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ज लोया को इंसाफ नहीं मिला तो जनता को कैसे इंसाफ दिलाएगी सीबीआई सिद्दीकी
Updated Sat, 21 Apr 2018 12:44 AM IST
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देवबंद। विशेष सीबीआई जज बीएच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जांच से इंकार करके बहुत से सवाल खड़े कर दिए हैं।
शुक्रवार को जारी बयान में मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि जज लोया के साथ उनके दो साथियों की भी मौत हुई है। उनकी मौत को शक के दायरे में रखकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस मामले की जांच कराने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने जांच की मांग को नजर अंदाज करके सबको हैरत में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने जज लोया की मौत की जांच कराने से इंकार करके बहुत से सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे राजनीतिक दलों के अलावा जनता में सख्त नाराजगी पैदा हुई है। कहा कि जजों ने इस विवादास्पद मौत पर जो दलील पेश की है उसकी जरूरत नहीं थी। उन्होंने मामले को दूसरा रुख देकर याचिकाकर्ताओं की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सिद्दीकी ने कहा कि जस्टिस लोया की मौत शुरु से ही शक के दायरे में है, लेकिन अदालत ने जांच की मांग को ठुकराते हुए नये नये सवाल पैदा कर दिए हैं। साथ ही कहा कि अगर इस मुल्क में सीबीआई के एक जज को इंसाफ नहीं मिल सकता तो सीबीआई जनता को इंसाफ कैसे दिला सकती है।
मौलाना महमूद मदनी ने जस्टिस सच्चर के निधन पर दुख जताया
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ने न्यायमूर्ति राजेंद्र सिंह सच्चर के निधन पर दुख का इजहार करते हुए कहा कि जस्टिस सच्चर ने जज के तौर पर अदालत की प्रतिष्ठा बढ़ाई और रिटायरमेंट के बाद उत्पीड़ित व पिछडे़ वर्गों के अधिकारों के लिए लड़े।
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शुक्रवार को जारी किए गए बयान में मौलाना मदनी ने कहा कि जस्टिस सच्चर का मूल्यवान कार्य यह है कि उन्होंने वर्ष 2005 में मुसलमानों की शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर दस्तावेज और सिफारिश तैयार की। उनके द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज उन तथ्यों पर आधारित थे जो जमीयत उलमा-ए-हिंद वर्षों से कह रही थी। इसलिए जमीयत ने हमेशा अपनी मीटिंगों में सच्चर समिति की सिफारिशों पर प्रकाश डाला।
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शुक्रवार को जारी बयान में मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि जज लोया के साथ उनके दो साथियों की भी मौत हुई है। उनकी मौत को शक के दायरे में रखकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस मामले की जांच कराने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने जांच की मांग को नजर अंदाज करके सबको हैरत में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने जज लोया की मौत की जांच कराने से इंकार करके बहुत से सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे राजनीतिक दलों के अलावा जनता में सख्त नाराजगी पैदा हुई है। कहा कि जजों ने इस विवादास्पद मौत पर जो दलील पेश की है उसकी जरूरत नहीं थी। उन्होंने मामले को दूसरा रुख देकर याचिकाकर्ताओं की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सिद्दीकी ने कहा कि जस्टिस लोया की मौत शुरु से ही शक के दायरे में है, लेकिन अदालत ने जांच की मांग को ठुकराते हुए नये नये सवाल पैदा कर दिए हैं। साथ ही कहा कि अगर इस मुल्क में सीबीआई के एक जज को इंसाफ नहीं मिल सकता तो सीबीआई जनता को इंसाफ कैसे दिला सकती है।
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मौलाना महमूद मदनी ने जस्टिस सच्चर के निधन पर दुख जताया
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ने न्यायमूर्ति राजेंद्र सिंह सच्चर के निधन पर दुख का इजहार करते हुए कहा कि जस्टिस सच्चर ने जज के तौर पर अदालत की प्रतिष्ठा बढ़ाई और रिटायरमेंट के बाद उत्पीड़ित व पिछडे़ वर्गों के अधिकारों के लिए लड़े।
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शुक्रवार को जारी किए गए बयान में मौलाना मदनी ने कहा कि जस्टिस सच्चर का मूल्यवान कार्य यह है कि उन्होंने वर्ष 2005 में मुसलमानों की शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर दस्तावेज और सिफारिश तैयार की। उनके द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज उन तथ्यों पर आधारित थे जो जमीयत उलमा-ए-हिंद वर्षों से कह रही थी। इसलिए जमीयत ने हमेशा अपनी मीटिंगों में सच्चर समिति की सिफारिशों पर प्रकाश डाला।