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जान जोखिम में डालकर किया सफर
Saharanpur
Updated Sun, 26 Oct 2014 05:32 AM IST
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सहारनपुर। भैया दूज पर तिलक के लिए एक दूसरे के पास पहुंचने के लिए भाइयों-बहनों ने जान जोखिम में डालकर सफर किया। ट्रेनों और बसों में यात्रियों का इतना हुजूम उमड़ा कि सुबह से रात तक यात्रियों को तमाम खतरे उठाकर सफर करने को मजबूर होना पड़ा। ट्रेनों के 72 यात्रियों वाले कोच में डेढ़ सौ यात्रियों ने सफर किया। कोई खिड़की पर लटका तो कोई दूसरे का हाथ पकड़कर झूलते हुए गंतव्य तक पहुंचा। महिलाओं और बच्चों का तो इतना बुरा हाल रहा कि उन्हें सफर का एक-एक मिनट भारी पड़ा। बसों में भी अंदर से लेकर छतों तक यात्रियों की भीड़ रही। देहाती क्षेत्रों में टेंपो, जुगाड़, मैजिक सहित अन्य वाहनों में बुरा हाल रहा।
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो, तीन और चार का हाल तो यह रहा कि सुबह से रात तक तीन से चार हजार यात्री एक साथ ट्रेनों के लिए इंतजार करते नजर आए। भैया दूज के साथ ही छठ के लिए घर जाने वाले यात्रियों के कारण भी भीड़ अधिक रही। ट्रेनों के कोच खचाखच भरे होने से जीआरपी को चेकिंग करना मुश्किल हो गया। टिकट परीक्षकों की भी यात्रियों की जांच करने की हिम्मत नहीं हो पाई। प्लेटफार्म भी खचाखच भरे रहे। यात्री ट्रेन के कोच में घुसने और अंदर खड़े होने तक के लिए जूझते रहे और उलझते रहे। जीआरपी कुछ जगहों तक ही यात्रियों की निगरानी कर सकी। ट्रेनों में जल्दी घुसकर सीट पाने के चक्कर में कई यात्री खतरा मोल लेते हुए पटरियां पार कर दूसरी तरफ भी पहुंचे।
कम पड़ गई स्पेशल ट्रेनें
रेलवे स्टेशन पर सहारनपुर से हरिद्वार, शामली, मेरठ और अंबाला की ओर जाने वाले यात्रियों की भीड़ अधिक रही। त्योहारों को देखते हुए रेलवे ने कुछ स्पेशल ट्रेनों का संचालन भी किया, लेकिन यात्रियों की भीड़ के आगे ये ट्रेनें कम पड़ गईं। स्टेशन अधीक्षक अरविंद शर्मा ने बताया कि त्योहारी सीजन की भीड़ होने के कारण गाड़ियों में यह मारमारी रही।
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आरक्षित कोचों में महिलाओं को नहीं मिली जगह
अधिकतर ट्रेनों में महिला कोचों की हालत भी खराब रही। इन कोचों में सफर की कोशिश करने वाली महिलाएं पुरुष यात्रियों की भीड़ देखकर दंग रह गईं। महिलाओं की गुहार पर भी किसी ने सीटें नहीं छोड़ीं। मजबूरन उन्हें जिस कोच में जितनी जगह मिली, उसी में संघर्ष करते हुए सफर किया। बच्चों के साथ ट्रेनों में चढ़ना किसी पहाड़ पर पढ़ने जैसा रहा। ट्रेन में चढ़ने के लिए जूझ रहीं कुछ महिलाओं ने कहा कि त्योहारों पर ट्रेनों में महिला कोच बढ़ाने चाहिएं और उसमें अन्य यात्रियों को प्रवेश नहीं करने देना चाहिए।
बसों के फेरे बढ़ाने से भी राहत नहीं
