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नगर पालिका का कमेला बंद कराया
Updated Thu, 22 Jun 2017 11:55 PM IST
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गंगोह(सहारनपुर)। मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे नगर पालिका द्वारा संचालित कमेले को डीएम के निर्देश पर बंद करा दिया गया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नगरपालिका के लाइसेंस पर संचालित कमेले में मानकों को पूरा करने के लिए छह माह का वक्त देते हुए सशर्त संचालन की अनुमति दी गई थी।
बोर्ड ने वायु प्रदूषण रोकने के उपाय करने के लिए 19 जून 2017 और सेप्टिक टैंक आदि बनाने के लिए 22 जून 2017 तक का समय दिया था। समय सीमा समाप्त होते ही डीएम ने उक्त कमेले की जांच के आदेश दिए। इसके बाद बृहस्पतिवार को प्रदूषण विभाग के अधिकारी पीपी श्रीवास्तव ने टीम के साथ कमेले पर छापेमारी की। इस दौरान कोतवाल योगेश शर्मा भी मौजूद रहे। अधिकारियों की टीम को देखते ही कमेला संचालकों में हड़कंप मच गया। कमेले में बड़ी संख्या में पशुओं को रखा गया था और उनके कटान की तैयारी चल रही थी। टीम ने सभी पशुओं को कमेले से बाहर निकलवा दिया। कमेले के बराबर में स्थित कोल्ड स्टोर को भी मानकों का पालन नहीं होने पर बंद करा दिया गया। इसके बाद संचालकों को अग्रिम आदेशों तक कमेला बंद रखने की चेतावनी देकर टीम लौट गई।
पूर्व में भी होती रही है तालाबंदी
बता दें कि मानकों पर खरा ना उतरने के चलते इस कमेले में पूर्व में भी अनेक बार प्रशासन तालाबंदी कर चुका है। परंतु इसके बावजूद कुछ ही दिनों में उन्हीं हालातों में बिना मानकों की पूर्ति कराए ही प्रशासन द्वारा कमेला पुन: चालू करा दिया जाता है। संचालक हर बार समय सीमा बढ़वाने में कामयाब हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठते हैं। उधर, मानकों के अभाव में चल रहे कमेले से क्षेत्र का भूजल और वायु लगातार प्रदूषित होते जा रहे हैं। कमेले के आसपास के क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीण कैंसर, श्वांस रोगों और संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पूरे वातावरण में भयंकर बदबू रहती है। इसके अलावा अवैध रूप से चल रहे कमेले में प्रतिबंधित और कम उम्र के पशुओं का कटान किए जाने के आरोप भी लगते रहे है। इससे हिंदू संगठनों और नागरिकों में भी रोष व्याप्त है।
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बोर्ड ने वायु प्रदूषण रोकने के उपाय करने के लिए 19 जून 2017 और सेप्टिक टैंक आदि बनाने के लिए 22 जून 2017 तक का समय दिया था। समय सीमा समाप्त होते ही डीएम ने उक्त कमेले की जांच के आदेश दिए। इसके बाद बृहस्पतिवार को प्रदूषण विभाग के अधिकारी पीपी श्रीवास्तव ने टीम के साथ कमेले पर छापेमारी की। इस दौरान कोतवाल योगेश शर्मा भी मौजूद रहे। अधिकारियों की टीम को देखते ही कमेला संचालकों में हड़कंप मच गया। कमेले में बड़ी संख्या में पशुओं को रखा गया था और उनके कटान की तैयारी चल रही थी। टीम ने सभी पशुओं को कमेले से बाहर निकलवा दिया। कमेले के बराबर में स्थित कोल्ड स्टोर को भी मानकों का पालन नहीं होने पर बंद करा दिया गया। इसके बाद संचालकों को अग्रिम आदेशों तक कमेला बंद रखने की चेतावनी देकर टीम लौट गई।
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पूर्व में भी होती रही है तालाबंदी
बता दें कि मानकों पर खरा ना उतरने के चलते इस कमेले में पूर्व में भी अनेक बार प्रशासन तालाबंदी कर चुका है। परंतु इसके बावजूद कुछ ही दिनों में उन्हीं हालातों में बिना मानकों की पूर्ति कराए ही प्रशासन द्वारा कमेला पुन: चालू करा दिया जाता है। संचालक हर बार समय सीमा बढ़वाने में कामयाब हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठते हैं। उधर, मानकों के अभाव में चल रहे कमेले से क्षेत्र का भूजल और वायु लगातार प्रदूषित होते जा रहे हैं। कमेले के आसपास के क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीण कैंसर, श्वांस रोगों और संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पूरे वातावरण में भयंकर बदबू रहती है। इसके अलावा अवैध रूप से चल रहे कमेले में प्रतिबंधित और कम उम्र के पशुओं का कटान किए जाने के आरोप भी लगते रहे है। इससे हिंदू संगठनों और नागरिकों में भी रोष व्याप्त है।
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