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विधानसभा सीट नंबर एक, विकास कम समस्याएं अनेक
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बेहट (सहारनपुर)। हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा को यूपी से जोड़ने वाली प्रदेश की नंबर एक विधानसभा सीट बेहट में दशकों से चली आ रही समस्याओं का आज तक निराकरण नहीं हो सका है। इस सीट के एक बड़े इलाके की पहचान घाड़ क्षेत्र के नाम से होती है। अग्निकांड से बचाव के लिए फायर स्टेशन की स्थापना की मांग हो या फिर नदी नालों पर पुलों का निर्माण, फल पट्टी को निरस्त कर उद्योग लगाने के वायदे भी यहां के लोगों से खूब किए गए, लेकिन चुनाव के बाद नेता सब भूल गए। नया मुद्दा गन्ना किसानों से जुड़ी बंद पड़ी शाकंभरी शुगर मिल को चलवाने का है। शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली नदियों पर धौलाकुआं व मदनपुरा, बादशाहीबाग, जैतपुर, मुर्तजापुर, नौरंगपुर-कुरड़ीखेड़ा आदि 10 से अधिक गांवों के लिए पुलों के निर्माण की मांग भी लंबे समय से चली आ रही है। अग्निकांड भी यहां हर साल गर्मी के मौसम में त्रासदी लेकर आते हैं। पिछले वर्ष गांव खुवाशपुर में आग लगने से 30 परिवार घर से बेघर हो गए थे। कितने ही मवेशियों की जान भी गई थी, लेकिन इस दर्द से भी जनप्रतिनिधियों का दिल नहीं पसीज सका।
बेहट की संजय कॉलोनी निवासी व्यापारी अवनीश अग्रवाल कहते हैं कि क्षेत्र में रोजगार के सीमित संसाधन होना एक बड़ा मुद्दा है। पिछले काफी समय से बेहट फल पट्टी को निरस्त किए जाने की मांग की जा रही है, ताकि यहां इंडस्ट्री लग सके और युवाओं को रोजगार मिल सके। फल पट्टी का लाभ किसानों को न मिलकर केवल चंद परिवारों को मिल रहा है। हर बार चुनाव के समय यह मांग जोर पकड़ती है। नेता जनता के बीच आकर वायदे तो कर जाते हैं लेकिन उसे पूरा नहीं करते।
शिवालिक जंगल से सटे गांव खुवाशपुर के पूर्व प्रधान रियाजुल हसन का कहना है कि दशकों से घाड़ क्षेत्र में गर्मी के मौसम में होने वाले अग्निकांड की त्रासदी झेल रहा है। जानमाल का भारी नुकसान हर साल होता है। अप्रैल 2021 में उनके गांव में 30 परिवारों के घर आग लगने से जल गए थे। कई मवेशी जिंदा जले गए थे। अग्निकांड से बचाव के लिए क्षेत्र के लोग पिछले कई दशक से फायर स्टेशन की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन प्रदेश में आज तक जितनी भी सरकारें बनीं, उनकी आवाज किसी तक नहीं पहुंची। चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं और झूठे वायदे करके चले जाते हैं।
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गांव मुर्तजापुर निवासी प्रमोद सैनी का कहना है कि बेहट विधानसभा क्षेत्र में शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियों में आने वाली बाढ़ से होने वाला नुकसान और नदी नालों से घिरे गांवों के रास्ते पर पुलों का निर्माण एक बड़ा मुद्दा है। उनका गांव बेहट तहसील से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है, लेकिन बरसात में रास्ते पर पड़ने वाली नदी पर पुल नहीं बनने से उन्हें 8 किमी का अतिरिक्त सफर तय करके बेहट आना पड़ता है। काफी समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है। इतना जरूर हुआ कि भाजपा सरकार में पुल का स्टीमेट तो बनाकर शासन को भेज दिया गया, लेकिन बजट नहीं मिला।
गांव उसंड निवासी यशपाल सिंह कांबोज का कहना है कि 2014 से शाकंभरी शुगर मिल बंद पड़ी है। इससे क्षेत्र के गन्ना किसानों के सामने बड़ी समस्या है। किसान मिल को चालू कराने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि मिल को चालू नहीं करा पाए। आंदोलन के समय कई-कई जनप्रतिनिधि और नेता आए थे। वादे कर गए, लेकिन किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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बेहट की संजय कॉलोनी निवासी व्यापारी अवनीश अग्रवाल कहते हैं कि क्षेत्र में रोजगार के सीमित संसाधन होना एक बड़ा मुद्दा है। पिछले काफी समय से बेहट फल पट्टी को निरस्त किए जाने की मांग की जा रही है, ताकि यहां इंडस्ट्री लग सके और युवाओं को रोजगार मिल सके। फल पट्टी का लाभ किसानों को न मिलकर केवल चंद परिवारों को मिल रहा है। हर बार चुनाव के समय यह मांग जोर पकड़ती है। नेता जनता के बीच आकर वायदे तो कर जाते हैं लेकिन उसे पूरा नहीं करते।
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शिवालिक जंगल से सटे गांव खुवाशपुर के पूर्व प्रधान रियाजुल हसन का कहना है कि दशकों से घाड़ क्षेत्र में गर्मी के मौसम में होने वाले अग्निकांड की त्रासदी झेल रहा है। जानमाल का भारी नुकसान हर साल होता है। अप्रैल 2021 में उनके गांव में 30 परिवारों के घर आग लगने से जल गए थे। कई मवेशी जिंदा जले गए थे। अग्निकांड से बचाव के लिए क्षेत्र के लोग पिछले कई दशक से फायर स्टेशन की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन प्रदेश में आज तक जितनी भी सरकारें बनीं, उनकी आवाज किसी तक नहीं पहुंची। चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं और झूठे वायदे करके चले जाते हैं।
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गांव मुर्तजापुर निवासी प्रमोद सैनी का कहना है कि बेहट विधानसभा क्षेत्र में शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियों में आने वाली बाढ़ से होने वाला नुकसान और नदी नालों से घिरे गांवों के रास्ते पर पुलों का निर्माण एक बड़ा मुद्दा है। उनका गांव बेहट तहसील से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है, लेकिन बरसात में रास्ते पर पड़ने वाली नदी पर पुल नहीं बनने से उन्हें 8 किमी का अतिरिक्त सफर तय करके बेहट आना पड़ता है। काफी समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है। इतना जरूर हुआ कि भाजपा सरकार में पुल का स्टीमेट तो बनाकर शासन को भेज दिया गया, लेकिन बजट नहीं मिला।
गांव उसंड निवासी यशपाल सिंह कांबोज का कहना है कि 2014 से शाकंभरी शुगर मिल बंद पड़ी है। इससे क्षेत्र के गन्ना किसानों के सामने बड़ी समस्या है। किसान मिल को चालू कराने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि मिल को चालू नहीं करा पाए। आंदोलन के समय कई-कई जनप्रतिनिधि और नेता आए थे। वादे कर गए, लेकिन किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अवनीश अग्रवाल- फोटो : SAHARANPUR

प्रमोद सैनी- फोटो : SAHARANPUR