या उससे अधिक पुराना जन्म है तो निगम उसका सत्यापन कराता है। फाइल एसडीएम स्तर तक जाती है। निश्चित रूप से इस मामले में भी जांच हुई होगी।
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एक महिला द्वारा गलत दस्तावेज लगाकर अपने बेटे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की शिकायत आई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि महिला ने अपने बेटे का तीसरा प्रमाणपत्र बनवाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई जा रही है।
- राजेश यादव, अपर नगरायुक्त
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जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्रों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। नया मामला एक किशोर का ग्राम पंचायत के बाद नगर निगम से तीसरा जन्म प्रमाणपत्र बनवाने का है। शिकायतकर्ता बसंत विहार निवासी ब्रह्मपाल सिंह का आरोप है कि प्रमाणपत्र बनवाने वाले व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेज लगाकर जन्म प्रमाणपत्र बनवाया है। ब्रह्मपाल सिंह ने अधिकारियों को बताया है कि किशोर का पहला प्रमाणपत्र, जो ग्राम पंचायत द्वारा बनाया गया था। उसमें जन्म तिथि 12 दिसंबर 2007 दर्शाया गया है। इसके बाद दूसरी ग्राम पंचायत से जन्म प्रमाणपत्र बनवाया गया, जिसमें जन्म 22 अक्तूबर 2007 का दर्शाया गया है। अब नगर निगम से बनवाए गए जन्म प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 13 दिसंबर 2007 लिखवाई गई है।
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ब्रह्मपाल सिंह का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का एक ही जन्म प्रमाणपत्र हो सकता है, लेकिन यहां तीन बनवा लिए गए। इसके साथ ही तीनों जन्म प्रमाणपत्र अलग-अलग तिथि के हैं। उधर, शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच बिठा दी है। मुख्य सफाई निरीक्षक इंद्रपाल सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। वह जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लगाए गए दस्तावेज जैसे अस्पताल से जारी प्रमाणपत्र आदि की जांच कर रहे हैं।
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कई स्तर से होती है जांच
जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कुछ नियम हैं। यदि जन्म होने के बाद 21 दिन के भीतर जन्म प्रमाणपत्र बनवाया जाए तो लगभग एक सप्ताह में प्रमाणपत्र तैयार हो जाता है, लेकिन यदि एक वर्ष या उससे अधिक पुराना जन्म है तो निगम उसका सत्यापन कराता है। फाइल एसडीएम स्तर तक जाती है। निश्चित रूप से इस मामले में भी जांच हुई होगी।
एक महिला द्वारा गलत दस्तावेज लगाकर अपने बेटे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की शिकायत आई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि महिला ने अपने बेटे का तीसरा प्रमाणपत्र बनवाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई जा रही है।
- राजेश यादव, अपर नगरायुक्त