सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से 14 से 20 सितंबर तक ऑनलाइन और ऑफलाइन मशरूम उत्पादन तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। इसमें सहारनपुर, बदायूं, हरिद्वार, अमरोहा जनपद के 41 ग्रामीण युवाओं एवं युवतियों ने भाग लिया।
केवीके सभागार में आयोजित प्रशिक्षण का सोमवार को समापन किया गया। केवीके के प्रभारी एवं मशरूम विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉप्त आईके कुशवाहा ने कहा कि हमारे भोजन में प्रोटीन का खास महत्व है। कहा कि सूखी मशरूम में 20 से 30 प्रतिशत तक प्रोटीन होती है। इसकी गुणवत्ता दूध, अंडा, मांस, मछली की तुलना में अच्छी होती है। मशरूम में उपलब्ध पोषक तत्व कुपोषण दूर करने में सहायक हैं। इसका उत्पादन वर्ष भर किया जा सकता है। उन्होंने सफेद बटन, ओएस्टर, मिल्की, सिताके, गैनोडर्मा मशरूम उत्पादन की तकनीक बताई। प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने मशरूम उत्पादन के लाभ के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. सुखदेव सिंह ने मशरूम उत्पादन में आने वाली समस्याओं के निदान पर प्रकाश डाला। मशरूम उद्यमी सत्यवीर सिंह एवं हिमांशु सैनी ने मशरूम के अचार, मुरब्बा आदि बनाने की जानकारी दी। प्रशिक्षणार्थियों में शांतनु चौहान, आदित्य सैनी, मुकेश रानी, जावेद, अर्जुन वर्मा, आजाद कुमार, शुभम, सुंदरलाल, धीरज कुमार, गुरमीत कौर, नरेंद्र सिंह, हरजीत, अमित कुमार, अंकित कुमार, देवी सिंह अंकित कुमार, सीताराम, प्रताप सैनी, पूजा, पिंकी, सुखपाल सिंह, रेनू प्रभा आदि रहे।