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सभी प्राइवेट अस्पतालों की होगी जांच, नोडल अधिकारी नियुक्त
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सहारनपुर। फर्जी चिकित्सक के पकड़े जाने के बाद से चिकित्सा विभाग जनपद के सभी प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच कराने जा रहा है। इसके लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त कर दिया गया है, साथ ही जिले भर के सरकारी अस्पतालों में संविदा पर काम कर रहे डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के प्रमाणपत्रों की भी अब जांच होगी।
देवबंद में राजेश शर्मा उर्फ महीपाल द्वारा अन्य चिकित्सक के प्रमाणपत्रों पर डॉक्टरी करने का खुलासा होने के बाद चिकित्सा विभाग हरकत में आ गया है। सीएमओ डॉक्टर बीएस सोढ़ी ने बताया कि विभाग जिले भर के प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच करा रहा है। जांच में अस्पतालों और क्लीनिकों के लाइसेंस, उनमें तैनात डॉक्टरों की डिग्रियों, स्टाफ की योग्यता आदि की पड़ताल की जाएगी। मानकों के अनुरूप अस्पतालों की संचालन हो रहा है या नहीं यह भी देखा जाएगा। इसके अलावा जिला अस्पताल के साथ ही सभी सीएचसी और पीएचसी पर तैनात संविदा चिकित्सकों और कर्मचारियों के भी शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी।
पत्नी के अभिलेखों की जांच
सीएमओ ने बताया कि देवबंद में पकड़े गए फर्जी चिकित्सक की पत्नी के भी प्रमाणपत्रों की जांच कराई जा रही है। गौरतलब है कि पकड़ा गया फर्जी चिकित्सक पत्नी के साथ मिलकर निजी अस्पताल चला रहा था। पत्नी ने भी पति की तरह अस्पताल पर लगे बोर्ड पर डॉक्टरी की डिग्रियां दर्शाई हुई हैं।
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डॉक्टर से होगी रिकवरी
चिकित्सा विभाग फर्जी चिकित्सक से सभी तरह की रिकवरी करने की तैयारी में है। सीएमओ ने बताया कि उक्त फर्जी डॉक्टर 14 लाख रुपये आयुष्मान योजना के इलाज के नाम पर ले चुका है। इसके अलावा वह कई साल संविदा पर सरकारी अस्पताल से जुड़ा रहा है। सभी तरह के पैसे की रिकवरी कराई जाएगी। आरोपी के अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर का लाइसेंस निरस्त किया जा चुका है।
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देवबंद में राजेश शर्मा उर्फ महीपाल द्वारा अन्य चिकित्सक के प्रमाणपत्रों पर डॉक्टरी करने का खुलासा होने के बाद चिकित्सा विभाग हरकत में आ गया है। सीएमओ डॉक्टर बीएस सोढ़ी ने बताया कि विभाग जिले भर के प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच करा रहा है। जांच में अस्पतालों और क्लीनिकों के लाइसेंस, उनमें तैनात डॉक्टरों की डिग्रियों, स्टाफ की योग्यता आदि की पड़ताल की जाएगी। मानकों के अनुरूप अस्पतालों की संचालन हो रहा है या नहीं यह भी देखा जाएगा। इसके अलावा जिला अस्पताल के साथ ही सभी सीएचसी और पीएचसी पर तैनात संविदा चिकित्सकों और कर्मचारियों के भी शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी।
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पत्नी के अभिलेखों की जांच
सीएमओ ने बताया कि देवबंद में पकड़े गए फर्जी चिकित्सक की पत्नी के भी प्रमाणपत्रों की जांच कराई जा रही है। गौरतलब है कि पकड़ा गया फर्जी चिकित्सक पत्नी के साथ मिलकर निजी अस्पताल चला रहा था। पत्नी ने भी पति की तरह अस्पताल पर लगे बोर्ड पर डॉक्टरी की डिग्रियां दर्शाई हुई हैं।
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डॉक्टर से होगी रिकवरी
चिकित्सा विभाग फर्जी चिकित्सक से सभी तरह की रिकवरी करने की तैयारी में है। सीएमओ ने बताया कि उक्त फर्जी डॉक्टर 14 लाख रुपये आयुष्मान योजना के इलाज के नाम पर ले चुका है। इसके अलावा वह कई साल संविदा पर सरकारी अस्पताल से जुड़ा रहा है। सभी तरह के पैसे की रिकवरी कराई जाएगी। आरोपी के अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर का लाइसेंस निरस्त किया जा चुका है।