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गन्ने की फसल में टॉप बोरर का प्रकोप बढा
Updated Fri, 27 Apr 2018 12:57 AM IST
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गन्ने की फसल में टॉप बोरर का प्रकोप बढ़ा
सहारनपुर। गन्ने की फसल इस समय टॉप बोरर की चपेट में है। काफी छोटे आकार का यह कीट पौधों की चोटी को खाकर नष्ट कर देता है। प्रभावित फसल से सिरके जैसी एक खास किस्म की दुर्गंध आती है। इस पर समय से नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
यह कीट गन्ने के पौधे की चोटी में प्रवेश कर गोभ को नष्ट कर देता है। जिससे फसल की चोटी सूख जाती है। इसके चलते प्रभावित फसल की बढ़ोत्तरी रुक जाती है। कीट से प्रभावित पौधे की चोटी को ऊपर की तरफ खींचने पर आसानी से निकल जाती है। इससे सिरके की तरह की दुर्गंध आती है। चोटी बेधक कीट का प्रकोप बहुत ही तेजी से फैलता है। समय से इसकी रोकथाम नहीं की गई तो फसल की उत्पादन क्षमता को 25 से 30 प्रतिशत तक प्रभावित होने की आशंका रहती है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि इस कीट से प्रभावित खेत से खरपतवार को निकाल देना चाहिए। जैविक नियंत्रण के लिए फसल में ट्राइकोग्रामा कार्ड दो प्रति एकड़ के हिसाब से लगाना मुफीद रहता है। इस कार्ड को शाम के समय लगाया जाना चाहिए और कार्ड को लगाने के बाद किसी भी कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। कीटनाशक का प्रयोग करने से कार्ड में मौजूद मित्र कीटों को नुकसान होता है। यदि किसान रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहता है तो थायामिथाक्सम एक किलो प्रति एकड़ बिखेरकर हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहती है। इसके अलावा कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड या फ्यूराडान की छह से आठ किलो प्रति एकड़ की दर से डालने से भी टॉप बोरर पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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सहारनपुर। गन्ने की फसल इस समय टॉप बोरर की चपेट में है। काफी छोटे आकार का यह कीट पौधों की चोटी को खाकर नष्ट कर देता है। प्रभावित फसल से सिरके जैसी एक खास किस्म की दुर्गंध आती है। इस पर समय से नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
यह कीट गन्ने के पौधे की चोटी में प्रवेश कर गोभ को नष्ट कर देता है। जिससे फसल की चोटी सूख जाती है। इसके चलते प्रभावित फसल की बढ़ोत्तरी रुक जाती है। कीट से प्रभावित पौधे की चोटी को ऊपर की तरफ खींचने पर आसानी से निकल जाती है। इससे सिरके की तरह की दुर्गंध आती है। चोटी बेधक कीट का प्रकोप बहुत ही तेजी से फैलता है। समय से इसकी रोकथाम नहीं की गई तो फसल की उत्पादन क्षमता को 25 से 30 प्रतिशत तक प्रभावित होने की आशंका रहती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि इस कीट से प्रभावित खेत से खरपतवार को निकाल देना चाहिए। जैविक नियंत्रण के लिए फसल में ट्राइकोग्रामा कार्ड दो प्रति एकड़ के हिसाब से लगाना मुफीद रहता है। इस कार्ड को शाम के समय लगाया जाना चाहिए और कार्ड को लगाने के बाद किसी भी कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। कीटनाशक का प्रयोग करने से कार्ड में मौजूद मित्र कीटों को नुकसान होता है। यदि किसान रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहता है तो थायामिथाक्सम एक किलो प्रति एकड़ बिखेरकर हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहती है। इसके अलावा कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड या फ्यूराडान की छह से आठ किलो प्रति एकड़ की दर से डालने से भी टॉप बोरर पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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