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गोशालाओं में नहीं हो रहा है पशुओं का गुजारा

Sat, 16 Nov 2019 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 16 Nov 2019 11:51 PM IST
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Animals are not being maintained in cowsheds
चौ चरण सिंह भाकियू जिला अध्यक्ष - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। सरकार की ओर से आवारा गोवंश को गोद लेने पर 900 रुपये प्रति माह देने की घोषणा बजट के अभाव में जिले में बेहाल हो गई है। कहीं पशुओं की संख्या अधिक है तो कहीं व्यवस्था की कमी है। बेजुबानों का पेट तक नहीं सही से भर पा रहा है। गोशालाओं में पशुओं का गुजारा नहीं हो पा रहा है। अभी तक एक भी पशु पालकों को इसका लाभ नहीं मिल सका है। इसके साथ ही गोवंश संरक्षण के लिए बनाई र्गइं गोशालाएं भी बदहाल हैं। इसके चलते सही देखरेख न होने से पशु बीमार पड़ रहे हैं।
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नानौता क्षेत्र के ग्राम भारी दीनदरपुर में जिला पंचायत की ओर से गोशाला का निर्माण करीब एक वर्ष पूर्व कराया गया था। इसमें 48 पशुओं को रखने की क्षमता है, लेकिन फिलहाल 60 पशु यहां रखे गए हैं। पशुओं को खाने के नाम पर मात्र सूखा भूसा दिया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के आवारा पशुओं को यहां रखने का स्थान नहीं है, लेकिन बाहरी पशुओं को लाकर यहां रखा जा रहा है। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। गोशाला में कई पशुओं की हालत ठीक नहीं है। एक गोवंश तो मरणासन्न अवस्था में पहुंच गया है। मौके पर मौजूद जयपाल सिंह ने बताया कि देखरेख के लिए पांच लोग तैनात हैं। इसी क्षेत्र के ग्राम टिकरौल में कान्हा उपवन टिकरौल गोशाला का इसी साल एक मार्च को निर्माण हुआ है। यहां भी पशुओं को खिलाने के लिए केवल भूसा ही है। यहां कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले छह माह से वेतन नहीं मिला है। यहां पर भी दो पशु बीमार व एक पशु मरणासन्न अवस्था में है। एक कर्मचारी ने बताया कि चिकित्सक नियमित आते हैं, लेकिन पशु अधिक होने के कारण सही से सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
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नकुड़ के गांव बहादरपुर में करीब एक वर्ष पूर्व बनी गोशाला में 60 गोवंश मौजूद हैं। ग्राम प्रधान रविंद्र सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से प्रति पशु मात्र 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं, जबकि हकीकत में एक पशु पर प्रतिदिन करीब दो सौ रुपये का खर्च आता है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से अभी तक करीब दस लाख रुपये दिए गए हैं, जबकि निर्माण कार्य से लेकर अभी तक बीस लाख रुपये का खर्च आ चुका है। उन्होंने बताया कि बाकी का पैसा गोभक्तों द्वारा दान दिया गया है। ग्राम प्रधान ने बताया कि गोशाला में करीब चालीस पशु बांधे जाने की क्षमता है और इसमें मजबूरन 60 गोवंश बांधे जा रहे हैं। रामपुर मनिहारान के नंदपुर की गोशाला में 51 पशु हैं। प्रधान महिपाल सैनी ने बताया कि सरकार की तरफ से प्रति पशु मिलने वाले तीस रुपये रोज में चारा, चोकर, खल और देखभाल करने वाले का वेतन भी शामिल है। ऐसे में दान ना मिले तो पशुओं का पेट भरना भी मुश्किल हो जाता है।
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- एक पशु के लिए डेढ़ सौ रुपये प्रतिदिन दे सरकार
भाकियू के जिला अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह कहते हैं कि किसान को आवारा गोवंश लेने पर 30 रुपये प्रतिदिन देने की सरकार की योजना अव्यवहारिक है। पशु को गोद लेने पर उसके लिए केवल चारा ही नहीं, बल्कि उसे रखने के लिए जगह, टीन शेड, बीमार होने पर दवाई का भी खर्च आता है। ऐसे में इस राशि को बढ़ा कर कम से कम डेढ़ सौ रुपये प्रतिदिन किया जाए ताकि किसान योजना में शामिल होने को लेकर प्रोत्साहित हो।

नानौता के टिकरौल की गौशाला में मौजूद गौवंश

नानौता के टिकरौल की गौशाला में मौजूद गौवंश- फोटो : SAHARANPUR

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