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बासमती की गुणवती में सुधार जरूरी : प्रसाद
Updated Sun, 23 Sep 2018 12:40 AM IST
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निर्यात के लिए बासमती की गुणवत्ता में सुधार लाना जरूरी : प्रसाद
सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र सभागार में शनिवार को बासमती धान की गुणवत्ता में सुधार विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि निर्यात बढ़ाने के लिए बासमती धान की गुणवत्ता में और सुधार लाना होगा। गुणवत्ता बेहतर होने के बाद ही बासमती धान के निर्यात को बढ़ाया जा सकता है।
शनिवार को आयोजित कार्यशाला में सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गया प्रसाद ने धान निर्यात की संभावनाओं पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने किसानों को एकीकृत खेती अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे धान हो या अन्य कोई फसल। केवल उसका उत्पादन कर लेना काफी नहीं होता है। उसकी गुणवत्ता का स्तर भी सुधारना जरूरी है। इसके बाद ही बेहतर पैदावार और फिर उसकी अच्छी बिक्री या निर्यात की संभावना बनती है। इस दौरान उन्होंने प्रश्नोत्तरी में भाग लेने वाले किसानों को पुरस्कृत भी किया। निदेशक प्रसार डॉ. एसके सचान ने बासमती धान में भूरा फूदका, तना बेधक आदि कीटों पर नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा एवं ट्राइकोग्रामा कार्ड इस्तेमाल करने पर जोर दिया। केवीके के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बासमती धान की बीमारियों पर नियंत्रण की जानकारी दी। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रीतेश शर्मा, डॉ. अनुपम दीक्षित, संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. डीएस राजपूत, जिला कृषि रक्षा अधिकारी शिप्रा सहित अन्य ने विचार व्यक्त किए। साकेश चौधरी, सेठपाल, मैनपाल, सतवीर, कुलदीप, मदन सिंह, सुरेश राणा, भारत भूषण शर्मा, आदि रहे।
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सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र सभागार में शनिवार को बासमती धान की गुणवत्ता में सुधार विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि निर्यात बढ़ाने के लिए बासमती धान की गुणवत्ता में और सुधार लाना होगा। गुणवत्ता बेहतर होने के बाद ही बासमती धान के निर्यात को बढ़ाया जा सकता है।
शनिवार को आयोजित कार्यशाला में सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गया प्रसाद ने धान निर्यात की संभावनाओं पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने किसानों को एकीकृत खेती अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे धान हो या अन्य कोई फसल। केवल उसका उत्पादन कर लेना काफी नहीं होता है। उसकी गुणवत्ता का स्तर भी सुधारना जरूरी है। इसके बाद ही बेहतर पैदावार और फिर उसकी अच्छी बिक्री या निर्यात की संभावना बनती है। इस दौरान उन्होंने प्रश्नोत्तरी में भाग लेने वाले किसानों को पुरस्कृत भी किया। निदेशक प्रसार डॉ. एसके सचान ने बासमती धान में भूरा फूदका, तना बेधक आदि कीटों पर नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा एवं ट्राइकोग्रामा कार्ड इस्तेमाल करने पर जोर दिया। केवीके के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बासमती धान की बीमारियों पर नियंत्रण की जानकारी दी। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रीतेश शर्मा, डॉ. अनुपम दीक्षित, संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. डीएस राजपूत, जिला कृषि रक्षा अधिकारी शिप्रा सहित अन्य ने विचार व्यक्त किए। साकेश चौधरी, सेठपाल, मैनपाल, सतवीर, कुलदीप, मदन सिंह, सुरेश राणा, भारत भूषण शर्मा, आदि रहे।
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