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रमजान 2020: जान बूझकर रोजा छोड़ने वाला अल्लाह से करता है बगावत का एलान

Wed, 29 Apr 2020 11:03 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवबंद (सहारनपुर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवबंद (सहारनपुर) Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 29 Apr 2020 11:03 PM IST
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A person who intentionally leaves Rosa proclaims rebellion to Allah
मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर - फोटो : DEVBAND

रमजान की अहमियत पर रोशनी डालते हुए दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा की रमजान में हर इबादत और नेक अमल का सवाब बढ़ा दिया जाता है और बंदा-ए-मोमिन की हर नेकी के बदले में इजाफा हो जाता है।

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मौलाना ने कहा कि रमजान माह में तीन हिस्से हैं और हर हिस्से का नाम दिया गया है। पहले हिस्से को जो 10 दिन का है उसे रहमत कहा जाता है, दूसरा हिस्सा जो रमजान की 11 तारीख से 20 तक होता है उसे मगफिरत कहा जाता है और तीसरा हिस्सा जो 21 से शुरू होकर 30 को खत्म होता है उसे जहन्नुम से आजादी का हिस्सा कहा जाता है।
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उन्होंने कहा कि अगर कोई शख्स रोजा नहीं रखता और जान बूझकर ऐसा करता है तो वो खुदा से बगावत का एलान करता है और अल्लाह ऐसे बागियों को सजा देता है। कहा कि जो लोग चाहते हैं कि वे दुनिया और दूसरी दुनिया में आराम की जिंदगी गुजारें वो सिर्फ रमजान ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी अल्लाह के हुक्म की तामील करे।

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