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तीसरी लहर में 635 बच्चे हुए संक्रमित, सभी घर पर रहकर हुए ठीक
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सहारनपुर। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। इसी के मद्देनजर जनपद में 150 बेड के दो पीआईसीयू तैयार किए गए, लेकिन अच्छी बात यह है कि तीसरी लहर ने जान का कोई नुकसान नहीं किया। खास बात यह है कि इसमें 635 बच्चे संक्रमित हुए हैं, जिन्होंने घर पर रहते हुए कोरोना को मात दी। हालांकि 80 फीसदी में किसी प्रकार का कोई लक्षण भी नहीं था।
तीसरी लहर में कोरोना का पहला मामला दूसरी लहर के 75 दिन बाद 24 नवंबर 2021 को सामने आया था। इस दिन देवबंद के एक गांव में गर्भवती और उसका डेढ् वर्ष का बच्चा संक्रमित मिले थे। उसके बाद 31 दिसंबर तक यानी करीब 37 दिन में मात्र 27 कोरोना संक्रमित मिले, जिनमें नौ बच्चे शामिल थे। इसके बाद जनवरी माह में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा। आलम यह रहा कि बीते वर्ष जनवरी की तुलना में इस बार छह से सात गुना अधिक संक्रमित मिले। लेकिन जनवरी के अंत में संक्रमण कमजोर भी पड़ा। फिलहाल कोरोना संक्रमण बेहद कम है। जिसे तीसरी लहर की समाप्ति भी माना जा रहा है। हालांकि चिकित्सा विभाग के अधिकारी फिलहाल खतरा बने होने की बात कहकर लोगों से सावधानी जारी रखने की अपील कर रहे हैं। वर्तमान में जिले में 239 सक्रिय मरीज हैं, जिनमें करीब 26 बच्चे हैं और सभी स्वस्थ हैं।
ऑक्सीजन की भी नहीं पड़ी जरूरत
कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों का ऑक्सीजन लेवल तेजी से गड़बड़ा रहा था। ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से करीब 300 मरीजों की जान चली गई थी। ऐसे में शासन और प्रशासन का जोर इलाज की अन्य व्यवस्थाओं के साथ ही ऑक्सीजन पर भी रहा है। एसबीडी जिला अस्पताल में दो, जिला महिला अस्पताल में एक, राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो तथा आठ सीएचसी पर एक-एक ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट स्थापित किए गए हैं, लेकिन अभी तक इनकी जरूरत नहीं पड़ी है।
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कोरोना की तीसरी लहर में जैसी आशंका बच्चों को लेकर जताई गई थी, वैसा नहीं हुआ है, जो अच्छी बात है। तीसरी लहर में अभी तक कुल 635 बच्चे संक्रमित आए हैं, जिन्होंने होम आइसोलेशन में रहते हुए कोरोना को हराया है।
शिवांका गौड़, नोडल अधिकारी
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तीसरी लहर में कोरोना का पहला मामला दूसरी लहर के 75 दिन बाद 24 नवंबर 2021 को सामने आया था। इस दिन देवबंद के एक गांव में गर्भवती और उसका डेढ् वर्ष का बच्चा संक्रमित मिले थे। उसके बाद 31 दिसंबर तक यानी करीब 37 दिन में मात्र 27 कोरोना संक्रमित मिले, जिनमें नौ बच्चे शामिल थे। इसके बाद जनवरी माह में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा। आलम यह रहा कि बीते वर्ष जनवरी की तुलना में इस बार छह से सात गुना अधिक संक्रमित मिले। लेकिन जनवरी के अंत में संक्रमण कमजोर भी पड़ा। फिलहाल कोरोना संक्रमण बेहद कम है। जिसे तीसरी लहर की समाप्ति भी माना जा रहा है। हालांकि चिकित्सा विभाग के अधिकारी फिलहाल खतरा बने होने की बात कहकर लोगों से सावधानी जारी रखने की अपील कर रहे हैं। वर्तमान में जिले में 239 सक्रिय मरीज हैं, जिनमें करीब 26 बच्चे हैं और सभी स्वस्थ हैं।
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ऑक्सीजन की भी नहीं पड़ी जरूरत
कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों का ऑक्सीजन लेवल तेजी से गड़बड़ा रहा था। ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से करीब 300 मरीजों की जान चली गई थी। ऐसे में शासन और प्रशासन का जोर इलाज की अन्य व्यवस्थाओं के साथ ही ऑक्सीजन पर भी रहा है। एसबीडी जिला अस्पताल में दो, जिला महिला अस्पताल में एक, राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो तथा आठ सीएचसी पर एक-एक ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट स्थापित किए गए हैं, लेकिन अभी तक इनकी जरूरत नहीं पड़ी है।
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कोरोना की तीसरी लहर में जैसी आशंका बच्चों को लेकर जताई गई थी, वैसा नहीं हुआ है, जो अच्छी बात है। तीसरी लहर में अभी तक कुल 635 बच्चे संक्रमित आए हैं, जिन्होंने होम आइसोलेशन में रहते हुए कोरोना को हराया है।
शिवांका गौड़, नोडल अधिकारी