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मोहर्रम का चांद दिखते ही ‘या हुसैन’ की सदाएं बुलंद
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मोहर्रम का चांद दिखते ही ‘या हुसैन’ की सदाएं बुलंद
सरसावा (सहारनपुर)। मोहर्रम का चांद नजर आते ही इमाम बारगाह से गम ए हुसैन की याद में या हुसैन की सदाएं बुलंद होने लगीं। शियाओं ने खुशी की प्रतीक सभी वस्तुओं को त्याग दिया। वहीं महिलाओं ने भी गमे हुसैन की याद को ताजा करते हुए तमाम शृंगारों से दूरी बना ली।
मंगलवार शाम को चांद नजर आने के साथ ही शिया सोगवारों की गम की यादें ताजा हो गईं। इस्लामिक कैलेंडर के प्रथम माह मोहर्रम की 1 से 10 तारीख तक शिया संप्रदाय के लोग इमाम हुसैन की शहादत को याद कर गमजदा रहते हैं। शिया संप्रदाय के अनुसार हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन दीन ए इस्लाम की खातिर करबला के मैदान में शहीद हो गए थे। उन्हीं की याद में शिया रात में मजलिस करते हैं, जिसमें हजरत इमाम हुसैन की शहादत का किस्सा बयान किया जाता है। इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम का जुलूस भी निकाला जाता है।
नगर में शिया संप्रदाय के प्रमुख पूर्व प्रधानाचार्य मुनाजिर हुसैन जैदी ने बताया कि इस वर्ष भी कोरोना संक्रमण के कारण शासन द्वारा जारी गाइडलाइन को देखते हुए मोहर्रम का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। इमामबाड़े में होने वाली मजलिसोें में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा।
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सरसावा (सहारनपुर)। मोहर्रम का चांद नजर आते ही इमाम बारगाह से गम ए हुसैन की याद में या हुसैन की सदाएं बुलंद होने लगीं। शियाओं ने खुशी की प्रतीक सभी वस्तुओं को त्याग दिया। वहीं महिलाओं ने भी गमे हुसैन की याद को ताजा करते हुए तमाम शृंगारों से दूरी बना ली।
मंगलवार शाम को चांद नजर आने के साथ ही शिया सोगवारों की गम की यादें ताजा हो गईं। इस्लामिक कैलेंडर के प्रथम माह मोहर्रम की 1 से 10 तारीख तक शिया संप्रदाय के लोग इमाम हुसैन की शहादत को याद कर गमजदा रहते हैं। शिया संप्रदाय के अनुसार हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन दीन ए इस्लाम की खातिर करबला के मैदान में शहीद हो गए थे। उन्हीं की याद में शिया रात में मजलिस करते हैं, जिसमें हजरत इमाम हुसैन की शहादत का किस्सा बयान किया जाता है। इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम का जुलूस भी निकाला जाता है।
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नगर में शिया संप्रदाय के प्रमुख पूर्व प्रधानाचार्य मुनाजिर हुसैन जैदी ने बताया कि इस वर्ष भी कोरोना संक्रमण के कारण शासन द्वारा जारी गाइडलाइन को देखते हुए मोहर्रम का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। इमामबाड़े में होने वाली मजलिसोें में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा।
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