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ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर नदी की खुदाई शुरू कराई
Updated Tue, 31 Jul 2018 12:29 AM IST
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ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर सिंधली नदी की खोदाई शुरू कराई
लखनौती (सहारनपुर)। बारिश के रुकने के बाद भी निचले हिस्सों में स्थित खेतों में पानी नहीं सूख पाया है। करीब चार हजार बीघा फसलें जलमग्न हैं। प्रशासन से कोई मदद मिलती न देख ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर स्वयं ही सिंधली नदी में जेसीबी मशीन से खोदाई करवानी शुरू कर दी है।
तीन दिन तक लगातार हुई बारिश के बाद भी खेतों से ओवरफ्लो होकर बारिश के पानी ने आलमपुर, हरनामगढ़, लखनौती, सुखेड़ी आदि गांवों की करीब चार हजार बीघा खेतों का रकबा जलमग्न कर दिया है। उधर, यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर और सरसावा, चिलकाना क्षेत्र के गांवों में घुसा पानी भी इसी नदी से होकर गुजरा है। किसानों को यह भी भय सता रहा है कि यदि फिर बारिश हुई और यह पानी आ गया तो उनकी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। यमुना नदी की सहायक नदियां सिंधली और बूढ़ी नदी से होकर यह ओवरफ्लो पानी आगे चला जाता था। लेकिन इन नदियों को समतल कर किसानों ने खेती करनी शुरू कर दी है। इसी का दुष्परिणाम है कि खेतों में बारिश का पानी ज्यों का त्यों रुका पड़ा है। फसलों को पानी से नुकसान होता देख किसानों ने स्वयं ही जेसीबी मशीन से सिंधली नदी को खुदवाना शुरू कर दिया है ताकि खेतों में भरे पानी को आगे निकाला जा सके।
गांव के रूपचंद, नूर हसन, सालीम, शाहदीन, आरिफ, रूमाला, जगीर, सोरण, ज्ञान सिंह, आलिम, सलोखा आदि किसानों ने बताया कि प्रशासन से नदी को खुदवाने की मांग की थी। लेकिन कोई मदद नहीं मिल सकी। इसलिए पैसा एकत्रित कर स्वयं के खर्च पर जेसीबी मशीन से खुदाई करवा रहे हैं। उधर, नकुड़ एसडीएम युगराज सिंह का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। वे जानकारी प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
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लखनौती (सहारनपुर)। बारिश के रुकने के बाद भी निचले हिस्सों में स्थित खेतों में पानी नहीं सूख पाया है। करीब चार हजार बीघा फसलें जलमग्न हैं। प्रशासन से कोई मदद मिलती न देख ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर स्वयं ही सिंधली नदी में जेसीबी मशीन से खोदाई करवानी शुरू कर दी है।
तीन दिन तक लगातार हुई बारिश के बाद भी खेतों से ओवरफ्लो होकर बारिश के पानी ने आलमपुर, हरनामगढ़, लखनौती, सुखेड़ी आदि गांवों की करीब चार हजार बीघा खेतों का रकबा जलमग्न कर दिया है। उधर, यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर और सरसावा, चिलकाना क्षेत्र के गांवों में घुसा पानी भी इसी नदी से होकर गुजरा है। किसानों को यह भी भय सता रहा है कि यदि फिर बारिश हुई और यह पानी आ गया तो उनकी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। यमुना नदी की सहायक नदियां सिंधली और बूढ़ी नदी से होकर यह ओवरफ्लो पानी आगे चला जाता था। लेकिन इन नदियों को समतल कर किसानों ने खेती करनी शुरू कर दी है। इसी का दुष्परिणाम है कि खेतों में बारिश का पानी ज्यों का त्यों रुका पड़ा है। फसलों को पानी से नुकसान होता देख किसानों ने स्वयं ही जेसीबी मशीन से सिंधली नदी को खुदवाना शुरू कर दिया है ताकि खेतों में भरे पानी को आगे निकाला जा सके।
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गांव के रूपचंद, नूर हसन, सालीम, शाहदीन, आरिफ, रूमाला, जगीर, सोरण, ज्ञान सिंह, आलिम, सलोखा आदि किसानों ने बताया कि प्रशासन से नदी को खुदवाने की मांग की थी। लेकिन कोई मदद नहीं मिल सकी। इसलिए पैसा एकत्रित कर स्वयं के खर्च पर जेसीबी मशीन से खुदाई करवा रहे हैं। उधर, नकुड़ एसडीएम युगराज सिंह का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। वे जानकारी प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
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