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जिले में स्थापित होगा बॉयो एथेजॉल उद्योग: डीएम
Updated Tue, 17 Apr 2018 12:29 AM IST
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सहारनपुर। जिलाधिकारी पीके पांडेय ने कहा कि जिले में निवेश करने वाले उद्यमियों को हर संभव मदद दी जाएगी, लेकिन निवेशकोें को भी अपने उद्योगों में स्थानीय लोगों को रोजगार देना होगा। उन्होंने जिले में बॉयो एथेनॉल परियोजना लगाने पर हर्ष जताया।
सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट में एमओयू हस्ताक्षरित करने के बाद शिव ओम दयाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। डीएम ने कहा कि तेल कीमतों की बढ़ोत्तरी के चलते बॉयो एथेनॉल की परियोजना इस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय होगी। साथ ही गन्ने की प्रचुर मात्रा में पैदावार के चलते इस परियोजना से स्थानीय किसानों को भी लाभ होगा। कंपनी के निदेशक प्रोजेक्ट एसके मिश्र ने बताया कि वे अपने प्रौद्योगिक भागीदार आइएनईआर ताइवान और डीएमई बिओफुएल्स, फिनलैंड के सहयोग से भारत में दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल के लिए उद्योग विकसित करने के काम में जुटे हैं। इस उद्योग में कृषि अवशेष जैसे पराली, गेहूं का भूसा और गन्ने की खोई का प्रयोग बॉयो एथेनॉल के उत्पादन के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस उद्योग में स्थापना से लेकर उत्पादन प्रक्रिया तक ऐसे बायो उत्पाद उत्पादित होते हैं जो ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे। बॉयो सीएनजी कम मूल्य पर उपलब्ध होती है। इसी प्रकार बॉयो रसायन जो कम मूल्य पर मिट्टी को फिर से उपजाऊ बनाने में मदद करती हैं। बॉयोकोल एक राख रहित कोयला है, जो थर्मल पावर प्लांट्स को कार्बन नकारात्मक होने से बचाता हैं। द्वितीय जनरेशन का एथेनॉल एक स्वच्छ, हरित और गैर अक्षय जीवाश्म ईंधन के लिए सबसे उत्तम विकल्प है। उन्होंने कहा कि यह कृषि अवशेष किसानों से इकठ्ठा किया जाएगा और सर्कुलर ग्रीन इकोनामी के माध्यम से किसानो को अतिरिक्त आय देने, रोजगार प्रदान करने, तेल की कीमतों में स्थिरता प्रदान करने में और कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने में मदद करेगी। जिलाधिकारी ने प्रतिनिधि मंडल को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग के अनुरूप 50 एकड़ भूमि के साथ ही बिजली, सड़क, सुरक्षा और पानी की भी समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। आशीष आहूजा, दीनू आहूजा, एस के मिश्र, गॉउ हनव बांग, चाओ इनर ताइवान भी रहे।
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सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट में एमओयू हस्ताक्षरित करने के बाद शिव ओम दयाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। डीएम ने कहा कि तेल कीमतों की बढ़ोत्तरी के चलते बॉयो एथेनॉल की परियोजना इस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय होगी। साथ ही गन्ने की प्रचुर मात्रा में पैदावार के चलते इस परियोजना से स्थानीय किसानों को भी लाभ होगा। कंपनी के निदेशक प्रोजेक्ट एसके मिश्र ने बताया कि वे अपने प्रौद्योगिक भागीदार आइएनईआर ताइवान और डीएमई बिओफुएल्स, फिनलैंड के सहयोग से भारत में दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल के लिए उद्योग विकसित करने के काम में जुटे हैं। इस उद्योग में कृषि अवशेष जैसे पराली, गेहूं का भूसा और गन्ने की खोई का प्रयोग बॉयो एथेनॉल के उत्पादन के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस उद्योग में स्थापना से लेकर उत्पादन प्रक्रिया तक ऐसे बायो उत्पाद उत्पादित होते हैं जो ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे। बॉयो सीएनजी कम मूल्य पर उपलब्ध होती है। इसी प्रकार बॉयो रसायन जो कम मूल्य पर मिट्टी को फिर से उपजाऊ बनाने में मदद करती हैं। बॉयोकोल एक राख रहित कोयला है, जो थर्मल पावर प्लांट्स को कार्बन नकारात्मक होने से बचाता हैं। द्वितीय जनरेशन का एथेनॉल एक स्वच्छ, हरित और गैर अक्षय जीवाश्म ईंधन के लिए सबसे उत्तम विकल्प है। उन्होंने कहा कि यह कृषि अवशेष किसानों से इकठ्ठा किया जाएगा और सर्कुलर ग्रीन इकोनामी के माध्यम से किसानो को अतिरिक्त आय देने, रोजगार प्रदान करने, तेल की कीमतों में स्थिरता प्रदान करने में और कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने में मदद करेगी। जिलाधिकारी ने प्रतिनिधि मंडल को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग के अनुरूप 50 एकड़ भूमि के साथ ही बिजली, सड़क, सुरक्षा और पानी की भी समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। आशीष आहूजा, दीनू आहूजा, एस के मिश्र, गॉउ हनव बांग, चाओ इनर ताइवान भी रहे।
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