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बकाया गन्ना मूल्य पाने के लिए तरस रहे किसान
Updated Sun, 15 Apr 2018 11:56 PM IST
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बकाया गन्ना मूल्य पाने के लिए तरस रहे किसान
सहारनपुर। प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल सकी है। विपक्ष में रहते हुए किसानों के मुद्दे पर मुखर रहने वाली भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार में भी किसान बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए तरस रहे हैं। मंडल की शुगर मिलों पर 1500 करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है। इसके चलते किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान की उम्मीद जगी थी। क्योंकि विपक्ष में रहकर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के मुद्दे पर भाजपा हमेशा मुखर रही थी। लेकिन भाजपा सरकार भी किसानों को समय से गन्ना मूल्य दिला पाने में विफल साबित हो रही है। शुगर मिलें मंडल के किसानों को करीब 1500 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। गन्ना खरीद अधिनियम के तहत मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान करने का प्राविधान है। इसके बाद भुगतान करने पर मिल को 15 प्रतिशत की दर से बकाया पर ब्याज देने का नियम है। साथ ही बकायदार शुगर मिलें वाह्य क्रय केंद्रों से किराया कटौती भी नहीं कर सकती। इसके बावजूद चीनी मिलें किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरतती हैं। गन्ना मूल्य भुगतान कराने को लेकर मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी भी कई बार मिलों केे फटकार लगा चुके हैं। इसको लेकर उन्होंने मिल मालिकों को नोटिस भी जारी किए हैं।
बकाया गन्ना मूल्य के त्वरिक गति से भुगतान कराने के लिए मंडलायुक्त की ओर से सभी मिल मालिकों को नोटिस भेजे गए हैं। जो भी बकाया गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरतेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है कि जल्द ही बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाएगा।
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- डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।
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सहारनपुर। प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल सकी है। विपक्ष में रहते हुए किसानों के मुद्दे पर मुखर रहने वाली भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार में भी किसान बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए तरस रहे हैं। मंडल की शुगर मिलों पर 1500 करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है। इसके चलते किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान की उम्मीद जगी थी। क्योंकि विपक्ष में रहकर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के मुद्दे पर भाजपा हमेशा मुखर रही थी। लेकिन भाजपा सरकार भी किसानों को समय से गन्ना मूल्य दिला पाने में विफल साबित हो रही है। शुगर मिलें मंडल के किसानों को करीब 1500 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। गन्ना खरीद अधिनियम के तहत मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान करने का प्राविधान है। इसके बाद भुगतान करने पर मिल को 15 प्रतिशत की दर से बकाया पर ब्याज देने का नियम है। साथ ही बकायदार शुगर मिलें वाह्य क्रय केंद्रों से किराया कटौती भी नहीं कर सकती। इसके बावजूद चीनी मिलें किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरतती हैं। गन्ना मूल्य भुगतान कराने को लेकर मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी भी कई बार मिलों केे फटकार लगा चुके हैं। इसको लेकर उन्होंने मिल मालिकों को नोटिस भी जारी किए हैं।
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बकाया गन्ना मूल्य के त्वरिक गति से भुगतान कराने के लिए मंडलायुक्त की ओर से सभी मिल मालिकों को नोटिस भेजे गए हैं। जो भी बकाया गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरतेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है कि जल्द ही बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाएगा।
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- डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।