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20 साल में एक भी आवासीय योजना नहीं ला सका प्राधिकरण
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सहारनपुर। विकास प्राधिकरण 20 साल में अपनी एक भी आवासीय योजना नहीं ला सका है। ऐसा नहीं है कि प्राधिकरण ने कभी कोशिश नहीं की है, लेकिन खराब कार्ययोजना और अधिकारियों के शिथिल रवैये की वजह से योजनाएं शुरू होने से पहले ही दम तोड़ गईं।
विकास प्राधिकरण ने करीब दो वर्ष पहले सर्किट हाउस रोड पर साहिबजी नगर में पांच मंजिला आवासीय भवन बनाने की योजना तैयार की थी, जिसमें 56 फ्लैट बनाए जाने थे। फ्लैट की कीमत 45 लाख रुपये रखी गई थी। बिल्डिंग और फ्लैट्स का नक्शा तैयार करा लिया गया था। विकास प्राधिकरण ने इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे थे। योजना थी कि यदि 50 फीसदी यानी 27 फ्लैट के लिए भी ग्राहक मिल जाते हैं तो निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा, मगर दो माह तक इंतजार के बाद भी कोई आवेदन प्राधिकरण को नहीं मिला। ऐसे में प्राधिकरण अधिकारियों को योजना से हाथ खींचने पड़े। प्राधिकरण की योजना क्यों विफल रही। यह अपने आप में एक सवाल है, क्योंकि दिल्ली रोड पर एक कंपनी भी फ्लैट बना रही है, जो बीते छह माह में 79 फीसदी फ्लैट बिक जाने का दावा कर रही है। खास बात यह है कि कंपनी के फ्लैट प्राधिकरण के फ्लैट से करीब 20 प्रतिशत अधिक महंगे हैं।
पीएम आवास योजना भी फेल
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऐसे शहरी लोगों के लिए फ्लैट तैयार किए जाने थे, जो शहर में रहते हैं, मगर उनके पास अपना मकान या मकान के लिए जमीन भी नहीं है। योजना को साकार करने का जिम्मा विकास प्राधिकरण पर था। कुल दो हजार फ्लैट बनाए जाने थे। योजना के तहत एक फ्लैट पर करीब छह लाख रुपये की लागत आनी थी, मगर पात्र व्यक्ति से करीब साढ़े चार लाख रुपये लिए जाने थे। योजना को मूर्त रूप देने के लिए प्राधिकरण ने दाबकी जुनारदार के पास और दिल्ली रोड पर जमीनें देखी थीं, मगर पास नहीं हो सकीं। इसके बाद कमिश्नर और डीएम के प्रयास से कोतवाली मंडी क्षेत्र में खाली पड़ी केंद्र सरकार की 23 बीघा जमीन को योजना के लिए चिह्नित किया गया था, जिसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। शासन स्तर से प्रस्ताव पास हो गया था, मगर चूंकि उक्त जमीन नगर निगम के अंडर में है तो नगर निगम के अधिकारियों ने शासन में आपत्ति लगा दी थी, जिसके बाद योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद प्राधिकरण अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर योजना से हाथ खड़े कर लिए।
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साहिब जी नगर की योजना में विकास प्राधिकरण ने काफी प्रयास किए। इसके बाद हमने फ्लैट के दाम भी कम किए, मगर खरीदार नहीं मिले हैं। खरीदार नहीं मिलने की एक वजह यह भी है कि सहारनपुर में अभी फ्लैट कल्चर नहीं है। मगर फिर भी हम नई चीजें करने पर विचार कर रहे हैं।
ज्ञानेंद्र सिंह, कार्यवाहक उपाध्यक्ष, एसडीए।
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विकास प्राधिकरण ने करीब दो वर्ष पहले सर्किट हाउस रोड पर साहिबजी नगर में पांच मंजिला आवासीय भवन बनाने की योजना तैयार की थी, जिसमें 56 फ्लैट बनाए जाने थे। फ्लैट की कीमत 45 लाख रुपये रखी गई थी। बिल्डिंग और फ्लैट्स का नक्शा तैयार करा लिया गया था। विकास प्राधिकरण ने इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे थे। योजना थी कि यदि 50 फीसदी यानी 27 फ्लैट के लिए भी ग्राहक मिल जाते हैं तो निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा, मगर दो माह तक इंतजार के बाद भी कोई आवेदन प्राधिकरण को नहीं मिला। ऐसे में प्राधिकरण अधिकारियों को योजना से हाथ खींचने पड़े। प्राधिकरण की योजना क्यों विफल रही। यह अपने आप में एक सवाल है, क्योंकि दिल्ली रोड पर एक कंपनी भी फ्लैट बना रही है, जो बीते छह माह में 79 फीसदी फ्लैट बिक जाने का दावा कर रही है। खास बात यह है कि कंपनी के फ्लैट प्राधिकरण के फ्लैट से करीब 20 प्रतिशत अधिक महंगे हैं।
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पीएम आवास योजना भी फेल
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऐसे शहरी लोगों के लिए फ्लैट तैयार किए जाने थे, जो शहर में रहते हैं, मगर उनके पास अपना मकान या मकान के लिए जमीन भी नहीं है। योजना को साकार करने का जिम्मा विकास प्राधिकरण पर था। कुल दो हजार फ्लैट बनाए जाने थे। योजना के तहत एक फ्लैट पर करीब छह लाख रुपये की लागत आनी थी, मगर पात्र व्यक्ति से करीब साढ़े चार लाख रुपये लिए जाने थे। योजना को मूर्त रूप देने के लिए प्राधिकरण ने दाबकी जुनारदार के पास और दिल्ली रोड पर जमीनें देखी थीं, मगर पास नहीं हो सकीं। इसके बाद कमिश्नर और डीएम के प्रयास से कोतवाली मंडी क्षेत्र में खाली पड़ी केंद्र सरकार की 23 बीघा जमीन को योजना के लिए चिह्नित किया गया था, जिसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। शासन स्तर से प्रस्ताव पास हो गया था, मगर चूंकि उक्त जमीन नगर निगम के अंडर में है तो नगर निगम के अधिकारियों ने शासन में आपत्ति लगा दी थी, जिसके बाद योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद प्राधिकरण अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर योजना से हाथ खड़े कर लिए।
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साहिब जी नगर की योजना में विकास प्राधिकरण ने काफी प्रयास किए। इसके बाद हमने फ्लैट के दाम भी कम किए, मगर खरीदार नहीं मिले हैं। खरीदार नहीं मिलने की एक वजह यह भी है कि सहारनपुर में अभी फ्लैट कल्चर नहीं है। मगर फिर भी हम नई चीजें करने पर विचार कर रहे हैं।
ज्ञानेंद्र सिंह, कार्यवाहक उपाध्यक्ष, एसडीए।