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प्रधानमंत्री आवास योजना को नगर निगम ने दिया झटका
Updated Wed, 14 Nov 2018 12:21 AM IST
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सहारनपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी गरीबों के लिए दो हजार फ्लैट्स बनाने की योजना को नगर निगम ने तगड़ा झटका दिया है। ऐसे में आवास विकास परिषद के अधिकारियों, विकास प्राधिकरण के वीसी और डीएम से लेकर कमिश्नर तक को जमीन फाइनल करने के लिए दोबारा भागदौड़ करनी पड़ रही है।
योजना के तहत शहर में दो हजार फ्लैट बनाए जाने हैं, जिनपर तीन चरणों में काम होना है। फ्लैट तैयार करने का जिम्मा विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद पर है। विकास प्राधिकरण के अधिकारी करीब एक साल से जमीन की तलाश में हैं। कुछ समय पहले शहर से सटे गांव घोघरेकी में जमीन चिह्नित की गई थी। कमिश्नर ने जमीन की जांच भी कराई थी, मगर जमीन नदी कि किनारे होने की वजह से निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद प्रशासन की नजर मंडी समिति रोड पर खाली पड़ी 23 बीघा दो बिस्वा जमीन पर पड़ी। यह जमीन भारत सरकार की है, मगर इसकी देखभाल नगर निगम कर रहा है। नगर निगम ने ही कुछ महीने पहले यह जमीन एक सोसायटी से खाली कराई थी। करीब डेढ़ महीने पहले कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी और डीएम ने उक्त जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट बनाने की मंशा से प्रस्ताव सरकार के पास भेजा था। पिछले महीने लखनऊ में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने जमीन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत देने को हरी झंडी दे दी थी। इस बैठक में डीएम और विकास प्राधिकरण के वीसी दोनों उपस्थित हुए थे। मगर नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी समिति ने जमीन का इस्तेमाल प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करने पर आपत्ति जताई थी। कार्यकारिणी समिति की बैठक में इसे लेकर हंगामा भी हुआ था। इसके बाद महापौर ने शासन और डीएम को पत्र लिखे थे, जिसमें उक्त भूमि का इस्तेमाल प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए नहीं करने की बात कही गई थी। उसके बाद शासन से अग्रिम कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में कमिश्नर, डीएम, विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने दोबारा से जमीन की तलाश शुरू कर दी है।
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घोघरेकी में जमीन देखने पहुंचे अधिकारी
फोटो समाचार
सहारनपुर। मंगलवार को कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी, डीएम आलोक कुमार पांडेय, विकास प्राधिकरण के वीसी सुखलाल भारती और आवास विकास परिषद के अधिकारी गांव घोघरेकी के पास नागदेव नदी के पास प्रधानमंत्री आवास बनाने के लिए जमीन देखने पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों ने जमीन का बारीकी से मुआयना किया। साथ ही जमीन की पैमाइश भी कराई। चूंकि जमीन नदी से सटी हुई है। ऐसे में भविष्य में नदी के उफान पर आने की स्थिति पर भी मंथन किया गया।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए कमिश्नर और डीएम के प्रयास से मंडी समिति रोड पर खाली पड़ी भारत सरकार की जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। कुछ ही दिन पहले मुख्य सचिव ने जमीन पर सहमति भी जता दी थी, मगर उसके बाद नगर विकास विभाग से नाम दर्ज नहीं हो सका है। ऐसे में हम नई जमीन की तलाश कर रहे हैं। मंगलवार को हमने घोघरेकी में नागदेव नदी के पास जमीन देखी है।
सुखलाल भारती, वीसी एसडीए।
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मंडी समिति रोड पर खाली पड़ी जमीन बेशक भारत सरकार की है, मगर उसकी देखरेख नगर निगम करता आया है। यह जमीन बेहद कीमती जमीन है। प्रशासन द्वारा उक्त जमीन का चयन प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए करने के बाद कार्यकारिणी समिति सदस्यों ने बैठक में आपत्ति जताई थी। इसके बाद मैने शासन और डीएम को पत्र लिखा था, जिसमें जमीन का इस्तेमाल प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए नहीं करने की मांग की गई थी।
संजीव वालिया, महापौर।
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योजना के तहत शहर में दो हजार फ्लैट बनाए जाने हैं, जिनपर तीन चरणों में काम होना है। फ्लैट तैयार करने का जिम्मा विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद पर है। विकास प्राधिकरण के अधिकारी करीब एक साल से जमीन की तलाश में हैं। कुछ समय पहले शहर से सटे गांव घोघरेकी में जमीन चिह्नित की गई थी। कमिश्नर ने जमीन की जांच भी कराई थी, मगर जमीन नदी कि किनारे होने की वजह से निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद प्रशासन की नजर मंडी समिति रोड पर खाली पड़ी 23 बीघा दो बिस्वा जमीन पर पड़ी। यह जमीन भारत सरकार की है, मगर इसकी देखभाल नगर निगम कर रहा है। नगर निगम ने ही कुछ महीने पहले यह जमीन एक सोसायटी से खाली कराई थी। करीब डेढ़ महीने पहले कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी और डीएम ने उक्त जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट बनाने की मंशा से प्रस्ताव सरकार के पास भेजा था। पिछले महीने लखनऊ में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने जमीन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत देने को हरी झंडी दे दी थी। इस बैठक में डीएम और विकास प्राधिकरण के वीसी दोनों उपस्थित हुए थे। मगर नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी समिति ने जमीन का इस्तेमाल प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करने पर आपत्ति जताई थी। कार्यकारिणी समिति की बैठक में इसे लेकर हंगामा भी हुआ था। इसके बाद महापौर ने शासन और डीएम को पत्र लिखे थे, जिसमें उक्त भूमि का इस्तेमाल प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए नहीं करने की बात कही गई थी। उसके बाद शासन से अग्रिम कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में कमिश्नर, डीएम, विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने दोबारा से जमीन की तलाश शुरू कर दी है।
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घोघरेकी में जमीन देखने पहुंचे अधिकारी
फोटो समाचार
सहारनपुर। मंगलवार को कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी, डीएम आलोक कुमार पांडेय, विकास प्राधिकरण के वीसी सुखलाल भारती और आवास विकास परिषद के अधिकारी गांव घोघरेकी के पास नागदेव नदी के पास प्रधानमंत्री आवास बनाने के लिए जमीन देखने पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों ने जमीन का बारीकी से मुआयना किया। साथ ही जमीन की पैमाइश भी कराई। चूंकि जमीन नदी से सटी हुई है। ऐसे में भविष्य में नदी के उफान पर आने की स्थिति पर भी मंथन किया गया।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए कमिश्नर और डीएम के प्रयास से मंडी समिति रोड पर खाली पड़ी भारत सरकार की जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। कुछ ही दिन पहले मुख्य सचिव ने जमीन पर सहमति भी जता दी थी, मगर उसके बाद नगर विकास विभाग से नाम दर्ज नहीं हो सका है। ऐसे में हम नई जमीन की तलाश कर रहे हैं। मंगलवार को हमने घोघरेकी में नागदेव नदी के पास जमीन देखी है।
सुखलाल भारती, वीसी एसडीए।
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मंडी समिति रोड पर खाली पड़ी जमीन बेशक भारत सरकार की है, मगर उसकी देखरेख नगर निगम करता आया है। यह जमीन बेहद कीमती जमीन है। प्रशासन द्वारा उक्त जमीन का चयन प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए करने के बाद कार्यकारिणी समिति सदस्यों ने बैठक में आपत्ति जताई थी। इसके बाद मैने शासन और डीएम को पत्र लिखा था, जिसमें जमीन का इस्तेमाल प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए नहीं करने की मांग की गई थी।
संजीव वालिया, महापौर।