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कैबिनेट के फैसले से बढ़ेगा वुड क्राफ्ट उद्योग का हौसला
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सहारनपुर। एक जनपद एक उत्पाद के तहत हस्त शिल्पियों को आर्थिक मदद करने के प्रदेश सरकार के निर्णय से वुड कार्विंग से जुडे़ कारोबारियों में हर्ष है। उनका कहना है कि जो निर्णय कैबिनेट में लिए गए हैं उनके लागू होने से शिल्पियों को फायदा होगा। इसके लागू होने से काफी दिनों से मंदी का शिकार इस कारोबार को पंख लग जाएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में हस्त शिल्पियों के उत्पाद बेचने आदि में सहयोग और आर्थिक मदद करने के निर्णय का वुड कार्विंग से जुडे़ कारोबारियों ने स्वागत किया है। कैबिनेट ने हस्त शिल्पियों के उत्पादों को देश विदेश में विपणन प्रोत्साहन देने, राज्य में लगने वाले मेले एवं प्रदर्शनी में स्टाल चार्ज का 75 प्रतिशत अनुदान देने, ढुलाई भाडे़ में अनुदान देने आदि का निर्णय लिया है। हैंडीक्राफ्टस आर्टीजन एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष इकबाल एमए का कहना है कि राज्य सरकार के इन निर्णय से हस्त शिल्पियों को फायदा होगा। इस तरह के निर्णयों से हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि हमारे यहां करीब 15 सौ से 16 सौ करोड़ रुपये का वुड कार्विंग से जुड़ा कारोबार होता है। इसमें एक्सपोर्ट भी शामिल हैं। जनपद के करीब 85 हजार से अधिक लोग इससे कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुडे़ हुए हैं। यहां से अधिकतर निर्यात अमेरिका, यूरोपीय देशों, सउदी अरब, दुबई, जापान आदि देशों को होता है। हैंडीक्राफ्ट वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष आरिफ खान का कहना है कि हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए सरकार ओर अधिक ठोस निर्णय लेने होंगे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां का लकड़ी का हस्तशिल्प पूरी दुनिया में मशहूर है। सिर्फ विदेशों में ही नहीं देश के हर कोने में यहां की वुड कार्विंग के मुरीद हैं। उनका कहना है कि यदि कैबिनेट के फैसले पर वास्तव में पूरी तरह से अमल हो तो हस्त शिल्पियों को काफी लाभ होगा।
वुडकार्विंग उद्योग एक नजर में
- एक लाख से अधिक कारीगर।
- 1250 से अधिक कारखाने।
- 500 से अधिक रिटेल शोरूम।
- करीब 300 एक्सपोर्टर।
- 1600 करोड़ का सालाना टर्नओवर।
- एक्सपोर्ट होने वाले सामान में 30 फीसदी यूएसए और शेष बाकी दुनिया में जाता है।
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उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में हस्त शिल्पियों के उत्पाद बेचने आदि में सहयोग और आर्थिक मदद करने के निर्णय का वुड कार्विंग से जुडे़ कारोबारियों ने स्वागत किया है। कैबिनेट ने हस्त शिल्पियों के उत्पादों को देश विदेश में विपणन प्रोत्साहन देने, राज्य में लगने वाले मेले एवं प्रदर्शनी में स्टाल चार्ज का 75 प्रतिशत अनुदान देने, ढुलाई भाडे़ में अनुदान देने आदि का निर्णय लिया है। हैंडीक्राफ्टस आर्टीजन एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष इकबाल एमए का कहना है कि राज्य सरकार के इन निर्णय से हस्त शिल्पियों को फायदा होगा। इस तरह के निर्णयों से हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि हमारे यहां करीब 15 सौ से 16 सौ करोड़ रुपये का वुड कार्विंग से जुड़ा कारोबार होता है। इसमें एक्सपोर्ट भी शामिल हैं। जनपद के करीब 85 हजार से अधिक लोग इससे कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुडे़ हुए हैं। यहां से अधिकतर निर्यात अमेरिका, यूरोपीय देशों, सउदी अरब, दुबई, जापान आदि देशों को होता है। हैंडीक्राफ्ट वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष आरिफ खान का कहना है कि हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए सरकार ओर अधिक ठोस निर्णय लेने होंगे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां का लकड़ी का हस्तशिल्प पूरी दुनिया में मशहूर है। सिर्फ विदेशों में ही नहीं देश के हर कोने में यहां की वुड कार्विंग के मुरीद हैं। उनका कहना है कि यदि कैबिनेट के फैसले पर वास्तव में पूरी तरह से अमल हो तो हस्त शिल्पियों को काफी लाभ होगा।
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वुडकार्विंग उद्योग एक नजर में
- एक लाख से अधिक कारीगर।
- 1250 से अधिक कारखाने।
- 500 से अधिक रिटेल शोरूम।
- करीब 300 एक्सपोर्टर।
- 1600 करोड़ का सालाना टर्नओवर।
- एक्सपोर्ट होने वाले सामान में 30 फीसदी यूएसए और शेष बाकी दुनिया में जाता है।