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सहारनपुर: श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया सालाना जोड़ मेला
Thu, 09 Feb 2023 12:38 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 09 Feb 2023 12:38 AM IST
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सालाना जोड़ मेले में प्रतिभाग करते साध संगत
सरसावा। गुरुद्वारा शहीद बाबा दीप सिंह में सालाना जोड़ मेला श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इसमें दो दिन पूर्व रखे गए अखंड पाठ साहिब का भोग डालने के पश्चात रागी जत्थों ने बाबा दीप सिंह जी का जीवन वृतांत सुनाया।
बुधवार को यूपी हरियाणा सीमा पर ग्राम शाहजहांपुर में स्थित शहीद बाबा दीप सिंह गुरुद्वारा साहिब में सालाना जोड़ मेले में पधारे रागी जत्थे ने संगत को बताया कि अफगान सेना द्वारा स्वर्ण मंदिर साहिब की बेअदबी का बदला लेने के लिए बाबा दीप सिंह ने शपथ ली थी तथा अफगान सेना के साथ युद्ध क्षेत्र में सिर धड़ से अलग होने के बावजूद अपना कटा सिर लेकर स्वर्ण मंदिर साहिब में अर्पित कर दिया था। पंजाब के तरनतारन से आये कविशरी जत्थे ने बाबा दीप सिंह जी के विषय में बताया कि बाबा दीप सिंह जी सिख धर्म के सबसे पूजनीय शहीदों में से एक है। उन्हें सिख गुरुओं की शिक्षाओं के प्रति त्याग और समर्पण के लिए याद किया जाता है।
जोड़ मेले में विशाल लंगर का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाबा गुरदेव सिंह, भाई सरबजीत सिंह भाई निरंजन सिंह, साहब सिंह, बाबा मोहन सिंह, बाबा गुरदेव सिंह कुल्ली वाले, चानन सिंह, सुरेंद्र सिंह लाडी, हरि सिंह, सतनाम सिंह, सुखविंदर सिंह आदि बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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बुधवार को यूपी हरियाणा सीमा पर ग्राम शाहजहांपुर में स्थित शहीद बाबा दीप सिंह गुरुद्वारा साहिब में सालाना जोड़ मेले में पधारे रागी जत्थे ने संगत को बताया कि अफगान सेना द्वारा स्वर्ण मंदिर साहिब की बेअदबी का बदला लेने के लिए बाबा दीप सिंह ने शपथ ली थी तथा अफगान सेना के साथ युद्ध क्षेत्र में सिर धड़ से अलग होने के बावजूद अपना कटा सिर लेकर स्वर्ण मंदिर साहिब में अर्पित कर दिया था। पंजाब के तरनतारन से आये कविशरी जत्थे ने बाबा दीप सिंह जी के विषय में बताया कि बाबा दीप सिंह जी सिख धर्म के सबसे पूजनीय शहीदों में से एक है। उन्हें सिख गुरुओं की शिक्षाओं के प्रति त्याग और समर्पण के लिए याद किया जाता है।
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जोड़ मेले में विशाल लंगर का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाबा गुरदेव सिंह, भाई सरबजीत सिंह भाई निरंजन सिंह, साहब सिंह, बाबा मोहन सिंह, बाबा गुरदेव सिंह कुल्ली वाले, चानन सिंह, सुरेंद्र सिंह लाडी, हरि सिंह, सतनाम सिंह, सुखविंदर सिंह आदि बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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