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तीन साल में रोपे 42 लाख पौधे, 70 प्रतिशत तोड़ गए दम
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गांव बढेडी कोली में 1 वर्ष पूर्व करीब 400 पेड़ लगाए गए थे लेकिन मौके पर मात्र 4 पेड जीवित है
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। धरती को हरी-भरी करने के लिए हर वर्ष पौधरोपण अभियान चलता है। खासकर विश्व पर्यावरण दिवस और मानसून से पूर्व पौधे रोपे जाते हैं। बीते तीन साल में जनपद के ग्रामों में 42 लाख पौधे रोपित किए गए, लेकिन इनमें 30 प्रतिशत पौधे ही बचे हैं। बाकी पौधे पेड़ का रूप नहीं ले पाए और देखरेख के अभाव में दम तोड़ गए।
बीते तीन सालों में रोपे गए पौधों की शनिवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो स्थिति बेहद खराब मिली। जनपद में 11 विकासखंड हैं। इनमें बलियाखेड़ी, पुवांरका, मुजफ्फराबाद, साढ़ौली कदीम, सरसावा, नकुड़, गंगोह, नानौता, रामपुर मनिहारान, देवबंद, नागल शामिल हैं, जिनमें 884 ग्राम पंचायत हैं। ज्यादातर ग्राम पंचायतों में बीते सालों लगाए गए पौधे गायब मिले। हर वर्ष जिला पंचायत राज विभाग बड़ी संख्या में पौधे रोपित कराता है। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी दी जाती है, लेकिन पौधे लापरवाही की वजह से दम तोड़ देते हैं। तीन साल में रोपे गए 42 लाख पौधों में से 70 प्रतिशत पौधे सूख गए और वह पेड़ नहीं बन पाए। 30 प्रतिशत वही पौधे बड़े हो पाए हैं, जहां पर ग्राम पंचायतों में लोगों ने देखरेख की है।
इस बार भी है 19 लाख का लक्ष्य
इस बार भी मानसून से पूर्व जिले भर में 19 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है। ग्राम पंचायतों में फलदार और औषधीय पौधे रोपित किए जाने की योजना है। अगर इस बार भी पौधों की देखरेख न हुई तो कुछ समय बाद पहली जैसी ही स्थिति देखने को मिलेगी।
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होनी चाहिए प्रभावी कार्रवाई
नागल क्षेत्र के गांव बढेड़ीकोली के खेल मैदान में एक वर्ष पूर्व 400 पौधे रोपित किए गए थे, लेकिन वर्तमान में मात्र चार पौधे ही पेड़ बन सके हैं। पूर्व प्रधान चौधरी राजबीर सिंह ने बताया कि मैदान के पास कुछ लोगों ने भेेड़ और बकरी पालते हैं, जिन्होंने पौधों को बकरी और भेड़ों का निवाला बना दिया। गांव गदनपुरा के प्रधान संजय वालिया कहना है कि ग्राम पंचायत में जिस व्यक्ति के घर के पास पौधा रोपित किया जाए, उसको पौधे की देखरेख की जिम्मेदारी दी जाए। इसके अलावा पौधों को तोड़ने या पशुओं को खिलाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। तभी, योजना सफल हो पाएगी।
ग्राम पंचायतों में लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पौधों की देखरेख करनी चाहिए। विभाग की ओर देखरेख भी की जाती है। इसके लिए निगरानी समिति भी बनी है, मगर इस कार्य में नागरिकों के सहयोग की भी बेहद आवश्यकता है। तभी, योजना पूरी तरह सफल हो पाएगी। -विजय कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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बीते तीन सालों में रोपे गए पौधों की शनिवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो स्थिति बेहद खराब मिली। जनपद में 11 विकासखंड हैं। इनमें बलियाखेड़ी, पुवांरका, मुजफ्फराबाद, साढ़ौली कदीम, सरसावा, नकुड़, गंगोह, नानौता, रामपुर मनिहारान, देवबंद, नागल शामिल हैं, जिनमें 884 ग्राम पंचायत हैं। ज्यादातर ग्राम पंचायतों में बीते सालों लगाए गए पौधे गायब मिले। हर वर्ष जिला पंचायत राज विभाग बड़ी संख्या में पौधे रोपित कराता है। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी दी जाती है, लेकिन पौधे लापरवाही की वजह से दम तोड़ देते हैं। तीन साल में रोपे गए 42 लाख पौधों में से 70 प्रतिशत पौधे सूख गए और वह पेड़ नहीं बन पाए। 30 प्रतिशत वही पौधे बड़े हो पाए हैं, जहां पर ग्राम पंचायतों में लोगों ने देखरेख की है।
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इस बार भी है 19 लाख का लक्ष्य
इस बार भी मानसून से पूर्व जिले भर में 19 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है। ग्राम पंचायतों में फलदार और औषधीय पौधे रोपित किए जाने की योजना है। अगर इस बार भी पौधों की देखरेख न हुई तो कुछ समय बाद पहली जैसी ही स्थिति देखने को मिलेगी।
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होनी चाहिए प्रभावी कार्रवाई
नागल क्षेत्र के गांव बढेड़ीकोली के खेल मैदान में एक वर्ष पूर्व 400 पौधे रोपित किए गए थे, लेकिन वर्तमान में मात्र चार पौधे ही पेड़ बन सके हैं। पूर्व प्रधान चौधरी राजबीर सिंह ने बताया कि मैदान के पास कुछ लोगों ने भेेड़ और बकरी पालते हैं, जिन्होंने पौधों को बकरी और भेड़ों का निवाला बना दिया। गांव गदनपुरा के प्रधान संजय वालिया कहना है कि ग्राम पंचायत में जिस व्यक्ति के घर के पास पौधा रोपित किया जाए, उसको पौधे की देखरेख की जिम्मेदारी दी जाए। इसके अलावा पौधों को तोड़ने या पशुओं को खिलाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। तभी, योजना सफल हो पाएगी।
ग्राम पंचायतों में लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पौधों की देखरेख करनी चाहिए। विभाग की ओर देखरेख भी की जाती है। इसके लिए निगरानी समिति भी बनी है, मगर इस कार्य में नागरिकों के सहयोग की भी बेहद आवश्यकता है। तभी, योजना पूरी तरह सफल हो पाएगी। -विजय कुमार, मुख्य विकास अधिकारी