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प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ में छिड़ी वर्चस्व की जंग
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प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ में छिड़ी वर्चस्व की जंग
सहारनपुर। प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ में वर्चस्व की लड़ाई छिड़ गई है। जिलाध्यक्ष डॉक्टर एके चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करने के बाद संगठन से जुड़े चिकित्साधिकारी और चिकित्सक दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। कई चिकित्सकों ने डॉक्टर एके चौधरी को हटाने में शामिल होने से भी इंकार किया है।
प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ की ओर से 11 जनवरी को विज्ञप्ति जारी की गई थी। इसमें अनेक पदाधिकारियों और सदस्यों की उपस्थिति का दावा किया गया था। बैठक में डॉक्टर एके चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटाने की बात कही गई थी। साथ ही डॉक्टर केशव स्वामी को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। संगठन की ओर से जिन चिकित्सकों का बैठक में उपस्थित होना और बैठक को संबोधित करना दर्शाया गया था। उनमें से अनेक चिकित्सकों ने अविश्वास प्रस्ताव पास करने में शामिल होने से इंकार कर दिया है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है कि उनके द्वारा डॉक्टर एके चौधरी के खिलाफ कोई शब्द नहीं कहे गए हैं। वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. आरके टंडन और डॉ. अनिल कुमार ने अपनी उपस्थिति की तो बात कही है। मगर उनका कहना है कि बैठक में उनके द्वारा कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं रखा गया।
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उधर, डॉक्टर एके चौधरी का कहना है कि जनपद में संगठन के करीब 70 सदस्य हैं, मगर चंद चिकित्सकों ने मनमाने तरीके से बैठक कर उन्हें हटाया है, जिसे वह नहीं मानते हैं। दावा किया है कि ज्यादातर पदाधिकारी और सदस्य उनके साथ हैं। 11 जनवरी को विज्ञप्ति जारी करने वाले संघ सचिव डॉक्टर केवी सिंह का कहना है कि 11 जनवरी को पूरी प्रक्रिया के तहत डॉ. चौधरी को हटाया गया था। मगर हम भी आपस में कोई मतभेद नहीं चाहते हैं। जल्द ही एक साझा बैठक बुलाकर आपसी मतभेदों को दूर किया जाएगा और जो भी संगठन व चिकित्सकों के हित में होगा किया जाएगा।
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मैंने दोनों पक्षों को बैठाकर करीब दो घंटे बात की है। दोनों पक्षों में कोई भी गलत नहीं है। बस कुछ गलतफहमी थी। उन्हें दूर कर लिया गया है। बैठक में डॉक्टर केशव स्वामी को संरक्षक मंडल में रखने और डॉक्टर एके चौधरी को जिलाध्यक्ष बनाए रखने पर सहमति बनी है। साथ ही सचिव पद पर डॉक्टर केवी सिंह ही रहेंगे। -- डॉक्टर एसके वार्ष्णेय, सीएमएस।
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सहारनपुर। प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ में वर्चस्व की लड़ाई छिड़ गई है। जिलाध्यक्ष डॉक्टर एके चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करने के बाद संगठन से जुड़े चिकित्साधिकारी और चिकित्सक दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। कई चिकित्सकों ने डॉक्टर एके चौधरी को हटाने में शामिल होने से भी इंकार किया है।
प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ की ओर से 11 जनवरी को विज्ञप्ति जारी की गई थी। इसमें अनेक पदाधिकारियों और सदस्यों की उपस्थिति का दावा किया गया था। बैठक में डॉक्टर एके चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटाने की बात कही गई थी। साथ ही डॉक्टर केशव स्वामी को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। संगठन की ओर से जिन चिकित्सकों का बैठक में उपस्थित होना और बैठक को संबोधित करना दर्शाया गया था। उनमें से अनेक चिकित्सकों ने अविश्वास प्रस्ताव पास करने में शामिल होने से इंकार कर दिया है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है कि उनके द्वारा डॉक्टर एके चौधरी के खिलाफ कोई शब्द नहीं कहे गए हैं। वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. आरके टंडन और डॉ. अनिल कुमार ने अपनी उपस्थिति की तो बात कही है। मगर उनका कहना है कि बैठक में उनके द्वारा कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं रखा गया।
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उधर, डॉक्टर एके चौधरी का कहना है कि जनपद में संगठन के करीब 70 सदस्य हैं, मगर चंद चिकित्सकों ने मनमाने तरीके से बैठक कर उन्हें हटाया है, जिसे वह नहीं मानते हैं। दावा किया है कि ज्यादातर पदाधिकारी और सदस्य उनके साथ हैं। 11 जनवरी को विज्ञप्ति जारी करने वाले संघ सचिव डॉक्टर केवी सिंह का कहना है कि 11 जनवरी को पूरी प्रक्रिया के तहत डॉ. चौधरी को हटाया गया था। मगर हम भी आपस में कोई मतभेद नहीं चाहते हैं। जल्द ही एक साझा बैठक बुलाकर आपसी मतभेदों को दूर किया जाएगा और जो भी संगठन व चिकित्सकों के हित में होगा किया जाएगा।
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मैंने दोनों पक्षों को बैठाकर करीब दो घंटे बात की है। दोनों पक्षों में कोई भी गलत नहीं है। बस कुछ गलतफहमी थी। उन्हें दूर कर लिया गया है। बैठक में डॉक्टर केशव स्वामी को संरक्षक मंडल में रखने और डॉक्टर एके चौधरी को जिलाध्यक्ष बनाए रखने पर सहमति बनी है। साथ ही सचिव पद पर डॉक्टर केवी सिंह ही रहेंगे। -- डॉक्टर एसके वार्ष्णेय, सीएमएस।