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भाकियू ने डीएम आफिस के गेट के ताले तोड़े
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
Updated Wed, 28 Mar 2018 12:06 AM IST
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पुलिस को धकियाकर कलक्ट्रेट में घुसते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में भारतीय किसान यूनियन ने एनजीटी द्वारा दस साल से अधिक डीजल वाहनों के संचालन पर लगाई रोक के विरोध में मंगलवार को पुराने ट्रैक्टरों के साथ जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। किसान डीएम आफिस के बाहरी गेट पर लगाया ताला तोड़कर अंदर घुस गए।
बाद में अधिकारियों के अनुरोध पर पांच ट्रैक्टर ही अंदर ले जाए गए। किसान नेताओं ने केन्द्र और प्रदेश सरकार को कोसने के बाद प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन प्रशासन को दिया। पूर्व घोषणा के अनुसार भाकियू से जुड़े किसान मंगलवार को गांधी पार्क में एकत्र हुए।
किसान अपने साथ पुराने ट्रैक्टरों को भी लेकर आए थे, जिनके संचालन पर एनजीटी ने रोक लगाई है। सीओ द्वितीय मुकेश मिश्रा और सीओ इंदू सिद्धार्थ ने किसान नेेताओं से बात कर शहर में जुलूस न निकालने का अनुरोध किया।
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भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी विनय कुमार ने कहा कि वह शांतिपूर्ण आंदोलन करने आए हैं, उनका इरादा किसी तरह के टकराव का नहीं है। इसके बाद किसान अपने ट्रैक्टरों में सवार होकर जुलूस के रुप में अंबाला रोड, घंटाघर, कोर्ट रोड होते हुए कलक्ट्रेट गेट पर पहुंचे।
यहां पर पहले से जिलाधिकारी आफिस के बाहरी गेट पर ताला लगाकर घेराबंदी की गई थी, ताकि किसान अंदर ना जा सके। पुलिस और प्रशासन के फैसले से नाराज किसानों ने सड़क के बीचोबीच ट्रैक्टर लगाकर यातायात जाम कर दिया, जिससे दोनों तरफ लंबा जाम लग गया।
इस दौरान किसानों की सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार और सीओ मुकेश मिश्रा से तीखी झड़पें र्हुइं। इसी बीच कुछ युवकों ने पुलिस की जीप को पलटने की कोशिश भी की। हंगामे के बाद गेट पर चढ़कर अंदर दाखिल हुए किसानों ने ताला तोड़कर गेट खोल दिया।
अधिकारी और पुलिस मूक दर्शक बनी रही। इसके बाद काफी देर तक ट्रैक्टरों को अंदर प्रवेश देने को लेकर गहमागहमी चलती रही। बाद में पांच ट्रैक्टर ले जाने पर सहमति हुई। किसानों ने डीएम आफिस के बाहर पहुंचकर नारेबाजी की।
भाकियू जिलाध्यक्ष चौधरी चरण सिंह, कालूराम, जगपाल, मुकेश तोमर, अशोक कुमार, मेवाराम, रघुुवीर, केहर सिंह, इमरान, नरेश स्वामी, जयपाल, सरदार मनमोहन सिंह, डा राजबीर, नवाब, भोपाल, शेखर, ब्रजपाल, भूपेन्द्र त्यागी, अनिल, सोरण सिंह आदि इस दौरान मौजूद थे।
आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन
भाकियू ने सिटी मजिस्ट्रेट को प्रधानमंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन दिया, जिसमें पुराने ट्रैक्टरों पर लगाई रोक हटाने, मध्य प्रदेश की तर्ज पर किसानों को दो सौ रुपये प्रति कुंतल बोनस देने, बकाया गन्ने का भुगतान दिलाने, खरीफ और रबी फसल ऋण एक साथ देने, बिजली की बढ़ी दरों को वापस लेने, नहर परियोजनाओं को जल्द पूरा करने, बुंदेलखंड के किसानों का ऋण माफ करने आदि मांगों का उल्लेख किया गया है।
काम नहीं आई अधिकारियों की रणनीति
किसानों को रोकने की योजना की रणनीति काम नहीं आई। अधिकारी भाकियू नेताओं के संपर्क में तो थे, मगर उनकी एक नहीं सुनी गई। पहले गांधी पार्क पर उन्हें समझाने की कोशिश हुई। कामयाब नहीं हुए तो डीएम आफिस के बाहरी गेट पर ताला लगाकर पुलिस की घेराबंदी कर ली गई।