रोडवेज ने दिवाली के दिन से ही बसों के फेरे बढ़ा दिए, लेकिन शनिवार को भैया दूज पर यात्रियों की भीड़ से इनसे भी खास राहत नहीं मिली। सबसे बुरा हाल सहारनपुर दिल्ली हाईवे पर सफर करने वालों का रहा। इस रूट पर कम बसें और उनके दूसरे रास्ते से निकलने के कारण यात्रियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। देहाती क्षेत्रों में निजी बसें भी यात्रियों से फुल रहीं। बसों की छत पर भी यात्री नजर आए। बीच रास्तों में कई स्थानों पर बसें न रोकने से यात्रियों को घंटों इंतजार कर अन्य जुगाड़ वाहनों से जाना पड़ा।
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो, तीन और चार का हाल तो यह रहा कि सुबह से रात तक तीन से चार हजार यात्री एक साथ ट्रेनों के लिए इंतजार करते नजर आए। भैया दूज के साथ ही छठ के लिए घर जाने वाले यात्रियों के कारण भी भीड़ अधिक रही। ट्रेनों के कोच खचाखच भरे होने से जीआरपी को चेकिंग करना मुश्किल हो गया। टिकट परीक्षकों की भी यात्रियों की जांच करने की हिम्मत नहीं हो पाई। प्लेटफार्म भी खचाखच भरे रहे। यात्री ट्रेन के कोच में घुसने और अंदर खड़े होने तक के लिए जूझते रहे और उलझते रहे। जीआरपी कुछ जगहों तक ही यात्रियों की निगरानी कर सकी। ट्रेनों में जल्दी घुसकर सीट पाने के चक्कर में कई यात्री खतरा मोल लेते हुए पटरियां पार कर दूसरी तरफ भी पहुंचे।
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कम पड़ गई स्पेशल ट्रेनें
रेलवे स्टेशन पर सहारनपुर से हरिद्वार, शामली, मेरठ और अंबाला की ओर जाने वाले यात्रियों की भीड़ अधिक रही। त्योहारों को देखते हुए रेलवे ने कुछ स्पेशल ट्रेनों का संचालन भी किया, लेकिन यात्रियों की भीड़ के आगे ये ट्रेनें कम पड़ गईं। स्टेशन अधीक्षक अरविंद शर्मा ने बताया कि त्योहारी सीजन की भीड़ होने के कारण गाड़ियों में यह मारमारी रही।
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आरक्षित कोचों में महिलाओं को नहीं मिली जगह
अधिकतर ट्रेनों में महिला कोचों की हालत भी खराब रही। इन कोचों में सफर की कोशिश करने वाली महिलाएं पुरुष यात्रियों की भीड़ देखकर दंग रह गईं। महिलाओं की गुहार पर भी किसी ने सीटें नहीं छोड़ीं। मजबूरन उन्हें जिस कोच में जितनी जगह मिली, उसी में संघर्ष करते हुए सफर किया। बच्चों के साथ ट्रेनों में चढ़ना किसी पहाड़ पर पढ़ने जैसा रहा। ट्रेन में चढ़ने के लिए जूझ रहीं कुछ महिलाओं ने कहा कि त्योहारों पर ट्रेनों में महिला कोच बढ़ाने चाहिएं और उसमें अन्य यात्रियों को प्रवेश नहीं करने देना चाहिए।
बसों के फेरे बढ़ाने से भी राहत नहीं
रोडवेज ने दिवाली के दिन से ही बसों के फेरे बढ़ा दिए, लेकिन शनिवार को भैया दूज पर यात्रियों की भीड़ से इनसे भी खास राहत नहीं मिली। सबसे बुरा हाल सहारनपुर दिल्ली हाईवे पर सफर करने वालों का रहा। इस रूट पर कम बसें और उनके दूसरे रास्ते से निकलने के कारण यात्रियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। देहाती क्षेत्रों में निजी बसें भी यात्रियों से फुल रहीं। बसों की छत पर भी यात्री नजर आए। बीच रास्तों में कई स्थानों पर बसें न रोकने से यात्रियों को घंटों इंतजार कर अन्य जुगाड़ वाहनों से जाना पड़ा।