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कागजों में सुधरी जर्जर आंगनबाड़ियों की सूरत

Thu, 03 Mar 2022 12:14 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 12:14 AM IST
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Appearance of dilapidated Anganwadi centers improved on paper
जर्जर हालत में गांव बाल्लू में आंगनबाड़ी केंद्र और पास में खड़ी घास - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिले में पूरी तरह जर्जर चुके 193 आंगनबाड़ी केंद्रों का सुंदरीकरण एक वर्ष बाद भी नहीं हो सका है। इन केंद्रों को ग्राम पंचायत निधि व मनरेगा के तहत नए भवन बनाए जाने थे। सिर्फ कागजों में ही रूपरेखा तैयार की गई, लेकिन धरातल पर हालत जस की तस है।
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ऐसे में बाल एवं पुष्टाहार विभाग किराए और ग्राम पंचायतों में खाली पड़ी जगहों से केंद्र संचालित कर रहा है। जर्जर केंद्रों की हालत में सुधार के लिए एक वर्ष पूर्व पंचायत राज विभाग और मनरेगा के तहत कार्य कराए जाने की रूपरेखा तैयार की गई, लेकिन सिर्फ कागजों में ही योजना दम तोड़ गई और केंद्रों पर कोई काम नहीं हुआ है।
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खंडहर में हो चुके तब्दील
गांव कवादपुर निवासी ग्रामीण प्रदीप सैनी का कहना है कि गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के लिए भवन बना था, लेकिन आज तक केंद्र संचालित नहीं किया गया। अब यह भवन जर्जर अवस्था में हैं। केंद्रों में ग्रामीण उपले रख रहे हैं। वहीं, ग्राम बाल्लू निवासी रोबिन सिंह का कहना है कि करीब छह वर्ष पूर्व ही गांव के बाहर आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण हुआ था, लेकिन इस केंद्र की स्थिति बदहाल है। इसलिए बच्चों को अभिभावक केंद्र पर भेजते हुए डरते हैं। इसी तरह 193 केंद्रों की हालत खराब है।
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एक नजर आंकड़ों पर
-- 3410 आंगनबाड़ी केंद्र और 3346 हैं कार्यकत्री
-- 385 केंद्र किराए के भवनों में चल रहे और 193 जर्जर हैं
-- कुपोषित बच्चों की संख्या 21 हजार और अत्यंत कुपोषित 1546
-- 30 हजार गर्भवती महिलाएं और 33 हजार धात्री।
बजट मिले तो हो कार्य
जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा का कहना है कि अलग से बजट न होने की वजह से कार्य नहीं हो पाया है। विभाग का प्रयास है कि जल्द आंगनबाड़ी केंद्रों का सुंदरीकरण किया जाए।

उठानी पड़ रही दिक्कत
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी का कहना है कि जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों की वजह से दिक्कत उठानी पड़ रही है। कई बार सुंदरीकरण की मांग कर चुके हैं। इसको लेकर पत्र भी लिख चुके हैं।
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