अधिकारियों ने किसानों को बीच सड़क पर रोककर आम जनमानस की दिक्कतें बढ़ा दीं। नतीजा यह हुआ कि किसानों ने सड़क पर आड़े तिरछे वाहन लगाकर यातायात बंद कर दिया, जिसका खामियाजा लोगों को जाम के रूप में भुगतना पड़ा। गेट के ताले तोड़ने के बाद पुलिस जीप पलटने की कोशिश हुई, मगर अधिकारी मूक दर्शक बने खड़े रहे। एक बार को एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह थोड़े नाराज जरूर हुए। किसानों को रोकने को दूसरा बैरियर भी बनाया गया, जो भी काम नहीं आया।
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बाद में अधिकारियों के अनुरोध पर पांच ट्रैक्टर ही अंदर ले जाए गए। किसान नेताओं ने केन्द्र और प्रदेश सरकार को कोसने के बाद प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन प्रशासन को दिया। पूर्व घोषणा के अनुसार भाकियू से जुड़े किसान मंगलवार को गांधी पार्क में एकत्र हुए।
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किसान अपने साथ पुराने ट्रैक्टरों को भी लेकर आए थे, जिनके संचालन पर एनजीटी ने रोक लगाई है। सीओ द्वितीय मुकेश मिश्रा और सीओ इंदू सिद्धार्थ ने किसान नेेताओं से बात कर शहर में जुलूस न निकालने का अनुरोध किया।
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भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी विनय कुमार ने कहा कि वह शांतिपूर्ण आंदोलन करने आए हैं, उनका इरादा किसी तरह के टकराव का नहीं है। इसके बाद किसान अपने ट्रैक्टरों में सवार होकर जुलूस के रुप में अंबाला रोड, घंटाघर, कोर्ट रोड होते हुए कलक्ट्रेट गेट पर पहुंचे।
यहां पर पहले से जिलाधिकारी आफिस के बाहरी गेट पर ताला लगाकर घेराबंदी की गई थी, ताकि किसान अंदर ना जा सके। पुलिस और प्रशासन के फैसले से नाराज किसानों ने सड़क के बीचोबीच ट्रैक्टर लगाकर यातायात जाम कर दिया, जिससे दोनों तरफ लंबा जाम लग गया।
इस दौरान किसानों की सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार और सीओ मुकेश मिश्रा से तीखी झड़पें र्हुइं। इसी बीच कुछ युवकों ने पुलिस की जीप को पलटने की कोशिश भी की। हंगामे के बाद गेट पर चढ़कर अंदर दाखिल हुए किसानों ने ताला तोड़कर गेट खोल दिया।
अधिकारी और पुलिस मूक दर्शक बनी रही। इसके बाद काफी देर तक ट्रैक्टरों को अंदर प्रवेश देने को लेकर गहमागहमी चलती रही। बाद में पांच ट्रैक्टर ले जाने पर सहमति हुई। किसानों ने डीएम आफिस के बाहर पहुंचकर नारेबाजी की।
भाकियू जिलाध्यक्ष चौधरी चरण सिंह, कालूराम, जगपाल, मुकेश तोमर, अशोक कुमार, मेवाराम, रघुुवीर, केहर सिंह, इमरान, नरेश स्वामी, जयपाल, सरदार मनमोहन सिंह, डा राजबीर, नवाब, भोपाल, शेखर, ब्रजपाल, भूपेन्द्र त्यागी, अनिल, सोरण सिंह आदि इस दौरान मौजूद थे।
आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन
भाकियू ने सिटी मजिस्ट्रेट को प्रधानमंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन दिया, जिसमें पुराने ट्रैक्टरों पर लगाई रोक हटाने, मध्य प्रदेश की तर्ज पर किसानों को दो सौ रुपये प्रति कुंतल बोनस देने, बकाया गन्ने का भुगतान दिलाने, खरीफ और रबी फसल ऋण एक साथ देने, बिजली की बढ़ी दरों को वापस लेने, नहर परियोजनाओं को जल्द पूरा करने, बुंदेलखंड के किसानों का ऋण माफ करने आदि मांगों का उल्लेख किया गया है।
काम नहीं आई अधिकारियों की रणनीति
किसानों को रोकने की योजना की रणनीति काम नहीं आई। अधिकारी भाकियू नेताओं के संपर्क में तो थे, मगर उनकी एक नहीं सुनी गई। पहले गांधी पार्क पर उन्हें समझाने की कोशिश हुई। कामयाब नहीं हुए तो डीएम आफिस के बाहरी गेट पर ताला लगाकर पुलिस की घेराबंदी कर ली गई।
अधिकारियों ने किसानों को बीच सड़क पर रोककर आम जनमानस की दिक्कतें बढ़ा दीं। नतीजा यह हुआ कि किसानों ने सड़क पर आड़े तिरछे वाहन लगाकर यातायात बंद कर दिया, जिसका खामियाजा लोगों को जाम के रूप में भुगतना पड़ा। गेट के ताले तोड़ने के बाद पुलिस जीप पलटने की कोशिश हुई, मगर अधिकारी मूक दर्शक बने खड़े रहे। एक बार को एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह थोड़े नाराज जरूर हुए। किसानों को रोकने को दूसरा बैरियर भी बनाया गया, जो भी काम नहीं आया।