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तीन तलाक पर अध्यादेश आया तो किया जाएगा विरोध: उलमा
Updated Sun, 06 May 2018 12:24 AM IST
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तीन तलाक पर अध्यादेश आया तो होगा विरोध : उलमा
देवबंद(सहारनपुर)। केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक पर अध्यादेश लाने की तैयारी किए जाने पर देवबंदी उलमा ने कड़ा ऐतराज जताया है। उलमा का कहना है कि केंद्र लगातार शरीयती कानून में हस्तक्षेप कर रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऑल इंडिया इत्तेसादी कौंसिल के चेयरमैन मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि वर्ष 2019 के चुनाव को लेकर केंद्र सरकार लगातार साजिश के तहत मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है। जिससे उसे चुनाव में लाभ हो सके। केंद्र लगातार ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मुस्लिम संगठन और मुसलमानों की मांग को नजरअंदाज करते हुए धार्मिक मामलों से छेड़छाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को मुस्लिम महिलाओं की इतनी फिक्र है तो उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था कर उन्हें रोजगार से जोड़ने का काम क्यों नहीं कर रही है। मौलाना हसीब ने कहा कि तीन तलाक का मामला शरीयत का है और मुसलमान अपनी जिंदगी शरीयत के मुताबिक गुजारते हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि वो ऐसा काम न करे जिससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत होती हों। दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक पर अध्यादेश लाने का पुरजोर विरोध किया जाएगा। क्योंकि कोई भी शरीयत के मामलों में दखलंदाजी करे यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की पूरी जिंदगी का निजाम शरीयत पर टिका हुआ है। इससे हटकर कोई भी अमल नहीं हो सकता। इसलिए सरकार को तीन तलाक पर किसी भी तरह का फैसला करने से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मुस्लिम संगठनों और उलमा से राय लेनी चाहिए।
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देवबंद(सहारनपुर)। केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक पर अध्यादेश लाने की तैयारी किए जाने पर देवबंदी उलमा ने कड़ा ऐतराज जताया है। उलमा का कहना है कि केंद्र लगातार शरीयती कानून में हस्तक्षेप कर रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऑल इंडिया इत्तेसादी कौंसिल के चेयरमैन मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि वर्ष 2019 के चुनाव को लेकर केंद्र सरकार लगातार साजिश के तहत मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है। जिससे उसे चुनाव में लाभ हो सके। केंद्र लगातार ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मुस्लिम संगठन और मुसलमानों की मांग को नजरअंदाज करते हुए धार्मिक मामलों से छेड़छाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को मुस्लिम महिलाओं की इतनी फिक्र है तो उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था कर उन्हें रोजगार से जोड़ने का काम क्यों नहीं कर रही है। मौलाना हसीब ने कहा कि तीन तलाक का मामला शरीयत का है और मुसलमान अपनी जिंदगी शरीयत के मुताबिक गुजारते हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि वो ऐसा काम न करे जिससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत होती हों। दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक पर अध्यादेश लाने का पुरजोर विरोध किया जाएगा। क्योंकि कोई भी शरीयत के मामलों में दखलंदाजी करे यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की पूरी जिंदगी का निजाम शरीयत पर टिका हुआ है। इससे हटकर कोई भी अमल नहीं हो सकता। इसलिए सरकार को तीन तलाक पर किसी भी तरह का फैसला करने से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मुस्लिम संगठनों और उलमा से राय लेनी चाहिए।
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