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Saharanpur News: सावधान! ठगों के झांसे में न आएं, रहे सतर्क
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सहारनपुर। अगर आपको कोई फोन कॉल कर लक्की ड्रा निकलने, बैंक खाता बंद होने सहित अनेक तरीकों से मदद करने का झांसा देता है तो सावधान हो जाएं। क्योंकि, यह कॉल साइबर अपराधियों की हो सकती है। साइबर अपराधी नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों को निशाना बना रहा है। जरूरत है कि इनके झांसे में न आएं और पुलिस को तत्काल सूचना देकर इनको सबक सिखाएं।
जिले में एक वर्ष में 100 से अधिक साइबर ठगी की घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि, 60 प्रतिशत मामलों में पुलिस ने ठगी का शिकार हुए लोगों के खातों में पैसा वापस कराया है, लेकिन साइबर अपराधी पुलिस की पकड़ में नहीं आ सके। खास बात यह है कि बैंक खातों से ऑनलाइन नकदी निकालकर ठगी करने वाले अपने सिमकार्ड, बैंक खाता आदि सब फर्जी पहचान पत्र के जरिये खोलते हैं। ठगी की शिकायत आने पर जब पुलिस पड़ताल करती है तो उसमें ऐसे ही खुलासे हुए हैं। साथ ही जिस नंबर से साइबर क्राइम करने वाले कॉल करते हैं, वह वारदात के बाद बंद कर दिया जाता है।
साइबर क्राइम करने वालों में कोई पश्चिम बंगाल, बिहार, भोपाल, रायपुर, जयपुर तो किसी का पहचानपत्र राजस्थान और दिल्ली का मिलता है, लेकिन वह भी फर्जी होने की वजह से आरोपी को पुलिस नहीं पकड़ पाते हैं।
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- इन तरीकों से कर रहे ठगी
- फर्जी बैंक अधिकारी बनकर एटीएम की गोपनीय जानकारी जुटाकर
- फेसबुक पर प्रेमजाल में फंसाकर वीडियो काल करके ब्लैकमेल करना
- नौकरी लगवाने एवं विदेश भेजने के नाम पर ठगी
- मोबाइल के सिम कार्ड को अपडेट करने के बहाने ठगी
- ऑनलाइन सामान खरीदने पर डिस्काउंट का झांसा देकर
- मैट्रीमोनियल वेबसाइट के माध्यम से संपर्क करके शादी कराने का झांसा देकर
- फर्जी आयकर अधिकारी बनकर
- मोबाइल टावर लगवाने को फाइल चार्ज के नाम पर
-- - बचाव के लिए रखें इन बातों का ध्यान
- अनजान व्यक्ति की फोन कॉल, एसएमएस या सोशल मीडिया पर संदेश और लिंक का जवाब न दें।
- बैंक, एजेंसी, लोन ब्रांच के नाम पर किसी अजान कॉलर को अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, आधार कार्ड या उसका नंबर, पैनकार्ड से लेकर ओटीपी न बताएं।
- लोन, बीमा, पैसे दोगुने करने जैसे लालच में ना आए
- वर्जन : साइबर ठगी के अनेक मामलों में पुलिस ने पीड़ित लोगों का पैसा वापिस कराया है। कुछ साइबर ठगों को पकड़ा भी गया है। लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति उन्हें फोन कॉल कर किसी भी तरह का प्रलोभन देता है तो इसकी जानकारी तत्काल साइबर थाना पुलिस को दें। - डाॅ. विपिन ताडा, एसएसपी
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जिले में एक वर्ष में 100 से अधिक साइबर ठगी की घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि, 60 प्रतिशत मामलों में पुलिस ने ठगी का शिकार हुए लोगों के खातों में पैसा वापस कराया है, लेकिन साइबर अपराधी पुलिस की पकड़ में नहीं आ सके। खास बात यह है कि बैंक खातों से ऑनलाइन नकदी निकालकर ठगी करने वाले अपने सिमकार्ड, बैंक खाता आदि सब फर्जी पहचान पत्र के जरिये खोलते हैं। ठगी की शिकायत आने पर जब पुलिस पड़ताल करती है तो उसमें ऐसे ही खुलासे हुए हैं। साथ ही जिस नंबर से साइबर क्राइम करने वाले कॉल करते हैं, वह वारदात के बाद बंद कर दिया जाता है।
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साइबर क्राइम करने वालों में कोई पश्चिम बंगाल, बिहार, भोपाल, रायपुर, जयपुर तो किसी का पहचानपत्र राजस्थान और दिल्ली का मिलता है, लेकिन वह भी फर्जी होने की वजह से आरोपी को पुलिस नहीं पकड़ पाते हैं।
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- इन तरीकों से कर रहे ठगी
- फर्जी बैंक अधिकारी बनकर एटीएम की गोपनीय जानकारी जुटाकर
- फेसबुक पर प्रेमजाल में फंसाकर वीडियो काल करके ब्लैकमेल करना
- नौकरी लगवाने एवं विदेश भेजने के नाम पर ठगी
- मोबाइल के सिम कार्ड को अपडेट करने के बहाने ठगी
- ऑनलाइन सामान खरीदने पर डिस्काउंट का झांसा देकर
- मैट्रीमोनियल वेबसाइट के माध्यम से संपर्क करके शादी कराने का झांसा देकर
- फर्जी आयकर अधिकारी बनकर
- मोबाइल टावर लगवाने को फाइल चार्ज के नाम पर
- अनजान व्यक्ति की फोन कॉल, एसएमएस या सोशल मीडिया पर संदेश और लिंक का जवाब न दें।
- बैंक, एजेंसी, लोन ब्रांच के नाम पर किसी अजान कॉलर को अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, आधार कार्ड या उसका नंबर, पैनकार्ड से लेकर ओटीपी न बताएं।
- लोन, बीमा, पैसे दोगुने करने जैसे लालच में ना आए
- वर्जन : साइबर ठगी के अनेक मामलों में पुलिस ने पीड़ित लोगों का पैसा वापिस कराया है। कुछ साइबर ठगों को पकड़ा भी गया है। लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति उन्हें फोन कॉल कर किसी भी तरह का प्रलोभन देता है तो इसकी जानकारी तत्काल साइबर थाना पुलिस को दें। - डाॅ. विपिन ताडा, एसएसपी