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देवबंदी उलमा ने किया उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान का समर्थन
Updated Fri, 11 Aug 2017 12:48 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। देश में रहने वाले मुस्लिम अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के इस बयान का देवबंदी उलमा ने भी समर्थन किया है। उनका कहना है कि आज मुल्क में जो हालात बने हुए हैं। उसको देखते हुए उपराष्ट्रपति का बयान एकदम दुरुस्त है। दारुल उलूम जकरिया के वरिष्ठ उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन के प्रभारी मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि आज मुल्क में जिस तरह के हालात बने हुए हैं उनको देखते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान से वह सहमत हैं। उन्होंने कहा कि इस वक्त देश में मुसलमानों के अंदर खौफ और मायूसी का माहौल पाया जा रहा है। तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने भी हामिद अंसारी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने हालात का सही अंदाजा लगाकर ही यह बयान दिया है। आज हिंदुस्तान में मुसलमानों की जो सूरत-ए-हाल है वो ऐसी ही है जो उपराष्ट्रपति ने बयां की है। गोरक्षक पूरे हिंदुस्तान में दनदनाते हुए फिर रहे हैं जिन्हें कानून का जरा भी खौफ नहीं है। जिसे चाहे पीटते हैं और जिसे चाहे मौत के घाट उतार देते हैं। वाजदी ने कहा कि उपराष्ट्रपति को यह बयान बहुत पहले देना चाहिए था।
75 साल की उम्र में दारुल उलूम में लिया दाखिला
देवबंद। कहते हैं पढ़ने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। इसे सही साबित करके दिखाया है औरंगाबाद महाराष्ट्र के रहने वाले 75 वर्षीय सैय्यद मजहर अली ने। उम्र के 75 बरस गुजार चुके सैय्यद मजहर ने दारुल उलूम में अरबी शशुम (कक्षा छह) में आठ दिन पूर्व दाखिला लिया है।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के होली क्रास इंग्लिश मीडियम स्कूल से वर्ष 2000 में रिटायर हुए सैय्यद मजहर ने बीएससी, बीएड, एमएससी, एमएड, एमए उर्दू, पीजीडीसीए और पीएचडी जैसी डिग्रियां प्राप्त करने के बाद अब दारुल उलूम में दाखिला लिया है। मजहर का कहना है कि वह बहुत पहले से अरबी पढ़ने की चाहत रखते थे। वह पढ़ाई के सिलसिले में सऊदी अरब भी गए, लेकिन वहां अरबी टू अरबी होने के चलते वह रुक नहीं पाए। जिसके बाद उन्होंने दारुल उलूम की तरफ रुख किया और आठ दिन पहले उनका दाखिला हो गया।
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75 साल की उम्र में दारुल उलूम में लिया दाखिला
देवबंद। कहते हैं पढ़ने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। इसे सही साबित करके दिखाया है औरंगाबाद महाराष्ट्र के रहने वाले 75 वर्षीय सैय्यद मजहर अली ने। उम्र के 75 बरस गुजार चुके सैय्यद मजहर ने दारुल उलूम में अरबी शशुम (कक्षा छह) में आठ दिन पूर्व दाखिला लिया है।
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महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के होली क्रास इंग्लिश मीडियम स्कूल से वर्ष 2000 में रिटायर हुए सैय्यद मजहर ने बीएससी, बीएड, एमएससी, एमएड, एमए उर्दू, पीजीडीसीए और पीएचडी जैसी डिग्रियां प्राप्त करने के बाद अब दारुल उलूम में दाखिला लिया है। मजहर का कहना है कि वह बहुत पहले से अरबी पढ़ने की चाहत रखते थे। वह पढ़ाई के सिलसिले में सऊदी अरब भी गए, लेकिन वहां अरबी टू अरबी होने के चलते वह रुक नहीं पाए। जिसके बाद उन्होंने दारुल उलूम की तरफ रुख किया और आठ दिन पहले उनका दाखिला हो गया।
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