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जीवन की संध्या में नहीं डगमगाया बलदेव का होसला
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-- 83 वर्ष की उम्र, हाड़ कंपा रही ठंड में भी मेहनत से कर रहे मेहनत
सहारनपुर। सब कुछ होने के बावजूद भी जो लोग निराश हो जाते हैं या फिर विषम परिस्थितियों में घातक कदम उठाने से भी गुरेज नहीं करते हैं, ऐसे लोगों को 83 वर्षीय बलदेव राज से सीख लेनी चाहिए। कड़ाके की ठंड और बीमार होने के बावजूद बलदेव राज आहुजा रोजाना मेहनत कर अपने परिवार की रोटी का इंतजाम करते हैं।
नुमाइश कैंप के गोपालनगर निवासी बलदेव राज आहुजा किसी की मदद लेना भी स्वीकार नहीं करते हैं। उनका संकल्प है कि मेहनत कर स्वाभिमान के साथ ही अपना जीवन व्यतीत करेंगे। प्रतिदिन बलदेव एक हाथ में लाठी के सहारे दूसरे हाथ में वजन तोलने की मशीन लेकर लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर माधव नगर स्थित पीएनबी की शाखा के बाहर पार्किंग में खड़े दुपहिया वाहनों के बीच बैठ जाते हैं। उन पर बहुत कम लोगों की नजर पड़ती है। बुजुर्ग होने के कारण बोलने की क्षमता भी बहुत कम है, ऐसे में जमीन पर लाठी की आवाज से आने-जाने लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर उन्हें वजन तुलवाने के लिए बुलाते हैं। बलदेव राज दिन में 20 से 50 रुपये तक कमाते हैं और कई बार खाली हाथ भी लौटना पड़ता है। जब बलदेव राज से कहा गया कि किसी संस्था की ओर से मदद की जाए तो उसे स्वीकार करें, तो उन्होंने कहा कि मदद लेने से अच्छा है कि भूखा ही सो जाऊं। क्योंकि, मदद को लौटाना पड़ेगा और इस जन्म में नहीं तो फिर अगले जन्म में। इसलिए किसी से मदद नहीं लेंगे और मेहनत कर ही जीवन व्यतीत करेंगे।
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युवा पुत्र का हो गया था निधन
बलदेव राज बताते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व उनके युवा पुत्र की हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई थी। अब बीमार पत्नी व बेटे के दो बच्चों की जिम्मेदारी भी बलदेव राज के कंधों पर है।
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सहारनपुर। सब कुछ होने के बावजूद भी जो लोग निराश हो जाते हैं या फिर विषम परिस्थितियों में घातक कदम उठाने से भी गुरेज नहीं करते हैं, ऐसे लोगों को 83 वर्षीय बलदेव राज से सीख लेनी चाहिए। कड़ाके की ठंड और बीमार होने के बावजूद बलदेव राज आहुजा रोजाना मेहनत कर अपने परिवार की रोटी का इंतजाम करते हैं।
नुमाइश कैंप के गोपालनगर निवासी बलदेव राज आहुजा किसी की मदद लेना भी स्वीकार नहीं करते हैं। उनका संकल्प है कि मेहनत कर स्वाभिमान के साथ ही अपना जीवन व्यतीत करेंगे। प्रतिदिन बलदेव एक हाथ में लाठी के सहारे दूसरे हाथ में वजन तोलने की मशीन लेकर लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर माधव नगर स्थित पीएनबी की शाखा के बाहर पार्किंग में खड़े दुपहिया वाहनों के बीच बैठ जाते हैं। उन पर बहुत कम लोगों की नजर पड़ती है। बुजुर्ग होने के कारण बोलने की क्षमता भी बहुत कम है, ऐसे में जमीन पर लाठी की आवाज से आने-जाने लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर उन्हें वजन तुलवाने के लिए बुलाते हैं। बलदेव राज दिन में 20 से 50 रुपये तक कमाते हैं और कई बार खाली हाथ भी लौटना पड़ता है। जब बलदेव राज से कहा गया कि किसी संस्था की ओर से मदद की जाए तो उसे स्वीकार करें, तो उन्होंने कहा कि मदद लेने से अच्छा है कि भूखा ही सो जाऊं। क्योंकि, मदद को लौटाना पड़ेगा और इस जन्म में नहीं तो फिर अगले जन्म में। इसलिए किसी से मदद नहीं लेंगे और मेहनत कर ही जीवन व्यतीत करेंगे।
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युवा पुत्र का हो गया था निधन
बलदेव राज बताते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व उनके युवा पुत्र की हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई थी। अब बीमार पत्नी व बेटे के दो बच्चों की जिम्मेदारी भी बलदेव राज के कंधों पर है।
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