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जिले के हर गांव में वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना होगी
Updated Mon, 22 Jan 2018 12:41 AM IST
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सहारनपुर। मृदा में जीवाश्म कार्बन की लगातार हो रही कमी को दूर करने के लिए कृषि विभाग जिले के प्रत्येक गांव में पहले चरण में एक एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना कराएगा। इसके बाद हर गांव में 10-10 वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित कराने की योजना है। इससे न सिर्फ कंपोस्ट खाद बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों की फसल अवशेषों को जलाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लग सकेगी।
फसलों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ने से जहां भूमि की सेहत खराब हो रही है, वहीं इसका कुप्रभाव मृदा की संरचना पर भी पड़ रहा है। भूमि में जीवाश्म कार्बन की कमी को दूर करने के लिए जनपद के 1242 गांवों में एक एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना कराई जाएगी। इन यूनिटों में किसान कंपोस्ट खाद का उत्पादन कर अपनी भूमि में जीवाश्म कार्बन की कमी को दूर कर सकता है। विभाग एक यूनिट की स्थापना के लिए लागत का 75 प्रतिशत धनराशि अनुदान के रूप में देगा बाकी 25 फीसदी लागत किसान को स्वयं वहन करनी होगी। लाभार्थी किसान के पास कम से कम एक एकड़ भूमि का होना अनिवार्य है। उप कृषि निदेशक राजीव कुमार ने बताया कि जिले में 1242 गांवों में एक एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना कराई जाएगी। इसके लिए किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों का कंपोस्ट खाद के प्रति रुझान बढे़गा।
वर्मी कंपोस्ट खाद के लाभ
- पशुओं के मल मूत्र, फसल अवशेषों का अनकूलतम प्रयोग।
- खेतों में जीवाश्म कार्बन की कमी दूूर होगी।
- लाभदायक सूक्ष्म जीवाणुओं को क्रियाशील कर भूमि के जैविक गुणों में सुधार होगा।
- मृदा स्वास्थ्य सुधारने के साथ ही पर्यावरण का संरक्षण।
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फसलों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ने से जहां भूमि की सेहत खराब हो रही है, वहीं इसका कुप्रभाव मृदा की संरचना पर भी पड़ रहा है। भूमि में जीवाश्म कार्बन की कमी को दूर करने के लिए जनपद के 1242 गांवों में एक एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना कराई जाएगी। इन यूनिटों में किसान कंपोस्ट खाद का उत्पादन कर अपनी भूमि में जीवाश्म कार्बन की कमी को दूर कर सकता है। विभाग एक यूनिट की स्थापना के लिए लागत का 75 प्रतिशत धनराशि अनुदान के रूप में देगा बाकी 25 फीसदी लागत किसान को स्वयं वहन करनी होगी। लाभार्थी किसान के पास कम से कम एक एकड़ भूमि का होना अनिवार्य है। उप कृषि निदेशक राजीव कुमार ने बताया कि जिले में 1242 गांवों में एक एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना कराई जाएगी। इसके लिए किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों का कंपोस्ट खाद के प्रति रुझान बढे़गा।
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वर्मी कंपोस्ट खाद के लाभ
- पशुओं के मल मूत्र, फसल अवशेषों का अनकूलतम प्रयोग।
- खेतों में जीवाश्म कार्बन की कमी दूूर होगी।
- लाभदायक सूक्ष्म जीवाणुओं को क्रियाशील कर भूमि के जैविक गुणों में सुधार होगा।
- मृदा स्वास्थ्य सुधारने के साथ ही पर्यावरण का संरक्षण।