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होलाष्टक पर नकारात्मक शक्तियों से रहें सावधान
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सहारनपुर। होलिका दहन से आठ दिन पूर्व दो मार्च को होलाष्टक लग जाएगा। यह आठ दिनों तक रहेगा। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक होलाष्टक में नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे में बच्चों, गर्भवती महिलाओं को खासकर ध्यान रखने की जरूरत है।
ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि धर्म शास्त्रों में माना गया है कि जो व्यक्ति होलाष्टक के दिनों में किसी का बुरा करता है तो उसे बड़े पाप का भागीदार बनना पड़ता है। नौ मार्च को होलिका दहन होगा और 10 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। सनातन धर्म में होलाष्टक को शुभ नहीं माना गया है। फाल्गुन कृष्ण शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक माना गया है। दो मार्च को होलाष्टक शुरू होगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार हिरण्यकश्यप ने इन आठ दिनों में भक्तराज प्रहलाद को अत्यधिक कष्ट दिया था। इसीलिए सनातन धर्म को मानने वाले लोग समय को कष्टकारी मानते हैं। इन आठ दिनों के अंदर कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। ऐसे में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत आदि कार्य नहीं करने चाहिए। विवाह के पश्चात पहली बार होली मनाने वाले नवविवाहिता को यह पर्व अपने पिता के घर मनाना चाहिए। पहली बार पर्व ससुराल में मनाने से पति और उनके परिवार संकट आ सकता है। गर्भवती महिला को होलाष्टक के बीच नदियों को पार नहीं करना चाहिए। ऐसे में तांत्रिक कर्म अधिक होते हैं और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव रहता है। इन दिनों में देवताओं की अत्यधिक पूजा करनी चाहिए। आचार्य जितेंद्र शांडिल्य और संजीव शास्त्री ने बताया कि इन दिनों में अपने घर में लोबान, गूगल, पीली सरसों को जलते हुए उपले पर रखकर सायंकाल को धूनी देनी चाहिए।
होलाष्टक आरंभ
-- 02 मार्च की दोपहर 12:52
होलाष्टक समाप्त
-- 09 मार्च की रात्रि 11:17 बजे
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ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि धर्म शास्त्रों में माना गया है कि जो व्यक्ति होलाष्टक के दिनों में किसी का बुरा करता है तो उसे बड़े पाप का भागीदार बनना पड़ता है। नौ मार्च को होलिका दहन होगा और 10 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। सनातन धर्म में होलाष्टक को शुभ नहीं माना गया है। फाल्गुन कृष्ण शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक माना गया है। दो मार्च को होलाष्टक शुरू होगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार हिरण्यकश्यप ने इन आठ दिनों में भक्तराज प्रहलाद को अत्यधिक कष्ट दिया था। इसीलिए सनातन धर्म को मानने वाले लोग समय को कष्टकारी मानते हैं। इन आठ दिनों के अंदर कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। ऐसे में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत आदि कार्य नहीं करने चाहिए। विवाह के पश्चात पहली बार होली मनाने वाले नवविवाहिता को यह पर्व अपने पिता के घर मनाना चाहिए। पहली बार पर्व ससुराल में मनाने से पति और उनके परिवार संकट आ सकता है। गर्भवती महिला को होलाष्टक के बीच नदियों को पार नहीं करना चाहिए। ऐसे में तांत्रिक कर्म अधिक होते हैं और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव रहता है। इन दिनों में देवताओं की अत्यधिक पूजा करनी चाहिए। आचार्य जितेंद्र शांडिल्य और संजीव शास्त्री ने बताया कि इन दिनों में अपने घर में लोबान, गूगल, पीली सरसों को जलते हुए उपले पर रखकर सायंकाल को धूनी देनी चाहिए।
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होलाष्टक आरंभ
-- 02 मार्च की दोपहर 12:52
होलाष्टक समाप्त
-- 09 मार्च की रात्रि 11:17 बजे