फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Bahadur Rajesh had sacrificed his life

कारगिल विजय दिवस -- संशोधित --

Sun, 25 Jul 2021 11:00 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jul 2021 11:00 PM IST
विज्ञापन
Bahadur Rajesh had sacrificed his life
सहारनपुर। कारगिल युद्ध ऑपरेशन विजय में पराक्रम का परिचय देते हुए जनपद के जेहरा गांव निवासी राजेश कुमार ने शहादत दी थी। उनकी शहादत के समय जो वादे किए गए थे, उनमें से कई अधूरे हैं।
विज्ञापन

एक अगस्त 1968 को गांव जेहरा में ताराचंद बैरागी के घर जन्मे राजेश कुमार 8 सितंबर 1988 को सेना में भर्ती हुए थे। सात जौलाई 1999 को पैराशूट रेजीमेंट में लांसनायक राजेश कारगिल में दुश्मनों से युद्ध करते हुए शहीद हो गए थे। राष्ट्रीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था। उस समय प्रशासन द्वारा शहीद राजेश के सम्मान में गंगोह के सहारनपुर बस अडडा चौक पर उनकी प्रतिमा लगाने और गंगोह वजीरपुर मार्ग का नामकरण भी उनके नाम पर करने की घोषणा की गई थी। गंगोह वजीरपुर मार्ग पर उनके नाम का शिलापट तो लगा, लेकिन गंगोह में बस अड्डे पर प्रतिमा स्थापित नहीं हुई।
विज्ञापन

शहीद राजेश के पिता ताराचंद बैरागी ने गांव में जमीन पर उनका समाधि स्थल बनवाया, जिसमें उनकी प्रतिमा भी लगाई गई है। ग्रामीण इसे तीर्थ स्थल मानते हुए प्रतिवर्ष उनकी शहादत दिवस और कारगिल दिवस पर यहां जुटकर नमन करते हैं। क्षेत्र के युवा भी उनसे प्रेरणा लेकर सेना में जाने और राष्ट्र सेवा का संकल्प ले रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वीरों की शहादत को नमन
सेना मेडल विजेता कर्नल मधुर गोयल कहते हैं कि कारगिल युद्ध में देश के जवानों ने साहस का परिचय दिया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। वह खुद भी 1994 से 1996 तक और 2002 से 2004 तक कश्मीर में तैनात रहे। इसके अलावा 1989-90 में सियाचीन ग्लेशियर में रहे। वहां तैनाती के दौरान सैनिकों द्वारा जिस अदम्य साहस से देश की रक्षा के लिए कार्य किया जाता है, वह बहुत कठिन होता है। उन्होंने बताया कि अपने इन्हीं अनुभव को एक सैनिक की यात्रा नामक पुस्तक में भी लिखा है, जो जनवरी 2021 में ही प्रकाशित हुई।

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल मोहर सिंह का कहना है कि 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल का युद्ध हुआ। 527 जवान शहीद हुए और 1300 से ज्यादा घायल हुए और करीब 2700 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। भारतीय सेना और वायुसेना ने अदम्य साहस का परिचय दिया। देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। ऐसे वीर सपूतों को जन्म देने वाले माता पिता भी धन्य हैं। पूरे देश को इन सैनिकों की शहादत पर गर्व है, क्योंकि इन्होंने देश की रक्षा के लिए आहुति दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed