फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   सहारनपुर में बसों में बच्चों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं

सहारनपुर में बसों में बच्चों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं

Thu, 14 Sep 2017 01:36 AM IST
Updated Thu, 14 Sep 2017 01:36 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर में बसों में बच्चों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं
स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा का इंतजाम नहीं
विज्ञापन

सहारनपुर। जिले के अधिकतर स्कूलों की बसों में बच्चों की सुरक्षा की कोई इंतजाम नहीं है। स्कूल बस चालकों का किसी भी स्कूल ने सत्यापन नहीं कराया है । कुछ ही स्कूल अपनी बसों का संचालन कर रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में बसों का संचालन ठेके पर ही कराया जा रहा है। कुछ स्कूलों ने परिवहन सुविधा दिए जाने से ही इंकार कर दिया है। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।
सहारनपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह से राम भरोसे चल रही है। यहां पर अधिकांश स्कूलों में लगी बसों के बारे में तो अभिभावकों को यही नहीं पता कि जिस बस में उनका बच्चा स्कूल जा रहा है, उस बस के चालक का पुलिस सत्यापन तक नहीं हुआ है। किसी भी स्कूल ने किसी भी बस के चालक एवं परिचालक का आज तक पुलिस से सत्यापन नहीं कराया है। अधिकांश बड़े स्कूलों ने तो बच्चों को यातायात सुविधा के लिए बसों का संचालन स्वयं न कराकर ठेका दे दिया है। इससे स्कूल संचालक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं और किसी भी मामले का ठीकरा बस ठेकेदारों और अभिभावकों पर ही फोड़ रहे हैं। स्कूल भेजने की अभिभावकों की मजबूरी है कि जो वाहन स्कूल तक अन्य बच्चों को ले जा रहा है, उसी में अपना बच्चा भेजना पड़ रहा है। जिले के स्कूलों में लगभग 624 बसें संचालित की जा रही हैं, जो पूरी तरह से स्कूलों के नियंत्रण में हैं। उनमें भी चालक ठेके पर ही हैं। जबकि लगभग 48 बसें ठेके पर स्कूलों में लगी हुई हैं। इसके अलावा कुछ वैन एवं अन्य बसें भी स्कूलों में बच्चों को लाने एवं ले जाने का काम कर रही हैं। जिन्हें स्कूल बस का परमिट ही नहीं हैं।
विज्ञापन


पुलिस विभाग से सत्यापन कराया जाएगा
आशा माडर्न स्कूल की संचालिका आशा जैन कहतीं हैं कि स्कूल ने अपनी कोई बस नहीं लगाई है। अभिभावकों द्वारा स्वयं ही बसों का इंतजाम किया गया। बसों में बच्चों की संख्या काफी अधिक होती है, जिसके लिए कई बार कहा गया, लेकिन बच्चे कम नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अभिभावकों से कहेंगी कि बस संचालकों का पुलिस वेरीफिकेशन कराएं, जिससे उनके बच्चों की सुरक्षा मजबूत हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

डीएवी स्कूल की प्रधानाचार्या मीनू भट्टाचार्य का कहना है कि उनके यहां स्कूल की एक बस संचालित की जा रही है, जबकि पांच बसें ठेके पर चल रहीं हैं। जिन चालकों को रखा गया है उनकी आईडी ले ली गई थी। साथ ही जहां पहले काम किया था, वहां से सत्यापन कराया गया था। लेकिन अब वह पुलिस वेरीफिकेशन भी कराएंगी।

अधिकांश स्कूलों में लगाए गए हैं सीसीटीवी
प्रोग्रेसिव स्कूल फोरम के अध्यक्ष सुरेंद्र चौहान कहते हैं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिकांश स्कूल गंभीर हैं। अधिकांश स्कूलों में सिर्फ परिसर में ही नहीं अब तो कक्षाओं में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। स्कूलों के गेट पर सुरक्षाकर्मी भी नियुक्त किए गए हैं और स्कूलों में बसों तक बच्चों को पहुंचाने की जिम्मेदारी भी स्कूल के कर्मचारियों दी जाती है। बस चालकों का अभी तक किसी ने सत्यापन नहीं कराया है। इसके लिए सभी स्कूलों को कहा गया है।
बसों के संचालन के लिए स्कूल बाध्य नहीं

बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों द्वारा ही बसों का संचालन किया जाना ठीक है, लेकिन इसके लिए स्कूलों को बाध्य नहीं किया जा सकता।

किसी ने नहीं कराया सत्यापन
एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि किसी भी बस चालक का किसी भी स्कूल ने आज तक कोई वेरीफिकेशन नहीं कराया है। स्कूल संचालकों एवं अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को जिस बस अथवा कैब में स्कूल भेज रहे हैं, उसका सत्यापन कराएं। जिससे पुलिस में संबंधित का पूरा रिकार्ड रहे। जिससे बसों-कैब पर प्रशिक्षित चालक ही रह सकेंगे।


बच्चों को जागरूक करें अभिभावक
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार का कहना है कि पुलिस लोगों की सुरक्षा में हर समय तत्पर हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों को न सिर्फ सचेत रहने की जरूरत है, बल्कि बच्चों को भी जागरूक करना होगा। अभिभावक अपने बच्चों को समझाएं कि बच्चे अपने माता-पिता, भाई-बहन एवं परिवार के अन्य खास लोगों के अलावा किसी के साथ कहीं न जाएं और न ही किसी प्रकार के बहकावे में आएं। किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या लालच दिए जाने की बात अपने अभिभावकों को बताएं। बच्चों को डराने की बजाय मित्रवत व्यवहार करें, जिससे बच्चे बेझिझक अपनी समस्या अभिभावकों को बता दें। अभिभावक बच्चों की हरकतों पर ध्यान दें। उनके गुमसुम होने अथवा चिड़चिड़ापन होने की स्थिति में उससे प्यार से बातें करके उसकी मनोस्थिति के बारे में जानें। जिससे बच्चा अपनी परेशानी को बता सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed