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सांसद आदर्श गांव
Updated Tue, 27 Jun 2017 12:27 AM IST
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स्वास्थ्य सेवाओं का टोटा, मरने को मजबूर रोगी
गंगोह/बिहारीगढ़ (सहारनपुर)। भाजपा के कैराना सांसद बाबु हुकुम सिंह द्वारा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गए गांव सुखेड़ी में आज तक अस्पताल नहीं बन पाया है। यह हाल तब है, जबकि गांव में पिछले दो वर्षों के भीतर ही 14 से ज्यादा लोगों की बीमारी से मौत हो चुकी है। जबकि 12 से अधिक लोग जानलेवा बीमारी की चपेट में है। इसके बावजूद शासन, प्रशासन इस बारे संजीदा नहीं है।
सांसद हुकुम सिंह द्वारा गोद लिए गए गांव सुखेड़ी में बड़ी संख्या में ग्रामीण दूषित पेयजल एवं गंदगी के कारण बीमार हैं। सांसद के गोद लेने के बाद लोगों को गांव में अस्पताल बनने और इस बीमारी से मुक्ति की आस जगी थी। परंतु दो वर्ष बीतने के बावजूद स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। ग्राम प्रधान धूमसिंह ने बताया कि दो वर्ष के भीतर एक ही परिवार के तीन सदस्यों पिता-पुत्र एवं पौत्र के अलावा दो सगे भाइयों सहित 14 से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में मौत के शिकार हो गए।
इनकी हो चुकी है मौत
ग्राम प्रधान धूमसिंह के अनुसार मृतकों में दो सगे भाई पवन एवं जनेशर पुत्रगण रामचंद्र, मनफूल, उसका पुत्र श्यामो एवं पौत्र सचिन, इंद्र पुत्र मुख्तयारा, मिहिर पुत्र रिसाला, अमित पुत्र राकेश, रतन, रामबीर पुत्र किशन, समयसिंह पुत्र दाताराम, सौरण पत्नी जनेशर के अलावा मोहरसिंह और पवन की पत्नियों की भी मौत हो चुकी है।
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यह हैं बीमारी से पीड़ित
गांव निवासी कर्मसिंह पुत्र भूरा, अरविंद, ऋषिपाल, सोरण, सत्तो, मुकेश पुत्र राजकुमार, बबली पत्नी राजबीर कैंसर से पीड़ित बताए जाते हैं। वहीं कमलेश, तारा और राधा का गला सूजा हुआ है। नरेश का पेट फूला हुआ है। इसके अलावा कई और लोग भी अज्ञात बीमारी से पीड़ित हैं। मांगेराम, रामधन, बीरम, बाबूराम, ओमवीर आदि का कहना है कि गांव में अस्पताल ना होने से सही समय पर बीमारी का उपचार नही हो पाता।
दो वर्षों में भी नहीं बना अस्पताल
सांसद ने गांव को गोद लेने के बाद जल्द ही अस्पताल बनवाने की बात कही थी। आज दो वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अस्पताल की बुनियाद तक नहीं रखी जा सकी है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र बनने की ग्रामीणों की उम्मीद दम तोड़ रही है। भाजपा नेता और ग्राम प्रधान धूमसिंह ने बताया कि उन्होंने अस्पताल का प्रस्ताव सांसद एवं शासन को भेज रखा है। शासन गांव में उपकेंद्र बनाना चाहता है जबकि ग्रामीण पीएचसी की मांग कर रहे हैं। बताया कि वह जल्द ही सांसद से मिलकर इस बारे में बात करेंगे।
खुशहालीपुर में भी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं
भाजपा सांसद राघव लखनपाल शर्मा द्वारा गोद लिए आदर्श गांव खुशहालीपुर में तीन साल गुजरने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। गांव में मात्र एक उप स्वास्थ्य केन्द्र है जो माह में एक या दो दिन ही खुलता है। वो भी इस पर मात्र बच्चों का टीकाकरण ही होता है। प्राथमिक उपचार या महिलाओं को प्रसव के लिए बीस किमी दूर फतेहपुर जाना पड़ता है। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में पिछले साल पांच लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। जबकि दो युवक चिकनगुनिया से दम तोड़ चुके हैं। आदर्श गांव में चुने जाने के बाद लोगों में उम्मीद बंधी थी कि अब यहां कम से कम पीएचसी तो बन ही जाएगी।
गांव के 70 वर्षीय लेखराम व 68 वर्षीय करेशन का कहना था कि उप स्वास्थ्य केन्द्र में आज तक ना तो एक बार चिकित्सक आया और ना ही किसी बीमारी की दवाई ही दी गई।
गांव की संजेश देवी का कहना था कि उप स्वास्थ्य केन्द्र में पोलियो अभियान का बूथ और टीकाकरण कैंप ही लगता है। प्रसव तक के लिए महिलाओं को बीस से तीस किमी दूर तक जाना पड़ता है। कई बार झोला छापों के चक्कर में जान तक पर बन आती है। मैं कल ही खुशहालीपुर गांव जाउंगा और जो भी कमी होगी उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाएगी।
राघव लखनपाल शर्मा सांसद सहारनपुर
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गंगोह/बिहारीगढ़ (सहारनपुर)। भाजपा के कैराना सांसद बाबु हुकुम सिंह द्वारा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गए गांव सुखेड़ी में आज तक अस्पताल नहीं बन पाया है। यह हाल तब है, जबकि गांव में पिछले दो वर्षों के भीतर ही 14 से ज्यादा लोगों की बीमारी से मौत हो चुकी है। जबकि 12 से अधिक लोग जानलेवा बीमारी की चपेट में है। इसके बावजूद शासन, प्रशासन इस बारे संजीदा नहीं है।
सांसद हुकुम सिंह द्वारा गोद लिए गए गांव सुखेड़ी में बड़ी संख्या में ग्रामीण दूषित पेयजल एवं गंदगी के कारण बीमार हैं। सांसद के गोद लेने के बाद लोगों को गांव में अस्पताल बनने और इस बीमारी से मुक्ति की आस जगी थी। परंतु दो वर्ष बीतने के बावजूद स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। ग्राम प्रधान धूमसिंह ने बताया कि दो वर्ष के भीतर एक ही परिवार के तीन सदस्यों पिता-पुत्र एवं पौत्र के अलावा दो सगे भाइयों सहित 14 से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में मौत के शिकार हो गए।
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इनकी हो चुकी है मौत
ग्राम प्रधान धूमसिंह के अनुसार मृतकों में दो सगे भाई पवन एवं जनेशर पुत्रगण रामचंद्र, मनफूल, उसका पुत्र श्यामो एवं पौत्र सचिन, इंद्र पुत्र मुख्तयारा, मिहिर पुत्र रिसाला, अमित पुत्र राकेश, रतन, रामबीर पुत्र किशन, समयसिंह पुत्र दाताराम, सौरण पत्नी जनेशर के अलावा मोहरसिंह और पवन की पत्नियों की भी मौत हो चुकी है।
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यह हैं बीमारी से पीड़ित
गांव निवासी कर्मसिंह पुत्र भूरा, अरविंद, ऋषिपाल, सोरण, सत्तो, मुकेश पुत्र राजकुमार, बबली पत्नी राजबीर कैंसर से पीड़ित बताए जाते हैं। वहीं कमलेश, तारा और राधा का गला सूजा हुआ है। नरेश का पेट फूला हुआ है। इसके अलावा कई और लोग भी अज्ञात बीमारी से पीड़ित हैं। मांगेराम, रामधन, बीरम, बाबूराम, ओमवीर आदि का कहना है कि गांव में अस्पताल ना होने से सही समय पर बीमारी का उपचार नही हो पाता।
दो वर्षों में भी नहीं बना अस्पताल
सांसद ने गांव को गोद लेने के बाद जल्द ही अस्पताल बनवाने की बात कही थी। आज दो वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अस्पताल की बुनियाद तक नहीं रखी जा सकी है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र बनने की ग्रामीणों की उम्मीद दम तोड़ रही है। भाजपा नेता और ग्राम प्रधान धूमसिंह ने बताया कि उन्होंने अस्पताल का प्रस्ताव सांसद एवं शासन को भेज रखा है। शासन गांव में उपकेंद्र बनाना चाहता है जबकि ग्रामीण पीएचसी की मांग कर रहे हैं। बताया कि वह जल्द ही सांसद से मिलकर इस बारे में बात करेंगे।
खुशहालीपुर में भी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं
भाजपा सांसद राघव लखनपाल शर्मा द्वारा गोद लिए आदर्श गांव खुशहालीपुर में तीन साल गुजरने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। गांव में मात्र एक उप स्वास्थ्य केन्द्र है जो माह में एक या दो दिन ही खुलता है। वो भी इस पर मात्र बच्चों का टीकाकरण ही होता है। प्राथमिक उपचार या महिलाओं को प्रसव के लिए बीस किमी दूर फतेहपुर जाना पड़ता है। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में पिछले साल पांच लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। जबकि दो युवक चिकनगुनिया से दम तोड़ चुके हैं। आदर्श गांव में चुने जाने के बाद लोगों में उम्मीद बंधी थी कि अब यहां कम से कम पीएचसी तो बन ही जाएगी।
गांव के 70 वर्षीय लेखराम व 68 वर्षीय करेशन का कहना था कि उप स्वास्थ्य केन्द्र में आज तक ना तो एक बार चिकित्सक आया और ना ही किसी बीमारी की दवाई ही दी गई।
गांव की संजेश देवी का कहना था कि उप स्वास्थ्य केन्द्र में पोलियो अभियान का बूथ और टीकाकरण कैंप ही लगता है। प्रसव तक के लिए महिलाओं को बीस से तीस किमी दूर तक जाना पड़ता है। कई बार झोला छापों के चक्कर में जान तक पर बन आती है। मैं कल ही खुशहालीपुर गांव जाउंगा और जो भी कमी होगी उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाएगी।
राघव लखनपाल शर्मा सांसद सहारनपुर