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भू-जल के अत्यधिक दोहन से बिगड़े हालात

Tue, 09 Jun 2020 08:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2020 08:54 PM IST
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bhu garbh jal
जनपद के कई ब्लाकों का भूजल स्तर गिरा
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सहारनपुर। जनपद में कृषि, जनसंख्या विस्फोट, उद्योगों को लेकर जल की बढ़ती मांग से कई ब्लाकों में स्थिति चिंताजनक है। कुछ जगहों पर भू-जल का अत्यधिक दोहन हुआ है। जिससे जलस्तर औसतन जनपद में कई जगहों पर 50 से 60 मीटर नीचे पहुंच गया है। भूजल से जुड़े विशेषज्ञ कहते हैं कि कृषि में 86 प्रतिशत भूजल का दोहन होता है, जबकि 14 प्रतिशत नहरों से सिंचाई होती है। यदि भूजल का दोहन रोकना है तो भूजल को केवल पेयजल के लिए इस्तेमाल करना होगा। सहारनपुर के कुछ ब्लाकों की स्थित बेहद खराब है। विशेषज्ञों की राय है कि जलसंरक्षण, जल प्रबंधन और नियोजन से भूजल स्तर को काफी हद तक सुधार किया जा सकता है। सरकारी प्रयासों से कुछ ब्लाकों में जहां पर स्थिति अत्यधिक दोहन की थी, उसमें सुधार आया है।
सहारनपुर जनपद में जल के अंधाधुंध दोहन ने भूजल स्तर काफी गिर गया है। भूजल स्तर कई जगहों पर बेहद नीचे चला गया है। कई जगहों पर अतिदोहन से स्थिति बेहद खराब हो गई है। प्रदूषण ने भी भूजल पर असर डाला है। औद्योगिक इकाईयों का जल और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लाट में बिना ट्रीट किए गंदा पानी नदियों में डालने से भी कई जगहों पर भूजल स्तर प्रदूषित हुआ है। सहारनपुर जनपद में भूजल के अत्यधिक दोहन एवं दोहन के सापेक्ष हो रहे कम भूजल रिचार्ज की वजह से जनपद के 11 विकास खंडों में भूजल स्तर बहुत अच्छा नहीं है। भूजल संपदा का स्तर निरंतर नीचे जा रहा है, लेकिन इस वर्ष चूंकि मौसम बेहद गर्म नहीं रहा। इसलिए कुछ सुधार आया है। हालांकि भू-जल स्तर बहुत कुछ मानसून और प्री-मानसून की बारिश पर निर्भर करता है।
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दोहन का बड़ा कारण ये भी है
पैकेट और बोतल बन्द पानी को विकास का प्रतीक माना जाने लगा है। स्वच्छ जल यानि बोतल बंद पानी। ये कारोबार इसलिए तेजी से विकसित हुआ कि भू-जलस्तर बेहद नीचे चला गया। बिना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सीधे नदियों में गंदा पानी गिर रहा है। सहारनपुर के आठ नाले ढमोला नदी में गिरते हैं। ट्रीटमेंट की क्षमता कम होने से नदियां भी प्रदूषित हो रही है। हालांकि नगर निगम की ओर से 50 हजार पौधे रोपित करके नदी के रिवर बेड को बेहतर करने की कोशिश की जा रही है। इन ब्लाकों में स्थित है चिंताजनक बलियाखेड़ी, देवबंद, गंगोह, मुजफ्फराबाद, नागल, नकुड़, नानौता, पुंवारका, साढ़ौली करीम, सरसावा, रामपुर मनिहारान में भू-जलस्तर अच्छा नहीं है। भू-गर्भ जल विभाग उत्तरप्रदेश के आंकलन के अनुसार गंगोह, रामपुर मनिहारान, पुंवारका, नकुड़ आदि में अति दोहन की बात सामने आई है।
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---वर्जन--
भू-जलस्तर गंगोह सहित कई ब्लाकों में काफी दोहन की वजह से खराब रहा, लेकिन अबकी तुलना करें तो लॉकडाउन की वजह से औद्योगिक इकाईयां बंद रहीं। खेती-किसान भी काफी हद तक ठप रहा। जिसकी वजह से अबकी बहुत दोहन नहीं हुआ। मानसून और बारिश अच्छी हुई तो जिन ब्लॉकों में भू-जलस्तर नीचे चला गया है। वह लौट आएगा। सरकारी प्रयासों से हालांकि अत्यधिक दोहन वाले ब्लाकों में चेक डैम, तालाबों का जीर्णोद्धार आदि से भू-जलस्तर में सुधार लाने की कोशिश निरंतर जारी है।
-प्रमोद बंसल, क्षेत्रीय सहायक, भू-गर्भ विभाग सहारनपुर
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