{"_id":"595fd4344f1c1b61268b45b6","slug":"a-raw-and-a-solid-furnace-found-in-excavation","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्खनन में मिली एक कच्ची व एक पक्की भट्ठी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्खनन में मिली एक कच्ची व एक पक्की भट्ठी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 08 Jul 2017 12:09 AM IST
विज्ञापन
खनन में मिला सामान दिखाते पुरातत्वविद।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर के रामपुर मनिहारान के गांव सकतपुर में पुरातत्व विभाग द्वारा किए जा रहे उत्खनन के दौरान मिली एक भट्टी के बाद दो भट्टी और मिली हैं। इसमें एक कच्ची व दो भट्टी पक्की हैं।
पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि पक्की भट्टियों का इस्तेमाल धातु को पिघलाने के लिए किया जाता रहा होगा। 24 फरवरी से गांव सकतपुर में आगरा उप मंडल पुरातत्व विभाग की टीम पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व में उत्खनन किया जा रहा है।
शुक्रवार को 133 दिन पूरे हो चुके हैं। पंद्रह दिन पूर्व एक ट्रैंच में कच्ची भट्टी का आकार मिला था। अब दो अन्य भट्टी और मिली है जो पक्की हैं। इनका निर्माण विशेष प्रकार से चूने जैसी वस्तु से किया गया है।
विज्ञापन
मौके पर मौजूद पुरातत्व विशेषज्ञ डा. अर्खित प्रधान ने अमर उजाला को बताया कि अब तक यही कहा जा सकता है कि पक्की भट्टी का इस्तेमाल धातु को पिघलाने तथा कच्ची भट्टी का इस्तेमाल मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए किया जाता रहा होगा।
उन्होंने कहा कि उत्खनन में मिली भट्टी को पूर्ण रूप से सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है। एक ट्रैंच से भी तीन मीटर की गहराई से मिट्टी के बर्तनों के अवशेष सामने आए हैं।
सभी ट्रैंचों पर चल रही खुदाई में एक अन्य ट्रैंच से बड़ा पत्थर का आकार सामने आया है, जिसे देखकर अभी यही कहा जा सकता है कि यह सिल बट्टा है। इससे पूर्व भी एक सिल बट्टा उत्खनन में प्राप्त हो चुका है।
पूर्ण जानकारी शोध के बाद पता चलेगी। अब तक मिली सभी पौराणिक वस्तुएं चार हजार वर्ष पूर्व की हैं, जिसकी पुष्टि शोध में हो चुकी है। अर्खित प्रधान ने कहा कि उनका उत्खनन 12 जुलाई तक जारी रहेगा।
वर्षा काल बीत जाने के बाद एक बार फिर से उत्खनन का कार्य शुरू किया जा सकता है। इस उत्खनन से सहारनपुर का नाम विश्वपटल पर इतिहास के पन्नों में आ गया है।
पुरातत्व विशेषज्ञों ने गांव सकतपुर में उत्खनन की समाचार पत्र में कवरेज के लिए अमर उजाला का आभार व्यक्त किया है। इस मौके पर शोध छात्र हिमांशु कुमार व विभाग के फोटो ग्राफर भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि पक्की भट्टियों का इस्तेमाल धातु को पिघलाने के लिए किया जाता रहा होगा। 24 फरवरी से गांव सकतपुर में आगरा उप मंडल पुरातत्व विभाग की टीम पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व में उत्खनन किया जा रहा है।
विज्ञापन
शुक्रवार को 133 दिन पूरे हो चुके हैं। पंद्रह दिन पूर्व एक ट्रैंच में कच्ची भट्टी का आकार मिला था। अब दो अन्य भट्टी और मिली है जो पक्की हैं। इनका निर्माण विशेष प्रकार से चूने जैसी वस्तु से किया गया है।
विज्ञापन
मौके पर मौजूद पुरातत्व विशेषज्ञ डा. अर्खित प्रधान ने अमर उजाला को बताया कि अब तक यही कहा जा सकता है कि पक्की भट्टी का इस्तेमाल धातु को पिघलाने तथा कच्ची भट्टी का इस्तेमाल मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए किया जाता रहा होगा।
उन्होंने कहा कि उत्खनन में मिली भट्टी को पूर्ण रूप से सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है। एक ट्रैंच से भी तीन मीटर की गहराई से मिट्टी के बर्तनों के अवशेष सामने आए हैं।
सभी ट्रैंचों पर चल रही खुदाई में एक अन्य ट्रैंच से बड़ा पत्थर का आकार सामने आया है, जिसे देखकर अभी यही कहा जा सकता है कि यह सिल बट्टा है। इससे पूर्व भी एक सिल बट्टा उत्खनन में प्राप्त हो चुका है।
पूर्ण जानकारी शोध के बाद पता चलेगी। अब तक मिली सभी पौराणिक वस्तुएं चार हजार वर्ष पूर्व की हैं, जिसकी पुष्टि शोध में हो चुकी है। अर्खित प्रधान ने कहा कि उनका उत्खनन 12 जुलाई तक जारी रहेगा।
वर्षा काल बीत जाने के बाद एक बार फिर से उत्खनन का कार्य शुरू किया जा सकता है। इस उत्खनन से सहारनपुर का नाम विश्वपटल पर इतिहास के पन्नों में आ गया है।
पुरातत्व विशेषज्ञों ने गांव सकतपुर में उत्खनन की समाचार पत्र में कवरेज के लिए अमर उजाला का आभार व्यक्त किया है। इस मौके पर शोध छात्र हिमांशु कुमार व विभाग के फोटो ग्राफर भी मौजूद रहे।